अस्पतालों का पानी कैसा

शिमला—अस्पतालों में पानी की सप्लाई की स्वच्छता कैसी है, इसके बारे में पानी की जांच की जाएगी। शिमला के सभी अस्पतालांे मंे पानी के सैंपल लिए जाएंगेे और इसकी जांच तय समय अवधि मंे की जाएगी। देखा जाए तो अस्पतालांे में पानी की गारंटी नहीं है। जानकारी के मुताबिक मात्र 30 से 40 फीसदी फिल्टर ही चल पा रहे हैं। इसे लेकर मरीज़ांे ने भी संबंधित अस्पताल प्रशासन को आग्रह किया है कि वह पानी की स्वच्छता को लेकर गंभीरता पूर्वक कदम उठाएं। सभी अस्पतालांे मंंे पानी की स्वच्छता पर नज़र रखने के लिए जल के सैंपल जांच के लिए लैब भेजे जाने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके तहत शिमला काम कर रहा है। प्रदेश स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किए गए निर्देशों मंे यह साफ किया गया है कि यह अस्पताल प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह पानी की शुद्धता पर पूरी नज़र रखे। इसमंे विशेषतः पानी के  सैंपल जंाच के लिए लैब भेजने के लिए कहा गया है। बताया जा रहा है जिन अस्पतालांे मंे वाटर फिल्टर लगे भी हैं वहां पर उनकी संख्या ज्यादा नहीं है। लिहाज़ा मरीज़ांे और तीमारदारांे को साफ पानी के लिए कई बार बाजा़र से भी पानी खरीदना पड़ रहा है। उधर आईजीएमसी, डीडीयू और के एनएच मंे प्रतिदिन 10 से 15 मामले जलजनित प्रभावितांे के आ रहे हैं। आंकड़ांे पर गौर करें तो राजधानी मंे अब सबसे ज्यादा बुजुर्गों को डायरिया ने जकड़ लिया है। खराब खान-पान की वजह से शिमला मंे दो दिनांे मंे अब दस बुजुर्ग डायरिया की चपेट मंे आ गए हैं। लिहाजा डाक्टरांे ने खान-पान मंे स्वच्छता बरतने और विशेषतः बच्चांे के खान-पान पर विशेष ध्यान देने के निर्देश जारी किए हैं। प्रदेश आयुर्वेद विभाग ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य विभाग ने भी यह साफ किया है कि अब गर्मियांे ने दस्तक दी है, इसके लिए जनता को भी अपने खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इस पर स्वास्थ्य विभाग ने यह भी गाइडलाइन जारी की है कि जनता पानी को उबाल कर पिएं।

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