हिमाचल सरकार का एक साल

एक साल पहले हिमाचल में सत्ता परिवर्तन और जयराम ठाकुर के रूप में सीएम का नया चेहरा सामने आने से लोगों की उम्मीदें भी बढ़ गईं। एक साल के सफर में प्रदेश सरकार लोगों की कसौटी पर कितना खरा उतर पाई, कौन से ऐसे क्षेत्र हैं, जहां सरकार जनमानस की अपेक्षाओं को पूरा नहीं कर पाई, दखल के जरिए पड़ताल कर रहे हैं राजधानी ब्यूरो से विशेष संवाददाता शकील कुरैशी और स्टाफ रिपोर्टर दीपिका शर्मा……

पहाड़ी प्रदेश की सत्ता बदले एक साल का समय हो चला है। सत्ता परिवर्तन के साथ यहां पर मुख्यमंत्री का चेहरा भी बदला लिहाजा जन अपेक्षाएं भी बढ़ी हैं। पुराने अनुभवी चेहरों का समय तो लोगों ने देख लिया, लेकिन नया चेहरा जो अनुभव भी रखता है, किस तरह से प्रदेश के हालातों को बदलेगा यह सोच लोगों के मन में एक साल बाद भी कायम है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने अपने एक साल के कार्यकाल में हर क्षेत्र में परफॉर्म करने की पूरी कोशिश की है। कई क्षेत्रों में इसके बेहतर नतीजे भी देखने को मिल हैं तो कई क्षेत्रों में अभी नतीजे आने बाकी हैं। बस किराया बढ़़ोतरी व कानून व्यवस्था के मामले में जनता को थोड़ी निराशा भी हाथ लगी है परंतु अभी एक साल हुआ है और सरकार को बहुमत पांच साल का है।

पर्यटन और निवेश के क्षेत्र में अभी सकारात्मक नतीजे आने की उम्म्मीद है, जिसे आम जनता भी सोच रही है। इस सरकार की एक बड़ी सोच यही रही कि प्रदेश में स्वरोजगार कैसे बढ़े, राज्य में निवेश कैसे आए, ताकि यहां की अर्थव्यवस्था पटरी पर आ सके। क्योंकि अभी भी कर्ज का दंश जहां सरकार को झेलना पड़ रहा है वहीं आम जनता भी इससे प्रभावित है।

जयराम ठाकुर ने सत्ता में आने के बाद प्रदेश की जनता को यह साफ कर दिया कि सरकार को कर्ज की बैसाखियों पर चलना ही होगा, लेकिन इस कर्ज से मुक्ति के रास्ते सरकार को निकालने हैं, जिनके लिए उपाय सुझाए गए। हालांकि 50 हजार करोड़ से ज्यादा के कर्ज में दबे हिमाचल प्रदेश की सरकार के सामने राजनीतिक चुनौतियां भी बेहद रहीं जिसके चलते बोर्ड, निगमों में नई नियुक्तियां करनी पड़़ी जिसे लेकर जयराम सरकार भी निशाने पर है। लोगों को शुरुआत में ऐसा लगा कि शायद यह सरकार अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं बढ़ाएगी मगर समय के साथ-साथ ऐसा नहीं हो सका और आज राजनीतिक नियुक्तियों की एक फौज इस सरकार ने भी खड़ी कर दी है। इस पर विपक्ष भी ज्यादा कुछ नहीं बोल सकता क्योंकि उनके समय में भी ऐसा हो चुका है, इसलिए राजनीतिक रूप से दोनों दल एक-दूसरे पर साफ-साफ बोलने से कतरा रहे हैं। बहरहाल, हिमाचल की जयराम सरकार का अभी एक साल का अरसा हो चला है और राज्य की जनता को इससे खासी उम्मीदें हैं। जनता की उम्मीदों पर यह सरकार अपने पांच साल के कार्यकाल में कितना खरा उतरेगी यह समय बताएगा।

