अब ऊपरी शिमला पर राजनीतिक दलों की नजर

पूरे चुनाव में अब तक नहीं हुई कोई बड़ी रैली, प्रियंका को लाकर शुरूआत कर रही कांग्रेस

शिमला -चुनाव प्रचार के अब आखिरी चरण में पहुंचते-पहुंचते राजनीतिक दलों की नजर ऊपरी शिमला पर पड़ गई है। अभी तक प्रचार अभियान के दौरान शिमला जिला में किसी भी दल ने कोई बड़ी रैली नहीं की। भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने जरूर कुछ जनसभाएं ऊपरी शिमला के क्षेत्रों मंे की हैं परंतु राष्ट्रीय स्तर का कोई नेता यहां तक नहीं पहुंचा है। हैरानी की बात है कि अभी तक कांगे्रस की ओर से वीरभद्र सिंह की भी रैली यहां पर नहीं हो सकी है। अब कांग्रेस पार्टी प्रियंका गांधी को यहां लाकर अपने  पक्ष मंे माहौल बनाने की कोशिश करेगी। भाजपा यहां पर किस राष्ट्रीय नेता को लाएगी यह अभी तय नहीं है। वैसे भाजपा सोलन में प्रधानमंत्री की रैली करवाकर पूरे संसदीय क्षेत्र में मैसेज देने की सोच रही है, जो फिलहाल तय नहीं। अमित शाह भी नाहन तक ही आएंगे। शिमला में चुनाव रैली न होने का एक बड़ा कारण यह भी है कि यहां पर कोई उपयुक्त स्थल चुनाव रैली के लिए नहीं है। शिमला का रिज पहले ही धंसता जा रहा है, जिस पर बोझ नहीं डाल सकते हैं। ऐसे में राजधानी में जगह का अभाव एक कारण हो सकता है। परंतु ऊपरी शिमला में जहां ठियोग व कुछ अन्य बड़े स्थान हैं वहां पर भी रैलियां हो सकती हैं लेकिन राजनीतिक दल इसमें ज्यादा दिलचस्पी अभी तक नहीं दिखा सके हैं। अब बताया जा रहा है कि प्रियंका गांधी  की एक  बड़ी रैली कांगे्रस करवाएगी तो भाजपा को भी इस बारे में सोचना होगा। चुनाव प्रचार अभियान के आखिरी दौर में अब राजनीतिक दल यहां की ओर रूख करेंगे, यह भी तय माना जा रहा है। ऊपरी शिमला में भी लोगों के कई तरह के मुद्दे हैं, जिन पर वे राष्ट्रीय दलों की राय जानना चाहते हैं। शिमला में एनजीटी की मार झेल रहे भवन मालिकों की अपनी कहानी है। वहीं, बागबानों की सड़कों, फलों की मार्केटिंग और विदेशी सेब आयात को लेकर बड़े व अहम मुद्दे हैं, जिन पर वे चाहते हैं कि राष्ट्रीय नेता बताएं कि उनकी कितनी चिंता है। चुनाव के आखिरी चरण में राजनीतिक दल इन मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएंगे, जिसकी रणनीति अब आखिरी चरण मंे बननी शुरू हो गई है। अभी तक जिला में चुनावी शोर नहीं सुनाई दे रहा, लेकिन आने वाले कुछ दिनों मंे यहां का माहौल भी गर्माना तय है।

 

 

 

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