माईपुल में दस हजार ने लगाई आस्था की डुबकी

ठियोग —बैसाखी व बड़ी साजी पर्व को लेकर रविवार को ठियोग के तीर्थस्थल माईपुल में लगभग दस हजार के बीच श्रद्वालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। इस अवसर पर ठियोग के अलावा गिरीपार क्षेत्र से भी भारी संख्यां में श्रद्वालु पहुंचे हुए थे। बड़ी साजी पर्व को लेकर ठियेाग की स्थानीय देवठियों में भी त्यौहार धूमधाम के साथ मनाया गया। खासतौर से साजी पर्व को लेकर ठियोग, कलाहर, गुठाण, मानण, शड़ी, चिखड़, जनोग आदि में त्याहैार को बेहद ही धूमधाम के साथ मनाया गया और लोगों ने अपने ईष्ट का आशीर्वाद लिया। गुठाण के देवता डोमेश्वर महाराज के मंदिर में भी हजारों की संख्या में लोग पहुंचते हैं और पर विशेष पूजा अर्चना की जाती है। सब मंदिरों में विशेष रूप से भंडारे का भी आयोजन किया गया था। जबकि इसके अलावा ठियोग के कई इलाकों से लोग हरिद्वार आदि भी स्नान करने गए हुए थे। माईपुल मंदिर मंदिर कमेटी के अध्यक्ष हेतराम भारद्वाज ने जानकारी देते हुए बताया कि माईपुल सुबह करीब चार बजे मंदिर के कपाट को स्नान के लिए खोल दिए गए थे। उन्होंने बताया कि यहां पर मंदिर प्रबंधन की ओर से विशेष इंतजाम किए गए थे। उन्होंने बताया कि बैसाखी पर्व के दिन किसान अपने खेतों में अच्छी फसलों की कामना करता है जबकि इस दिन भूमि पूजा भी की जाती है। साजी को लेकर सभी के घरों में सिडडू के साथ कई अन्य व्यंजन भी बनाए जाते हैं, जबकि पशुओं को आटा और जौ भी खिलाया जाता है। साजी पर्व को लेकर स्थानीय भूतेश्वर मंदिर कमेटी माईपुल की ओर से हर साल यहां पर श्रद्वालुओं के लिए विशेष इंतजाम किए जाते हैं। मंदिर के पुजारी हेतराम भारद्वाज ने जानकारी देते हुए बताया कि इस बार भी मंदिर में गिरीगंगा घाट में करीब दस हजार हजार लोगों के स्नान किए। जबकि मंदिर में भंडारे का भी आयोजन किया गया। उन्होंने बताया कि सुबह चार बजे कपाट स्नान के लिए खोल दिए गए थे और लोगों का आना-जाना सुबह से शुरू हो चुका था। हेतराम भारद्वाज ने बताया कि अप्रिय घटना से निपटने के लिए मकर संक्राति के दिन विशेष प्रशिक्षित तैराकों को बुलाया गया था।

लोगों में आस्था का केंद्र है स्थल

मंदिर कमेटी के प्रमुख हेतराम भारद्वाज बताते हैं कि यह स्थल लोगों के विषेष रूप से आस्था का केंद्र बना हुआ है और ऐसे पवित्र त्योहारों के अलावा भी यहां पर मंदिर में विशेष भीड़ लगी रहती है। उन्होंने कहा कि पवित्र गिरी गंगा यहां से पहले यमुना में मिलती है जबकि उसके बाद यह गंगा में मिलती है। साजी के अलावा यहां पर नवरात्रों तथा अन्य त्यौहार को लेकर भी लोगों की भीड़ देखने को मिलती है।

घरों में लगाई जाती है बुरांस के फूलों की मालाएं

बैसाखी को लेकर ऊपरी शिमला में लोग अपने घरों में बुरांस के फूलों की मालाएं, जिसे यहां पर सतरेवडि़यां कहा जाता है लगाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इसे लगाने से घर के लोग बीमारियों से दूर रहते हैं और साथ ही यदि इसे लांघा जाए, तो बीमारी कट जाती है।

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