अगले साल से घटेगी डीजल की मांग

बीएस-6 मानक के चलते कई कंपनियों ने कारें बनाने से खींचें हाथ, अब सीएनजी पर ध्यान

नई दिल्ली -देश में आने वाले समय में डीजल वाली कारों में भारी गिरावट आने की संभावना है। अगले साल बीएस-6 मानक लागू होने जा रहा है, जिसकी वजह से देश की डीजल इकोनॉमी में बड़े बदलाव की शुरुआत हो जाएगी। इसके साथ ही बड़ी कार कंपनियां डीजल कारों के उत्पादन से हाथ खींच सकती है। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजूकी पहले ही डीजल कारों की बिक्री बंद करने की घोषणा कर चुकी है। वहीं कुछ दूसरी कार कंपनियां ने भी अपने कई डीजल संस्करणों को वापस लेने का मन बना लिया है, जिनके बारे में जल्द घोषणा होने की संभावना है। कम से कम एक दर्जन कांपैक्ट कारों के बंद होने की बात फिलहाल कही जा रही है और देश में डीजल की मांग में भी कमी आने के आसार है, जिसे देखते हुए तेल कंपनियां भी अपनी रणनीति बदल रही हैं। तेल कंपनियों का कहना है कि भविष्य में वे डीजल के बजाय सीएनजी की मार्केटिंग व उत्पादन पर ज्यादा ध्यान देंगी। पेट्रोलियम मंत्रालय का भी यह मानना है कि डीजल मांग की वृद्धि दर अब बहुत सुस्त होगी। मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष के दौरान डीजल की मांग 8.64 करोड़ टन रहने का अनुमान लगाया है, जो पिछले वित्त वर्ष से महज तीन फीसदी ज्यादा है। कुछ वर्ष पहले तक डीजल की मांग में सालाना छह-सात फीसदी का इजाफा होता था। अब मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार डीजल की मांग में आने वाले दिनों में बड़ी कमी आ सकती है। इसका कारण यह है कि सरकार ने लंबी दूरी के चलने वाले ट्रकों में भी सीएनजी के इस्तेमाल की योजना बनाई है।

बीएस-6 में बदलने को डेढ़ लाख का खर्चा

डीजल कारों का उत्पादन बंद करने के पीछे वजह यह बताई जा रही है कि बीएस-6 मानक वाले डीजल इंजन को बनाने की लागत काफी ज्यादा होगी। ऑटो मोबाइल उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि 1200 सीसी क्षमता के बीएस-4 वाले डीजल इंजन को बीएस-6 में तबदील करने में 1.50 लाख रुपए तक की लागत आएगी, जबकि बीएस-4 के पेट्रोल इंजन को बीएस-6 संस्करण में बदलने में सिर्फ 30-40 हजार रुपए की लागत आएगी।

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