क्षमता से कितना बाहर मंडी

मंडी शहर की स्थापना 1527 ईस्वी में राजा अजबर सेन ने की थी।  शहर प्रदेश के सबसे प्राचीन नगरों में से एक है, लेकिन दुखद यह है कि यह शहर न तो अपनी प्राचीन विरासत को सही तरह से समेट रख सका  और न ही एक आधुनिक शहर बन पाया है। बेतरतीब निर्माण की मार, आबादी का बढ़ता बोझ और भविष्य को ध्यान में न रखकर बनाई गई योजनाओं ने आज शहर को प्रदेश के सबसे तंग शहरों में खड़ा कर दिया है। छोटी कांशी के नाम से विख्यात मंडी शहर की हालत बता रहे हैं…

अमन अग्होत्री

हिमाचल प्रदेश के हृदय स्थल में बसा मंडी नगर सौदर्य, ऐतिहासिक, पुरातात्विक विरासत एवं समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को अपने दामन में समेटे हुए है। ब्यास नदी के तट पर बसे मंडी शहर की स्थापना 1527 ईस्वी में राजा अजबर सेन द्वारा की गई। मंडी शहर प्रदेश के सबसे प्राचीन शहरों में से एक है, लेकिन दुखद यह है कि यह शहर न तो अपनी प्राचीन विरासत को सही तरह से समेटे रख सका है और न ही एक आधुनिक शहर बन सका है। बेतरतीब निर्माण की मार, आबादी का बढ़ता बोझ और भविष्य को ध्यान में रखकर न बनाई गई योजनाओं ने आज मंडी शहर को प्रदेश के सबसे तंग शहरों में खड़ा कर दिया है। जहां लोगों को कई दिक्कतों व समस्याओं से परेशान होना पड़ रहा है। 2011 की जनसंख्या के अनुसार मंडी शहर में 26422 लोग 13 वार्ड में रहते हैं, जबकि इस शहर में हर रोज 10 से 15 हजार लोग अपनी जरूरतों के लिए आते हैं, इसमें पर्यटक भी शामिल हैं। 2011 की जनगनणा के बाद अब मंडी शहर की जनसंख्या लगभग 31 हजार के आसपास पहुंच चुकी है, जबकि यह शहर मात्र 4.26 स्कवेयर किलोमीटर में फैला है, जो कि क्षेत्रफल के हिसाब से प्रदेश के छोटे शहरों में से एक है, लेकिन आबादी के मुकाबले में यह शहर कई शहरों को पछाड़ता है। यही वजह है यहां प्रति स्क्वेयर किलोमीटर में आबादी का घनत्व 6202 है,  जो कि क्षेत्रफल के हिसाब से मंडी शहर को सबसे कम घनत्व वाले शहरों की श्रेणी में ऊपर खड़ा करता है और इससे मंडी शहर में भीड़भाड़ और संसाधनों की कमी का अंदाजा लगाया जा सकता है, जबकि मंडी जिला में ही सुंदनगर शहर क्षेत्रफल के हिसाब से मंडी शहर से दो गुना बड़ा है, जबकि सुंदरनगर शहर की आबादी मंडी से कम है। मंडी शहर का एक हिस्सा रियासत के समय का बना हुआ  है, जिसे पुरानी मंडी कहा जाता है, लेकिन इसके बाद बसे, विकसित व फैले पैलेस कालोनी, जेल रोड, मंगवाई, जवाहर नगर, सैण, समखेतर व पड्डल के अविकसित रूप ने शहर के स्वरूप को बिगाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। यहां न सिर्फ रिहायश व व्यावसायिक परिसर अंधाधुंध मांग व कम उपलब्धता के कारण महंगे दामों पर हैं, बल्कि इनमें से कई जगह तो ऐसी हैं, जहां पूरा दिन सूर्यदेव की किरणें नहीं पहुंच सकती हैं। यही वजह है कि मंडी शहर में आज लोगों को पेयजल, पार्क-पार्किंग की कमी, गंदगी की दिक्कत, सीवरेज की समस्या, शौचालयों की कमी, रिहायश की कमी, खेल मैदानों की कमी, अधूरे फुटपाथ  और सार्वजनिक सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

