अतिक्रमण से सिकुड़ी बौद्ध नगरी 

लोडगंज-पर्यटन एवं बौद्ध नगरी मकलोडगंज को अतिक्रमण ने पूरी तरह से जकड़ लिया है। शहर की सड़कों के साथ-साथ चौक भी सिकुड़ने लगे हैं। रेहड़ी-फडि़यों व बड़े दूकानदारों ने अपनी दुकानों व होटलों से आगे सबलेट करके भी अतिक्रमण को ओर अधिक बढ़ा दिया है। इससे समस्त मकलोडगंज, धर्मकोट, भागसूनाग व अन्य क्षेत्रों में ट्रैफिक जाम की समस्या बढ़ रही है, जिससे पर्यटकों को भी परेशानियां झेलनी पड़ रही है।  मकलोडगंज बाजार के बीचों-बीच स्टाल लगाकर मोमो बेचने वालों से पर्यटन नगरी की छवी खराब हो रही हैं। मकलोडगंज में पर्यटन सीजन के चलते जहां एक तरफ बाहरी राज्यों की चहलकदमी से क्षेत्र मे भीड़ का आलम रहता हैं। वहीं, दूसरी तरफ जंक फूड बेचने वालो के जमघट से सड़क पर बाहरी एंव स्थानीय वाहनों की आवाजाही में भी दिक्कत आ रही हैं। इतना ही नहीं, बड़े-बड़े दूकानदारों ने भी अपने सामान को सड़कों तक सजा दिया है। इसके कारण सड़कों पर अतिक्रमण का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। यही नहीं सुबह से सांय तक बिकने वाले नॉनवैज से पर्यटन नगरी का पर्यावरण भी खराब हो रहा है।

आवारा कुत्तों से सहमे लोग

मकलोडगंज व इससे साथ लगते धर्मकोट, भागसूनाग, वाटरफॉल, नड्डी डल झील, सतोवरी व अन्य क्षेत्रों में आवारा कुत्तों के आतंक से स्थानीय लोगों का जीना हराम हो गया हैं।  कुत्तों के कहर से खौफजदा बाहरी पर्यटकों का सड़क पर गुजरना मुश्किल हो गया हैं। पर्यटन नगरी में प्रतिदिन सूबह होते ही आवारा कुत्ते हर गली व चौराहें पर जमघट लगाकर स्कूल जाने वाले बच्चों व बाहरी पर्यटकों को काट खाने को उतारू होते हैं।

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