भारत-चीन की अंगुलियों पर नाचेंगे तेल उत्पादक

ओपेक की मनमानी कीमतों से छुटकारा पाने के लिए दोनों देश बना रहे बायर्स ब्लॉक

नई दिल्ली -भारत और चीन मिलकर वैश्विक तेल बाजार के स्वरूप में एक बेहद बड़ा बदलाव लाने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं। दुनिया के दूसरे तथा तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक देश चीन तथा भारत एक बायर्स ब्लॉक की स्थापना करने के लिए एक बेहद अहम समझौते के करीब हैं। इस बायर्स ब्लॉक के जरिए न सिर्फ तेल उत्पादक देशों से मनमाफिक सौदेबाजी में मदद मिलेगी, बल्कि तेल उत्पादक देश भारत तथा चीन के इशारे पर नाचने को मजबूर होंगे। इस समझौते में तेजी लाने के लिए पिछले सप्ताह चीन के नेशनल एनर्जी एडमिनिस्ट्रेशन के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधि ने भारत का दौरा किया था। एक रिपोर्ट में कहा है कि बायर्स ब्लॉक तेल की आपूर्ति के लिए उत्पादक देशों से सौदेबाजी का काम करेगा। आने वाले समय में यह ब्लॉक तेल की कीमतों पर ओपेक की मनमानी को खत्म करने में अहम भूमिका निभा सकता है। वहीं, इस ब्लॉक में जापान और दक्षिण कोरिया को भी शामिल करने का प्रयास जारी है, जो दुनिया के चौथे तथा पांचवें सबसे बड़े तेल उत्पादक देश हैं। अगर ये दोनों देश बायर्स ब्लॉक में शामिल हो जाते हैं, तो वैश्विक तेल समीकरण बदल जाएगा और दुनियाभर के तमाम बड़े तेल उत्पादक देश भारत और चीन के इशारे पर नाचेंगे।

एशियन प्रीमियम करता है परेशान

भारत तेल आयात पर लंबे वक्त से एशियन प्रीमियम से पीडि़त रहा है। एशियाई देश अपनी तेल की जरूरतों के लिए मूलतः पश्चिम एशियाई तेल उत्पादक देशों पर निर्भर हैं। इसी निर्भरता का फायदा ये देश उठाते हैं और अन्य खरीदार को प्रीमियम के रूप में तेल की ज्यादा कीमत अदा करने को मजबूर करते हैं। इसके विपरीत, अमरीका तथा यूरोपीय संघ के देश पश्चिम एशिया के तेल उत्पादकों को कोई प्रीमियम नहीं देते हैं। अगर यह ब्लॉक अस्तित्व में आता है, तो न सिर्फ तेल उत्पादक देशों के साथ सिर्फ सौदेबाजी में मदद मिलेगी, बल्कि यह प्रीमियम खत्म भी हो सकता है।

 

 

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