 शिमला पेयजल संकट से साख को बट्टा

सरकार की साख पर शिमला का पेयजल संकट बट्टा लगा गया। इस पेयजल संकट की चर्चा पूरे विश्व में थी क्योंकि यहां पर्यटक भी आने से रुक गए थे। शहर में कई दिनों तक पानी के लिए त्राहि-त्राहि मच गई और इस दौरान कई सवाल सरकार पर उठ गए। वैसे सरकार ने अगली गर्मियों में ऐसा संकट न हो इसके लिए बेहतर प्रबंध कर दिया है और नई स्कीम पर काम शुरू हो गया है। परंतु फिर भी सरकार को एक साल में शिमला का पेयजल संकट किसी को नहीं भूलेगा।

 नशाखोरी पर गंभीर सरकार

जयराम सरकार प्रदेश में बढ़ रहे नशे के खिलाफ शुरुआत से ही गंभीर रही है। यही कारण है कि विधानसभा में एक विधेयक पास कर दिया गया ह,ै जिसमें नशे की थोड़ी मात्रा रखने वाले को सजा का प्रावधान है।

केंद्र से मिले तीन बड़़े प्रोजेक्ट

5100 करोड़ रुपए से ज्यादा के तीन प्रोजेक्ट केंद्र सरकार ने हिमाचल के लिए मंजूर किए हैं। इसमें दो प्रोजेक्ट आईपीएच के हैं, तो एक बागबानी का। आईपीएच के दो बेहद बड़े व अहम प्रोजेक्ट हैं जिनमें पेयजल स्त्रोतों के नवीकरण व वर्षा जल संग्रहण की एक परियोजना है। यह प्रोजेक्ट 1688 करोड़ रुपए का है। वहीं समेकित खुंब विकास परियोजना 423 करोड़ की मंजूर हुई है।

गुडि़या-होशियार हेल्पलाइन लांच

सरकार ने दृष्टिपत्र में वादा किया था कि राज्य में गुडि़या व होशियार हेल्पलाइन का गठन किया जाएगा। इसके लिए सरकार ने ना केवल हेल्पलाइन शुरू की बल्कि  गुडि़़या सक्षम बोर्ड का भी गठन किया गया। अलग-अलग हेल्पलाइन जारी किए गए, जिनमें गुडि़या हेल्पलाइन 1515, होशियार 1090, महिला हेल्पलाइन 1091, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 है।

19248

ट्रांसफर

1139

कोर्ट से स्टे

5872

रोजगार

12

अस्पताल अपग्रेड

17

स्कूल अपग्रेड

00

कालेज

06

नए हैल्थ सेंटर

03

बस डिपो

02

मेडिकल कालेज

कांग्रेस की नजर में सरकार जीरो

सुखविंदर सिंह सुक्खू

कांगे्रस अध्यक्ष, हिमाचल प्रदेश

दिहिःआप सरकार को दस में से कितने अंक देते हैं?

सुक्खूः शून्य

दिहिः धूमल व जयराम सरकार में क्या अंतर पाते हैं?

सुक्खूःभाजपा की सरकार है, क्या अंतर हो सकता है। हम यही चाहते हैं कि सरकार जनता से किए वादों को पूरा करे जो नहीं किए हैं। अपने दृष्टि पत्र पर उन्होंने अभी तक दृष्टि ही नहीं डाली और जनता को गुमराह कर रहे हैं। भाजपा केंद्र से लेकर प्रदेश तक सिर्फ शिगूफे छोड़़ने में माहिर है।

दिहिः विपक्ष सरकार को सहयोग क्यों नहीं दे रहा?

सुक्खूः सामाजिक मुद्दों पर विपक्ष हमेशा सहयोग देता रहा है और दे रहा है। नशाखोरी के खिलाफ कांगे्रस ने सहयोग दिया है, वहीं हिमालयन रेजिमेंट की बात पर भी साथ है। प्रदेश हित में पूरा सहयोग दे रहे हैं। दिहिः कौन से मुद्दे हैं, जिन पर सरकार कटघरे में है

सुक्खूः  प्रदेश में बढ़ते नशे के प्रचलन को रोक पाने में अब तक प्रभावी कार्रवाई देखने को नहीं मिली। यहां कानून व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा चुकी है। हत्या व बलात्कार के मामले रोजाना सामने आ रहे हैं। सिर्फ गुडि़या बोर्ड या होशियार हैल्पलाइन बनाने से कुछ नहीं होगा बल्कि कारगर कदम उठाने होंगे।

