अपने विषय में रखें विशेष रुचि

आईटीआई में करियर संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए हमने इंजीनियर एसके लखनपाल, प्रिंसिपल  आईटीआई शाहपुर से बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश..

इंजीनियर एसके लखनपाल, पिं्रसिपल आईटीआई शाहपुर

क्या हमें आईटीआई के बाद जॉब मिल जाएगी?

आईटीआई पास करने के बाद नीजि क्षेत्र में एनएसओएफ लेवल-4 और लेवल-5 की अपार संभावनाएं हैं वशर्ते कि प्रशिक्षण के दौरान अनुदेशों का पालन व प्रैक्टिकल कार्य में अपनी स्किल प्राप्त करने के लिए विशेष रुचि ली हो।

आईटीआई करने के बाद क्या अपना बिजनेस खोल सकते हैं?

आईटीआई का मुख्य उद्देश्य ही निजी क्षेत्र की कुशल कारीगरों की मांग को पूरा करना व अपना काम धंधा शुरू करके अन्य लोगों को भी रोजगार देना है।

क्या इस क्षेत्र में आय के साधन अधिक हैं?

सामान्यता आईटीआई पास प्रशिक्षु प्रति माह 9 से 10 हजार रुपए आईटीआई पास करने के तुरंत बाद प्राप्त कर लेता है और जैसे वह अपनी प्रतिभा में निखार लाता जाता है वैसे उसकी आय बढ़ती जाती है। वहीं दूसरी तरफ अपना काम शुरू करने वाले कुछ ही वर्षों में निर्धारित व्यवसाय की प्रतिस्पर्धा को पार करते हुए आकाश की ऊंचाइयां नापने में सक्षम हो जाते हैं।

आईटीआई करने के बाद अनुभव लेना जरूरी है या सीधे ही नौकरी मिल जाती है?

निजी क्षेत्र के अनुभवी कर्मचारियों की देख रेख में आईटीआई पास आउट का साक्षात्कार लिया जाता है और पास आउट को सामान्यता एक जैसा वेतन दिया जाता है वही कुछ निजी क्षेत्र की कंपनियां साक्षात्कार के दौरान ही वेतन का आकलन करती है। यदपि आईटीआई पास कर लेने के बाद ही सीधे तौर पर निजी क्षेत्र में नौकरी प्राप्त की जा सकती है।

यह कोर्स करने के लिए व्यक्ति में कौन से गुण होने चाहिए?

सर्वप्रथम अपने विषय के ऊपर उसकी पूरी निपुणता होनी चाहिए ताकि आने वाले समय में जबकि पूरा विश्व तकनीकी निपुणता के लिए भारत की मार्किट की तरफ नजर लगाए बैठा है उनका सपना पूर्ण करने के साथ-साथ अपना रोजगार कमाकर अपनी आर्थिकी उन्नति के साथ साताजिक उन्नति में भी  सहभागी बनने के गुण होने जरूरी हैं।

इस कोर्स को करने के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए कोई संदेश?

आज की युवा पीड़ी ने यह टेक्नोलॉजी का पूर्ण रूप से उपयोग किया है। उनके वौद्धिक विकास में नई-नई तकनीकें उनकी सहायता कर रही हैं और वे अपने कार्यक्षेत्र में दक्षता की और जा रहे हैं वही समाज को युवाओं से बहुत उपेक्षाएं हैं।

– विजय लगवाल, शाहपुर

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