31,000    आबादी

4.26       स्कवेयर किलोमीटर, क्षेत्रफल

6,202     जनसंख्या घनत्व

10,000   रोजाना आमद

हर रोज शहर आते हैं दस हजार

मंडी शहर में हर रोज हजारों लोग पहुंचते हैं। अनुमान के अनुसार शहर में हर रोज दस हजार से अधिक लोगों का आना-जाना होता है, जिसमें ज्यादातर लोग काम-धंधे वाले हैं, जो कि आसपास की पंचायतों के निवासी हैं, लेकिन अपने काम धंधों के लिए शहर पर निर्भर हैं। इसके अलावा भी शहर में किराए के कमरे लेकर रहने वाले लोगों की संख्या पांच हजार से अधिक है। यह लोग मंडी शहर में ही अब अपना नौकरी या कारोबार चला रहे हैं। यह संख्या हर वर्ष बढ़ती-घटती भी रहती है।

सख्ती से लागू किए जा रहे नियम

शहर में निर्माण कार्य नियमों के अनुसार हो, इसके लिए सख्ती से नियम लागू किए जा रहे हैं। भविष्य को ध्यान में रख योजनाएं बनाई जा रही हैं। शहर के आसपास के लगते क्षेत्रों में भी टीसीपी को लागू किया गया है। मंडी शहर के 8 से अधिक पार्किंग प्रपोज्ड हैं। इसके साथ ही एडीबी के माध्यम से शहर को संवारा जा रहा है

ऋगवेद ठाकुर, उपायुक्त, मंडी

धार्मिक पर्यटन से जुड़े मंडी

मंडी शहर के प्राचीन व धार्मिक महत्त्व को देखते हुए इसे धार्मिक पर्यटन से जोड़ा जाना चाहिए। इसके लिए शहर के धार्मिक व प्राचीन महत्त्व का प्रचार-प्रसार बडे़ स्तर पर किया जाना चाहिए। पिछले कुछ समय से इस बारे में प्रयास हुए हैं और शहर में पर्यटक दिखने लगे हैं, लेकिन इसे लेकर अभी ठोस प्रयासों की जरूरत है

मुरारी शर्मा, साहित्यकार

शहर की क्षमता बढ़ाए सरकार

अंधाधुंध निर्माण के कारण अब शहर के स्वरूप को तो बदला नहीं जा सकता है, लेकिन सरकार को चाहिए कि छोटी काशी की क्षमता बढ़ाई जाए। शहर के अंदर बाइपास, अंडर ग्राउंड पाथ व पार्किंग, मल्टी स्टोरी पार्किंग और अन्य योजनाएं बनाई जानी चाहिए, जिससे शहर के बढ़ते दबाब से लोगों को राहत मिल सके, इससे व्यवसाय भी बढे़गा।

मुनीष सूद ,प्रधान, होटल एसोसिएशन

15 साल में हांफ गया सीवरेज सिस्टम

मंडी शहर के लिए सीवरेज सिस्टम 2002 में बन कर तैयार हुआ था और उस समय इसे 35 वर्ष के हिसाब से बनाया गया था, लेकिन मंडी शहर की बढ़ती आबादी व हाउस होल्ड ने इस सिस्टम को 15 वर्षों में ही फेल कर दिया। अब पिछले कुछ वर्षों से मंडी शहर की सीवरेज हांफना चुकी है और हर रोज शहर में सीवरेज की दिक्कत से लोगों को परेशान होना पड़ता है। पिछले कई दिनों से अब विभाग शहर के लिए नई सीवरेज योजना प्लान करने में लगा हुआ है। इस समय शहर में सीवरेज के 5100 से अधिक कनेक्शन हैं।

सफाई व्यवस्था बेहाल कूड़ा संयंत्र तक नहीं

मंडी शहर में डोर-टू-डोर गारबेज क्लेक्शन को लागू किया गया है, लेकिन यह सिस्टम पूरी तरह से सफल नहीं हो सका है। हालांकि इसके लागू होने के बाद शहर से निकलने वाले कूड़ा-कर्कट में काफी वृद्धि जरूर हुई है, लेकिन इसके बाद शहर में गंदगी को देखा जा सकता है। शहर के नदी-नालों में गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। डंपिंग साइट न होने के कारण सुकेती व ब्यास डंपिंग साइट बन चुकी हैं। नगर परिषद मंडी का अब तक अपना कूड़ा-संयंत्र भी नहीं है।

आधे से ज्यादा पार्क बदहाल

मंडी शहर में यूं तो 14 पार्क नगर परिषद के रिकार्ड में हैं, लेकिन इनमें से आधे से ज्यादा पार्क बदहाल हैं। इनमें से कई पार्क तो ऐसे हैं, जिन पर अवैध कब्जों की मार भी है। ऐसे में शहर में पार्क होने के बाद भी लोगों को इसका फायदा नहीं मिल पर रहा है।

