इतनी मुश्किलों को पार कर घर पहुंचा शहीद…

जहां पैदल चलना भी मुश्किल था, वहां चार कंधों पर शहीद की पार्थिव देह कैसे पहुंची होगी, सेना के जवान ही समझ सकते हैं। अब आप खुद ही अंदाजा लगाइए कि विकास का ढिंढोरा पीटने वाली सरकारें असल मेें कहां खड़ी हैं। हम बात कर रहे हैं झंडूता विकास खंड की घुमारपुर-खमेड़ाकलां सड़क की। अगर यह सड़क बनी होती तो शहीद हवलदार राकेश कुमार की पार्थिव देह को सरहयाली खड्ड पार करने के बजाय आसानी से पैतृक गांव लाया जा सकता था। गांव में अगर कोई बीमार हो जाए तो उसे पैदल या पालकी से मुख्य सड़क झबोला या भगतपुर पहुंचना पड़ता है। घराण पंचायत के वार्ड खमेड़ा की जनता का रोष इस सड़क को लेकर बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे में अब सड़क का बनना बेहद जरूरी हो गया है।

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