दिहिः  मुख्यमंत्री का दावा है कि केंद्र सरकार ने भरपूर मदद की

सुक्खूः  मदद केवल भाषणों में ही हुई।   उड़ान योजना हवाई चप्पल पहनने वालों के लिए बताई गई, उस योजना का क्या हुआ। केंद्र से जो प्रोजेक्ट मिले वह सिराज व धर्मपुर तक सीमित होकर रह गया। सरकार भेदभाव मिटाने की बात करती है लेकिन भेदभाव हो रहा है।

दिहिःचार्जशीट देने से क्या लाभ होता है

सुक्खूः चार्जशीट मात्र राजनीति के लिए नहीं है बल्कि विपक्ष सरकार की सच्चाई जनता के सामने लाता है। हमारी चार्जशीट में पूरे तथ्य होंगे। सरकार उस पर कार्रवाई करेगी तो ठीक वरना जनता की अदालत बताएगी कि एक साल में क्या कुछ किया गया है।

प्रदेश को मिला आयुष्मान 

प्रदेश स्वास्थ्य क्षेत्र को अपग्रेड करने के लिए इस वर्ष आयुष्मान योजना को लांच किया गया है। वहीं, इस बार पहली मर्तबा ही इंटरनशिप से पहले मेडिकॉज़ के लिए वॉक इन इंटरव्यू शुरू किए गए हैं, जिसमें  आईजीएमसी और टांडा मेडिकल कालेज  से लगभग 140 डॉक्टरों ने प्रदेश के अस्पतालों में काम करने की इच्छा जाहिर की है। प्रदेश स्वास्थ्य क्षेत्र में सबसे बड़ी उपलब्धि भी यह रही है कि आईजीएमसी में किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू करने का फैसला लिया गया है   प्रदेश के 52 अस्पतालों में टली मेडिसिन की सुविधा शुरू करने पर भी काम शुरू किया गया है।

नहीं बन पाई खेल नीति

सरकार बनने के बाद से प्रदेश में खिलाडि़यों के लिए हरियाणा की तर्ज पर खेल नीति बनाने की बात होती रही परंतु अभी तक इसका खाका तैयार नहीं हो सका है। खिलाड़ी वर्ग इसका इंतजार कर रहा है।

रेस्लिंग इवेंट कठघरे में

ग्रेट खली का रेस्लिंग इवेंट इस सरकार पर बट्टा लगाने वाला रहा। हालांकि युवा वर्ग ने इसे पसंद किया, लेकिन सरकारी स्तर पर ऐसा इवेंट नहीं हो सकता था, जिसे करवाने के लिए कई तरह के प्रयास हुए। बाद में इस पर बड़़ा हल्ला मचना तय था।

महिला अफसर की हत्या

इस साल कसौली गोलीकांड हुआ, जिसने  सरकार के साथ प्रदेश भर को हिलाकर रख दिया। महिला अफसर को अवैध निर्माणकारी ने मौत के घाट उतार दिया। वहीं सिरमौर के केदार जिंदान की हत्या का मामला भी बेहद बड़ा था, जिसने प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर बट्टा लगाया। आंकड़े बताते हैं कि यहां 100 से ज्यादा हत्याएं हो चुकी हैं और 200 से ज्यादा बलात्कार।

चार्जशीट बना रही कांग्रेस

सरकार के नाम भले ही एक साल में कई बड़ी उपलब्धियां हैं, जिनके नतीजे आने वाले समय में देखने को मिलेंगे, लेकिन कई विवाद भी इस साल में उठते रहे हैं। कुछ मुद्दों पर कांग्रेस विपक्ष के नाते एक चार्जशीट भी तैयार कर रही है, जिसे सरकार के एक साल के कार्यकाल में राज्यपाल को सौंपा जाएगा।

