अफसर-दुकानदारों का ‘बॉस’ बना सॉफ्टवेयर

मंडी – फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया का सॉफ्टवेयर फूड असिस्टेंट कमिश्नर और व्यापारियों का ऑटोमेटिक बॉस बन गया है। अब यदि अफसर किसी कारोबारी की रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस पर 60 दिन के भीतर कार्रवाई नहीं करता तो सॉफ्टवेयर ऑटोमैटिकली ही रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस जेनरेट कर देगा। यदि रजिस्ट्रेशन पर अफसर कोई आपत्ति लगाते हैं और तय समय सीमा में आवेदनकर्ता उसका जवाब नहीं देता तो उसका आवेदन भी अपने आप ही रद्द हो जाएगा। यही नहीं, कारोबारी का आवेदन रद्द होने के साथ उसकी फीस भी कैंसिल हो जाएगी। इसके बाद कारोबारी को रजिस्ट्रेशन व लाइसेंस के लिए दोबारा आवेदन करना होगा। इसके साथ ही रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस की फीस भी फिर से अदा करनी होगी। यहां बता दें कि अभी तक सभी जिला में पेंडेंसी बहुत ज्यादा थी। कई बार संबंधित कार्यालय से ही लाइसेंस मिलने में देरी होती थी तो कभी व्यापारी अफसर के ऑब्जेकशन का जवाब ही नहीं देते थे। दोनों ही सूरत में लाइसेंस जारी होने में देरी होती थी, लेकिन केंद्र सरकार ने सिस्टम में बदलाव करते हुए अफसरों और व्यापारियों दोनों की जवाबदेही तय कर दी है। अब न तो व्यापारी किसी अफसर पर यह आरोप लगा सकते हैं कि उन्हें लाइसेंस देने में देरी की जा रही है और न ही व्यापारी ऑब्जेकशन लगने पर जवाब देने से बच सकता है।

गुड गवर्नेंस पर जोर

‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ का नारा देने वाली केंद्र सरकार का यह गुड गवर्नेंस की और बड़ा कदम है। इससे अफसरों के साथ आम नागरिक की भी जिम्मेदारी तय होगी, क्योंकि फूड रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस में छोटे से लेकर बड़े तबके तक के लोग जुड़े रहते हैं। इसलिए सभी के लिए नियम एक बराबर रहेंगे।

पेंडेंसी होगी खत्म

सरकार के इस कदम से पेंडेंसी करीब-करीब पूरी तरह खत्म हो जाएगी। दो महीने के अंदर अफसरों को भी लाइसेंस जारी करने होंगे। यदि वह फाइल पर कोई कार्रवाई नहीं करते तो लाइसेंस खुद बन जाएंगे।

जुर्माने का प्रावधान

बिना रजिस्ट्रेशन किसी भी तरह का खाद्य पदार्थ बेचने पर 25000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है, जबकि लाइसेंस कारोबारियों के लिए 500000 तक का जुर्माना और छह माह तक की सजा का भी प्रावधान है।

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