जिंदगी के रंगों की असमंजस

– कमलेश कुमार, फतेहपुर

होली के रंगों की सुगबुगाहट मन में खुशियों की चहलकदमी लाती है। कहीं खुशी से रंग बिखेरे जाते हैं, तो कहीं पिछली किसी शिकायत का जवाब भी बड़े सलीके से खूब रंग लगाकर दिया जाता है। कहीं इस रंग-बिरंगे त्योहार में मन कुछ कशमकश में होगा कि जिंदगी भी कैसे रंगों में रंगी है। जिंदगी तो वह रास्ता है, जहां सुख-दुख दोनों मुसाफिर मिलेंगे, परंतु सकारात्मक विचारों से जिंदगी को जीना भी दुखों की राह को थोड़ा आसान जरूर कर देता है। असल में जिंदगी सुख-दुख के रंगों में रंगी है, कम से कम बेरंग तो नहीं। चाहे दुखों के काले साए हैं, पर खुशियों का वह गुलाल भी तो कम नहीं।

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