मंत्री-विधायकों के पीएसओ की बहाली सिर्फ मौखिक

लिखित में जारी हुए ही नहीं बहाली के आदेश, पुलिस मुख्यालय ने सुरक्षा कर्मियों को दिए थे वापसी के आर्डर

 शिमला —मंत्री-विधायकों की सुरक्षा छीनने के बाद वापस बुलाए गए पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (पीएसओ) मौखिक आदेशों पर ड्यूटी दे रहे हैं। डीजीपी की अध्यक्षता वाली थ्रेट असेस्मेंट कमेटी ने सभी मंत्री-विधायकों की सुरक्षा वापस लेने का फैसला लिया था। इस आधार पर सुरक्षा कर्मियों को बुला लिया गया था। हैरत है कि इस ऐतिहासिक फैसले के बाद मंत्री-विधायकों के सभी पीएसओ टेलीफोन पर मिले आदेशों के तहत ही सेवाएं दे रहे हैं। हालांकि पुलिस मुख्यालय ने उन्हें वापस बुलाने के आदेश जारी किए हैं। जाहिर है कि चौतरफा बढ़े दबाव के बाद हिमाचल पुलिस ने मंत्री-विधायकों की सुरक्षा फिलहाल बहाल की है। इसके चलते अधिकारियों को दूरभाष पर ही ये आदेश दिए गए हैं कि वे फिलहाल मंत्री-विधायकों के साथ आगामी आदेशों तक बने रहें। पुलिस महानिदेशक एसआर मरडी की अध्यक्षता में आयोजित थ्रेट असेस्मेंट कमेटी ने पारित आदेशों में कहा था कि राज्य में मंत्री-विधायकों को सुरक्षा की आवश्यकता नहीं है। थ्रेट असेस्मेंट कमेटी के पारित इस फैसले के आधार पर पुलिस ने सुरक्षा कर्मी वापस बुलाए थे। खास है कि कमेटी ने अपनी सिफारिशों में कहा था कि राज्य में किसी भी मंत्री या विधायक को सिक्योरिटी थ्रेट नहीं है। इस कारण उन्हें सुरक्षा की आवश्यकता नहीं है। इन आदेशों के बाद प्रदेश में हड़कंप मच गया था। सभी विधायकों और मंत्रियों ने पुलिस विभाग के इस फैसले का एक सुर से विरोध किया था। मंत्री-विधायकों का तर्क था कि चुनावों के दौरान माहौल अधिक खराब होता है। इस दौरान कई बार स्थिति काबू से बाहर हो जाती है। लिहाजा चुनावों के बीच सुरक्षा कर्मी वापस बुलाना गलत है। पुलिस विभाग के इस फैसले के बाद सत्तापक्ष तथा विपक्ष दोनों के विधायकों ने जमकर विरोध किया। इसके अलावा मंत्रियों ने भी इस निर्णय पर आपत्ति जताई। इस दबाव के बीच पुलिस विभाग ने यह मामला फिलहाल चुनावों तक लंबित कर दिया था।

एएसआई रैंक तक के अधिकारी सुरक्षा में तैनात

पुलिस विभाग ने मंत्री-विधायकों के सभी सुरक्षा अधिकारियों को दूरभाष पर सूचित किया था कि चुनावों तक फिलहाल वे अपनी ड्यूटी पर बने रहेंगे। आगामी आदेश आने तक सभी पीएसओ मंत्री-विधायकों की सुरक्षा में तैनात रहेंगे। बता दें कि हिमाचल प्रदेश में सभी विधायकों को सुरक्षा प्रदान की गई है। इसके तहत विधायकों की सुरक्षा में कांस्टेबल तथा हैडकांस्टेबल रैंक के अधिकारी सुरक्षा अधिकारी तैनात रहते हैं। इसी तरह राज्य सरकार के मंत्रियों को दो सुरक्षा अधिकारी दिए गए हैं। एएसआई रैंक तक के अधिकारी मंत्री की सुरक्षा में तैनात किए जाने का प्रावधान है।

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