आईजीएमसी…आग से कैसे बचाओगे

शिमला —प्रदेश के सबसे पुराने मेडिकल कालेज मंे अग्निशामक यंत्र छह फुट दूर टांग दिए गए हैं। यदि कोई हादसा होता है तो आग बुझाने के लिए इस्तेमाल होने वाले इन यंत्रांे को बाहर निकालने के लिए पहले सीढ़ी का प्रबंध करना होगा। फिर इन्हंे दीवार से निकालना होगा। अब जब आग लगी होगी तो उस समय यंत्र को निकालने के लिए सीढ़ी या फिर किसी कुर्सी का सहारा लेना होगा। आईजीएमसी ने भी इस मामले को लेकर गंभीरता जाहिर की है। इस मामले को लेकर अग्निशमन विभाग को भी पत्र लिखा जा रहा है, जिसमंे अस्पताल की व्यवस्था बताई गई है, जहां पर यंत्रांे को सही तरह से नहीं रखने की शिकायत की जा रही है। गौर हो कि नियम के तहत इन यंत्रांे को दीवार या फिर अन्य उस जगह मंे लगाया जाता है, जहां पर आम जनमानस का पहुंचना आसान हो। जानकारी मिली है कि आईजीएमसी प्रशासनिक अधिकारी आईजीएमसी पिं्रसीपल के समक्ष भी यह मामला उठा चुके हैं। गौर हो कि आपदा प्रबंधन को लेकर यह मामला काफी गंभीर भी बना हुआ है क्यांेकि विभिन्न आपदाआंे को लेकर कई मॉकड्रिल शिमला मंे हो भी चुकी हैं, लेकिन प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल का दर्जा लिए बैठे आईजीएमसी मंे इस तरह दूर टांगें गए उपकरण मरीज़ांे की जान पर भी आफत खड़ी कर सकते हैं। ऐसे मंे आईजीएमसी की तस्वीर भी कुछ ऐसी ही देखने को मिली है। फिलहाल आईजीएमसी का आधारभूत ढांचा ऐसा है कि यह काफी पुराना कालेज है जिसके कारण इसे बनाने मंे लकड़ी का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि यहां पर पहले भी शॉर्ट सर्किट से कैजुअल्टी के पास आग लगने की घटना घट चुकी है, लेकिन और ऐसा हादसा न घटित हो, इसके लिए आईजीमएसी मंे तैयारी अधूरी दिख रही है।

अस्पताल में लगे हैं 50 से अधिक यंत्र

आईजीएमसी की तस्वीर देखंे तो 50 से अधिक यंत्र अस्पताल मंे लगे हैं। ये आईजीएमसी की नई और पुरानी इमारत मंे लगाए गए हैं। कई बार तो ये शिकायतंे भी आती रही हैं कि सिलंेडर एक्सपायर्ड भी हो जाते हैं। हालांकि आईजीएमसी प्रशासन का कहना है कि समय पर यह चैकिंग की जाती रही है कि सिलंेडर की एक्सपायर्ड डेट कहीं निकल तो नहीं गई है, लेकिन यह तस्वीर सबसे ज्यादा परेशानी वाली है कि  अस्पताल मंे ये जो सिलंेडर लगे हैं वे बहुत ही दूर लगाए गए हैं।

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