कृषि में नए आयाम

किसानों व बागबानों के लिए भी सरकार ने अपने वादे के मुताबिक योजनाएं शुरू की हैं। इसमें मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना, जायका, बागबानी सुरक्षा योजना आदि प्रमुख है। राज्य में जैविक खेती को शून्य बजट खेती से जोड़़ने के लिए सरकार वर्ष भर प्रयासरत रही है और इसके लिए एक व्यापक मुहिम चलाई जा रही है।

गोसेवा आयोग

प्रदेश सरकार का वादा था कि गोसेवा आयोग बनाया जाएगा। मंदिर ट्रस्टों से जुटाई जाने वाली राशि के अलावा यहां शराब की बोतलों पर सैस लगाकर गो सेवा के लिए सरकार पैसा जुटा रही है, जिससे यहां नए गौ सदनों का निर्माण हो और बेसहारा पशुओं को वहां पर आश्रय दिया जा सके। विशेष रूप से सरकार ने गो सेवा आयोग के गठन का निर्णय लिया है।

स्कूलों में चुन रहे मोती

स्कूलों में मोती चुनने का काम भी चल रहा है, जो छात्र अपने स्कूल से निकलकर बेहतरीन पदवी हासिल किए हुए हैं उन्हें स्कूल का गौरव बनाकर उनसे स्कूल के विकास में मदद ली जा रही है।

सोलर पर फोकस

प्रदेश सरकार सोलर पावर के उत्पादन के लिए  बड़ी मुहिम छेड़े हुए हैं। यहां हाइड्रो पावर की बजाय सोलर पावर का इस्तेमाल अधिक हो, इसके लिए काम किया जा रहा है। लोगों को घरों की छतों पर सोलर रूफ टॉप प्लांट लगाने के लिए बेहतरीन योजना लाई गई है।

और ये भी…

मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना, मुख्यमंत्री युवा आजीविका योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना, बेटी है अनमोल, दीन दयाल उपाध्याय कौशल योजना, सैनिक कल्याण योजना कुछ अहम प्रोजेक्ट हैं जिन पर प्रदेश में काम चल रहा है।

इन मुददाों पर घिरी सरकार

बस किरायों में वृद्धि सबसे बड़ी मार

वर्तमान सरकार ने इस साल में प्रदेश के लोगों पर बस किरायों व टैक्सी के किरायों में बेहताशा बढ़ोतरी कर सबसे बड़ी मार मारी है। यह मार सीधे आम जनता को प्रभावित कर गई,जिससे आम जनता में सरकार के प्रति नाराजगी भी है। हालांकि  वर्तमान सरकार को पेट्रोल व डीजल के दामों में भारी बढ़ोतरी के कारण यह फैसला लेना पड़ा, लेकिन आम जनता इससे सीधे रूप से प्रभावित हुई है,  जो इस सरकार का एक बड़ा नेगेटिव प्वाइंट रहा है।

नेशनल हाईवेज, एम्स पर चुप्पी

सत्ता में आने से पहले यहां नेशनल हाई-वे के निर्माण को लेकर बड़ा हल्ला मचाने वाली भाजपा सरकार अपने एक साल के कार्यकाल में सभी एनएच पर कंसल्टेंट नहीं लगा पाई, जिन पर कंसल्टेंट लगाए, उनकी रिपोर्ट अब तक नहीं आई और केंद्र सरकार भी इस मुद्दे पर अब मौन ही दिख रही है। इसी तरह से बिलासपुर में एम्स का मामला है जिसका निर्माण कार्य भी ढुलमुल ही है, जिस पर साफ कुछ नहीं कहा जा रहा।

मुआवजे पर नहीं हो पाया फैसला

फोरलेन से प्रभावित लोगों को मुआवजे का फैक्टर टू देने का वादा किया गया है, जिस पर अधिकारियों ने चर्चा कर ली है। परंतु अभी तक कोई फैसला नहीं हो सका है। इन प्रभावितों के साथ दोबारा से चर्चा होगी परंतु एक साल के कार्यकाल में कोई फैसला नहीं हुआ है। प्रदेश सरकार के लिए यह मुद्दा गले की फांस बन चुका है।