रेहड़ी-फड़ी वाले कहां जाएं

मंडी शहर में रेहड़ी-फड़ी व सब्जी मंडी के लिए कोई मार्केट नहीं है। रेहड़ी-फड़ी वालों का तो हर रोज प्रशासन के साथ टकराव होता है। तंग शहर में रेहड़ी-फड़ी धारक नो वेडिंग जोन में बैठते रहते हैं। आज तक यहां के नेता एक रेहड़ी-फड़ी मार्केट नहीं बनवा सके हैं।

शहर छोड़ गांवों में बस गए लोग

बेतरतीब निर्माण ने डराए 

एक समय था, जब मंडी शहर में चंद हजार लोग रहते थे, लेकिन इसके बाद बढ़ती आबादी और बेतरतीब निर्माण ने शहर की शक्ल ही बिगाड़ कर रख थी। अब हालात तो यह है कि शहर के सैकड़ों ऐसे हिस्से हैं, जहां बेतरतीब निर्माण की वजह से तंग गलियों में सूर्य की किरणें तक नहीं पहुंचती और दोपहिया वाहन लेकर जाना भी मुश्किल है। यही वजह है कि शहर से बड़ी संख्या में लोगों ने निकल कर शहर से सटी पंचायतों के क्षेत्र में अपने घर बना लिए हैं। जहां न तो पार्किंग की दिक्कत और न ही तंग गलियों की समस्या है। शहर से सटी ये आधा दर्जन से अधिक पंचायतें अब अगले एक दशक में शहर का ही रूप ले लेगी। इस समय नजर डालें तो शहर के साथ साथ नेला, भ्यूली, सनयारड़ी, बिजणी, तल्याड़ और रघुनाथ व सैण मोहल्ले की तरफ लगातार हो रहा निर्माण इसी की वजह है। जेल रोड से लेकर तल्याड़ की तरफ अब बेहताशा निर्माण हो चुका है। एनएच पर भी अब मंडी शहर नेरचौक की तरफ बढ़ता ही जा रहा है।

90 फीसदी सड़कें तंगहाल, जाम की मार

मंडी शहर रियासत काल का शहर है। इसलिए यहां सड़कें और रास्तों का निर्माण राजाओं के समय से होता आया है, लेकिन आज मंडी शहर की सड़कें तंगहाल हैं। इन पर कब्जों की मार है। शहर की मुख्य सड़कों के साथ वार्ड वाइज संपर्क मार्गों को मिला कर यह संख्या में 57 के लगभग बनती है, लेकिन इसमें 90 प्रतिशत सड़कें ऐसी हैं, जो काफी तंग हैं और इनमें हमेशा जाम की मार बनी रहती है। जिसमें स्कूल बाजार सड़क, अस्पताल रोड सड़क, जेल रोड सड़क, मोती बाजार सड़क, कालेज रोड सड़क, मंगवाई सड़क और गांधी चौक ऐसे हिस्से हैं, जो कि टै्रफिक की बढ़ती मार का बोझ सह रहे हैं। कुछ वर्ष पहले तक तो मंडी शहर में पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ तक नहीं थे, लेकिन अब फुटपाथ बने हैं। हालांकि यह फुटपाथ भी कम चौडे़ हैं। मंडी शहर  के सभी मुख्य बाजार सड़क किनारे ही बसे हैं। मंडी शहर में अंडर ग्रांउड पाथ, फ्लाईओवर और शहर के एक हिस्से से बाइपास रोड की सुविधा अब लाजिमी हो चुकी है।

