चाय बागान पालमपुर की शान, छावनी के लिए नहीं होने देंगे कुर्बान

By: Apr 12th, 2019 12:05 am

 चचियां की हसीन वादियों में सेना की छावनी बनाए जाने का मामला करीबन एक वर्ष से लटका पड़ा है ।  हालांकि अब गृह मंत्रालय ने इसकी स्टेटस रिपोर्ट मांगी है । गृह मंत्रालय की तरफ से छावनी के निर्माण के लिए 88 हेक्टेयर जमीन मांगी गई है।  इस जमीन का लैंड यूज एक्ट  बदला जा सकता है ।  हिमाचल प्रदेश लैंड सीलिंग एक्ट 1972  के अंतर्गत चाय बागान वाली भूमि का इस्तेमाल अन्य गतिविधियों के लिए इजाजत नहीं देता है। इसी कड़ी में ‘दिव्य हिमाचल’ ने चच्चियां में सेना छावनी बनाए जाने के बारे में लोगों की नब्ज टटोली गई, तो यूं निकले उनके जज्बात    – राकेश सूद, पालमपुर

चाय बागान उखाड़ने का मतलब ही नहीं

प्रमुख कारोबारी मुकेश भाटिया कहते हैं कि चाय बागान पालमपुर की आन-बान शान है। देश-विदेश से लोग पालमपुर के चाय बागानों को देखने बड़ी संख्या में यहां आते हैं। ऐसे में चचियां में चाय के हरे-भरे बागीचों को उखाड़ कर सेना छावनी बनाने का कोई औचित्य नहीं है। सेना की छावनी का निर्माण यहां हरगिज नहीं होना चाहिए।

चाय के बागान नहीं रहेंगे तो रूठ जाएंगे पर्यटक

आशीष कुमार मानते हैं कि चाय नगरी के नाम से पालमपुर में अगर चाय के बागान ही नहीं रहेंगे, तो पर्यटक भी  रूठ जाएंगे। सरकार एक तरफ  चाय उद्योग को बढ़ावा देने की बात कर रही है। दूसरी तरफ  चाय बगानों को उखाड़ कर सेना छावनी के निर्माण के प्रयास अमल में लाए जा रहे हैं। अगर सेना की छावनी बनने को स्वीकृति मिलती है तो समझ लो कि अन्य छावनियों की भांति लोगों पर मुसीबतें बढ़ेंगी।

छावनी बनने से ग्रामीणों के बंद होंगे पुराने रास्ते

सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी आरके सूद कहते हैं कि सेना की छावनी के निर्माण के बाद जहां ग्रामीणों के पुराने रास्ते बंद हो जाएंगे, वहीं लोगों को सेना की पूछताछ व अन्य कई औपचारिकताओं की कडि़यों से होकर गुजरना पड़ेगा। अगर छावनी बनती भी है तो सेना के अधिकारियों को पहले यह सुनिश्चित करना पड़ेगा कि ग्रामीण लोगों को परेशान न होना पड़े।

चचियां में सैनिक छावनी बनाने का विरोध

कृष्ण कुमार भट्टी ने पालमपुर के चचियां में सैनिक छावनी स्थापित करने का विरोध किया है। इनका मानना है कि वर्तमान में  पालमपुर को पर्यटन की  दृष्टि से उबारने की प्रबल संभावनाएं फलीभूत हो रही है। ऐसे में पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने चाय बागानों को उजाड़ना सही कदम नहीं है। अगर चाय बागानों को धीरे-धीरे उखाड़ा जाता रहा, तो चाय नगरी के नाम से मशहूर पालमपुर की सुंदरता को ग्रहण लगेगा।

किसी अन्य जगह बनाई जानी चाहिए छावनी

राकेश जम्वाल का कहना है कि अगर प्रदेश में एक और सेना छावनी का निर्माण अवश्य है, तो यह छावनी किसी अन्य स्थान पर बनाई जानी चाहिए, क्योंकि पालमपुर के आसपास पहले ही दो सैनिक छावनी बनाई गई है। अब तीसरी छावनी बनाने सेे यहां के प्राकृतिक सौंदर्य को भी आंच आएगी। पालमपुर पहले ही ट्रैफिक समस्या से जूझ रहा है।

चाय बागीचों को तहस-नहस करना अच्छी बात नहीं

विजय सूद कहते हैं कि अगर पालमपुर में एक और नई सेना छावनी बनाने के बजाय होल्टा व अल्हिलाल कैंट के एरिया को बढ़ाकर नई यूनिट्स बसाई जा सकती हैं। खूबसरत चाय बागीचों को तहस-नहस करना अच्छा नहीं होगा। प्रकृति व सौंदर्यीं से छेड़छाड़ कर नई सैनिक छावनी के निर्माण का कोई मतलब नहीं बनता है। अंग्रेजों के समय में बसाए गए चाय बागान पालमपुर इलाके की शान है। 

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