कर्ज से चल रही सरकार

भाजपा ने सत्ता में आने से पहले तत्कालीन सरकार पर बार-बार कर्ज उठाने का आरोप लगाया और इसे राजनीतिक मुद्दा बनाया गया। सत्ता में आने पर भाजपा सरकार लगातार कर्ज ले रही है और प्रदेश का कर्जा बढ़कर 50 हजार करोड़ रुपए से ऊपर हो चुका है। खुद मुख्यमंत्री ने कहा है कि सरकार बिना कर्ज के नहीं चल सकती।

छात्रों को नहीं मिल सकी वर्दी

सरकार इस साल में स्कूली छात्रों को वर्दी मुहैया नहीं करवा पाई, जिस पर लोगों में भी रोष है। स्कूली छात्रों को मुफ्त वर्दी के लिए टेंडर ही नहीं हो पा रहे हैं। अब साल के अंत में इस दिशा में प्रयास तेज किए गए हैं,मगर तब तक स्कूली सत्र ही समाप्त हो जाएगा। यह दाग सरकार की एक  साल की छवि पर लगा है, जिसे विपक्ष भी भुनाने में जुटा है।

बाबा रामदेव को जमीन की लीज

बाबा राम देव को जमीन लीज पर देने का मामला विवादों में रहा है। इस पर विधानसभा में भी बवाल मचा। पूर्व सरकार ने इसे रद्द कर दिया था, लेकिन इस सरकार ने जमीन लीज पर दे दी है।  यह मामला पहले भी सुर्खियों में रह चुका है।

निगमों-बोर्डों में नियुक्तियां

सरकार सत्ता में आने के बाद कहती रही कि मितव्ययता बरती जाएगी, जिसमें यह भी कहा गया कि फिलहाल राजनीतिक नियुक्तियां नहीं होंगी, मगर राजनीतिक तौर पर सरकार ऐसी फंसी कि लगभग सभी निगमों व बोर्डों में राजनीतिक आधार पर चेयरमैन व वाइस चेयरमैन लगाने पड़े।

प्रोजेक्टों को रॉयल्टी, नियमों में संशोधन

बिजली परियोजनाओं को रॉयल्टी बढ़ाने का सरकार का फैसला भी विवादों में रहा। इस पर विधानसभा में हल्ला मचा और विपक्ष ने इसमें बड़े उद्योगपतियों के साथ सांठगांठ के आरोप जड़े हैं। हालांकि सरकार इसे प्रदेश के हित में बताती रही है, मगर नियमों में संशोधन विवादों में है।

इलेक्ट्रिक बसों की खरीद पर हल्ला

इलेक्ट्रिक बसों की खरीद में हालांकि सरकार ने पूर्व सरकार से कम कीमत पर बसें खरीदीं हैं मगर फिर भी इस पर विवाद उठ रहे हैं। मौजूदा सरकार ने 76 लाख रुपए में एक बस खरीदी है, जबकि पिछली सरकार ने एक करोड़ 96 लाख रुपए की कीमत में मनाली के लिए बस खरीदी थी। इस पर राज्यपाल को भी शिकायत हुई है।

शिक्षकों के तबादलों पर बवाल

जयराम सरकार के सत्ता में आने के बाद शिक्षकों के तबादलों को लेकर बवाल मचा। इस पर निशाना साधा गया। शिक्षकों के तबादलों के लिए सरकार ने नई नीति बनाए जाने की बात कही, लेकिन इस पर बवाल मचा लिहाजा सरकार को स्टेप डाउन करना पड़ा।

32 हजार को गैस

घर-घर में महिलाओं को रसोई गैस कनेक्शन की योजना केंद्र सरकार के अलावा राज्य सरकार ने भी चलाई है। यहां करीब डेढ़ लाख के आवेदन सरकार को मिले हैं, जिसमें से 32 हजार को गैस कनेक्शन दे दिए गए हैं।

जनमंच लाजवाब

जयराम सरकार की एक बड़ी उपलब्धि प्रदेश में जनमंच कार्यक्रमों का आयोजन है। राज्य में जितने भी जनमंच कार्यक्रम हो रहे हैं, उनमें लोगों को हजारों की संख्या में न्याय मिला है। लोगों को मौके पर प्रमाण पत्र मिलना और उनकी समस्याओं का मौके पर निपटारा होने से लोग खुश हैं। अभी तक जिलों में जनमंच में 25227 प्राप्त शिकायतों में से 20062 का निपटारा कर दिया है।