81 मंदिर फिर भी धार्मिक पर्यटन से नहीं जुड़ी छोटी काशी

देश की काशी में अस्सी मंदिर स्थापित हैं, तो देश की छोटी काशी मंडी में 81 प्राचीन मंदिर हैं। मंडी शहर में कई ऐसे प्राचीन मंदिर, जिनकी स्थापना सदियों पहले हुई है और यह ऐसे मंदिर देश के किसी दूसरे हिस्से में नहीं हैं। सदियों पुराना राज माधव मंदिर, बाबा भूतनाथ मंदिर, महामृत्युंजय मंदिर, त्रिलोकीनाथ, अर्द्धनारेश्वर, पंचवक्त्र, सिद्ध गणपति, टारना माता, भीमा काली और पड्डल में गुरू गोविंद सिंह गुरुदारा सहित कई ऐसे मंदिर मंडी शहर में हैं, जो कि हजारों लोगों की आस्था के साथ धार्मिक पर्यटन का केंद्र हैं, लेकिन इसके बाद भी मंडी शहर को धार्मिक पर्यटन के साथ नहीं जोड़ा जा सका है। इसके साथ ही  मंडी शहर को धार्मिक पर्यटन के अलावा छोटी काशी का भ्रमण व ब्यास नदी को साथ जोड़ते हुए वाटर टूरिज्म से भी जोड़ा सकता है, लेकिन इस बारे में आज तक पर्याप्त प्रयास ही नहीं हुए हैं,जबकि धार्मिक पर्यटन से अगर छोटी काशी को जोड़ा जाए और जिला के अन्य धार्मिक स्थलों को भी इसमें शामिल किया जाए तो मंडी शहर में आने वाले पर्यटकों की संख्या में काफी वृद्धि हो सकती है।

मुश्किल से एक रात ही टिकते हैं सैलानी

मंडी शहर में पर्यटक मुश्किल से एक रात काटते हैं। एक दिन में ही शहर का भ्रमण कर अगले दिन पर्यटक मंडी शहर से लौट जाते हैं। हालांकि मंडी शहर में 45 के लगभग होटल, गेस्ट हाउस व सराय हैं, लेकिन वर्ष में मुश्किल से पर्यटक सीजन के दौरान मंडी के होटल 15 दिन के लिए पैक होते हैं। इसके साथ ही पर्यटकों को यहां पार्किंग की समस्या से भी जूझना पड़ता है। साल भर मंडी शहर में 50 हजार लगभग पर्यटक ही घूमने पहुंचते हैं।

हजारों वाहन, 21 पार्किंग

मंडी शहर में चौपहिया वाहनों के लिए सिर्फ 17 पार्किंग उपलब्ध हैं, जबकि 4 पार्किंग दोपहिया वाहनों के लिए हैं। शहर में वाहनों की संख्या हजारों में हैं। हर रोज मंडी शहर में लोग पार्किंग की समस्या से परेशान होते हैं। लोगों को रात के समय सड़क किनारे अपने वाहन खडे़ करने पड़ते हैं। पिछले पांच वर्षों से मंडी शहर में मल्टी स्टोरी पार्किंग की योजना सिरे नहीं चढ़ पा रही है। अगर शहर की कुछ निजी पार्किंग बंद हो जाएं तो शहर में पार्किंग के लिए हाहाकार मच जाएगा।

एक हजार भवन अवैध

मंडी शहर में इस समय सात हजार से अधिक भवन हैं, जिसमें टीसीपी नियम तोड़ने के एक हजार से अधिक मामले हैं। वर्षों पहले हुए बेतरतीब निर्माण की वजह से लोगों को मंडी शहर में टीसीपी के नियमों के अनुसार घर बनाना मुश्किल हो गया है। यही वजह है कि मंडी शहर में घर बनाना मुश्किल हो गया है।

पर्यटक स्थलों पर बेहतर हो सड़क सुविधा

मंडी शहर के ईद-गिर्द एक नहीं बल्कि कई पर्यटक स्थल हैं। हालांकि इन स्थलों की दूरी 20 किलोमीटर से लेकर 80 किलोमीटर से अधिक है, लेकिन सभी स्थल सड़क सुविधा से जुडे़ हुए हैं। वहीं जिला से हर वर्ष लाखों पर्यटक गुजरते हैं, लेकिन रुकते दस प्रतिशत भी नहीं। बरोट, झंटीगरी, फूलाधार, पराशर, जंजैहली, करसोग घाटी, चौहार वैली, ज्यूणीघाटी, देवीदड़, तुगांसीगढ़, गाड़ागुशैणी, स्परैहणी धार, थाची, रिवालसर, कमरूनाग मंदिर, देव चुंजवाला मंदिर, शिकारी देवी, मुरारी देवी, नैणादेवी मंदिर, धुआंदेवी और तीन धर्मस्थलों की स्थली रिवालसर जैसे पर्यटन स्थल शहर के करीब हैं। वहीं, यह पर्यटक स्थल सड़क सुविधा से तो जुड़े हैं, लेकिन इन्हें जोड़ने वाली सड़क साल भर बेहतर नहीं रहती हैं। सर्दियों के मौसम में कई स्थलों का सड़क संपर्क कट जाता है, तो इन जगहों पर पर्यटक के लिए जरूरी सुविधाएं भी पर्याप्त नहीं हैं।

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