आइए-आइए, क्या हाल हैं आपके

पोलिंग बूथ पर मतदाताओं का यूं स्वागत करते थे अटल बिहारी वाजपेयी, लोगों ने साझा कीं यादें

लखनऊ –यह पहला लोकसभा चुनाव है जब बीजेपी अपने ‘पितामह’ अटल बिहारी वाजपेयी के बिना चुनाव मैदान में है। साल 2004 तक का वह दौर, जब वह प्रधानमंत्री और लखनऊ के सांसद हुआ करते थे, लोगों के दिलों में आज भी ताजा है। लखनऊ के हजरतगंज स्थित बिशन नारायण इंटर कालेज पोलिंग बूथ पर वह मतदान करने आया करते थे। उनके साथ मतदान करने वाले कई वोटर्स आज भी उन्हें याद कर उनकी तारीफ करते नहीं थकते। उनके साथ वोट डाल चुके 76 वर्षीय एक वोटर अब्दुल अलीम खान ने बताया कि वह दोनों हाथ जोड़े मेन गेट पर खड़े थे, जो आता, उसका मुस्कुराकर अभिवादन करते। उनक पास सुरक्षा घेरा भी नहीं होता था, लोग आसानी से बूथ के अंदर आ-जा सकते थे। वह जब अपनी कविता पढ़ते तो बरबस ही लोग उकी तरफ खिंचे चले आते थे। अब्दुल ने बताया कि जब वह सबसे मिल लेते तो साधारण वोटर की तरह आकर लाइन में लग जाते और अपनी बारी का इंतजार करते। उन्होंने बताया कि वह वोट डालकर बाहर आते। स्याही लगी अपनी अंगुली दिखाते, मीडिया से बात करते और चले जाते। एक अन्य वोटर राकेश पांडेय का घर पोलिंग बूथ से कुछ ही दूरी पर स्थित है। उन्होंने बताया कि एक दफा प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जब वोट डालने आए, तो उन्हें देखकर मैं किनारे हट गया, लेकिन उन्होंने रोक लिया और फिर से लाइन में लगा दिया। उन्होंने बताया कि दोनों हाथ जोड़कर वाजपेयी जी ने कहा, आइए-आइए क्या हाल हैं आपके? राकेश की तरह कई बुजुर्ग वोटर्स हैं जो अटल को उनके सामान्य व्यक्तित्व और एक अलग पहचान के लिए जानते हैं।

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