62 विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंची सरकार

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने अपने एक साल के कार्यकाल में 62 विधानसभा क्षेत्रों का दौरा पूरा कर दिया है।

मैहली में प्रदेश का पहला आईटी पार्क

प्रदेश सरकार ने शिमला के मैहली में प्रदेश का पहला आईटी पार्क स्थापित करने का निर्णय लिया, जिसका शिलान्यास केंद्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने किया। आईटी सेक्टर में विकास की नई गाथा शुरू कर दी। उसके बाद अब कांगड़ा के गगल में आईटी पार्क स्थापित करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। सरकार ने वन रक्षकों को हथियार देने का निर्णय लिया।

जंगी-थोपन का आबंटन प्रमुख

सालों से विवादों में रहे जंगी-थोपन-पोवारी परियोजना का आबंटन इस सरकार ने किया है और इस परियोजना के बनने की भी अब पूरी उम्मीदे हैं। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य देखभाल योजना के तहत पांच लाख रुपए तक का निशुल्क उपचार का प्रावधान सरकार ने किया है। हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिल तथा प्रोटेक्शन स्वास्थ्य योजना को समायोजित करके हैल्थ केयर हिमकेयर योजना बनाई गई है।

85 हजार करोड़ के निवेश का लक्ष्य

निखरेगा पर्यटन

हिमाचल में औद्योगिक निवेश को चरम पर पहुंचाने का फैसला इस सरकार का बेहद बड़ा फैसला है। राज्य में 85 हजार करोड़ रुपए के निवेश का निर्णय लिया गया है, जिसके लिए सरकार ने गंभीर प्रयास शुरू कर दिए हैं। राज्य में इसके लिए उद्योग पॉलिसी में संशोधन करने की तैयारी है और बड़े पैमाने पर यहां इन्वेस्टर मीट का आयोजन धर्मशाला में जून महीने में किया जा रहा है।  इससे पहले विदेशों में रोड शो के साथ देश के बड़े शहरों में भी रोड शो किए जाएंगे, वहीं मिनी कनक्लेव का आयोजन भी होगा। यह पहली बार है कि कोई सरकार निवेश के लिए बड़े पैमाने पर गंभीर प्रयास करना चाहती है। इससे नतीजे आने वाले साल में देखने को मिलेंगे।

जयराम सरकार ऐसी पहली सरकार है, जिसने राज्य में पर्यटन को बढ़ाने के लिए पहले ही बजट में 20 करोड़ रुपए का विशेष प्रावधान किया। यह प्रावधान करने से पर्यटन की गतिविधियां बढ़ीं, जिसमें राज्य में हेलिटैक्सी सेवा भी चलाई गई। खुद सरकार का जहाज लोगों को लाने ले जाने का काम कर रहा है। इसके साथ प्रदेश में अनछुए पर्यटक स्थलों को विकसित करने पर काम शुरू कर दिया गया है। रोहतांग-मनाली में जॉय राइडिंग शुरू करने की सोच है। डैम साइट पर टूरिज्म गतिविधियों को बढ़ाने के साथ यहां पर वाटर टूरिज्म व एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा देने की सोच है। इस क्षेत्र में काम भी किया जा रहा है। प्रदेश में पर्यटकों को बड़ी सुविधाएं मिलें इसके लिए यहां रोप-वे निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और विशेष तौर पर सरकार ने  रोप-वे निर्माण की पॉलिसी बनाने के अलावा रैपिड मास ट्रांसपोर्ट सिस्टम के लिए अलग से कारपोरेशन का गठन करने का निर्णय लिया है। हिमाचल में पर्यटन को विकसित करने से अर्थव्यवस्था में यकीनन सुधार होगा, यह तय है और इस क्षेत्र को पिछली किसी भी सरकार ने नहीं छुआ। प्रदेश को 1892 करोड़ रुपए की पर्यटन विकास परियोजना केंद्र से स्वीकृत हुई हैं।

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