आईजीएमसी ने बचाए दस लाख

कोर्ट एविडेंस पर वीडियो कान्फ्रेंसिंगसे पेश की मिसाल

शिमला  – कोर्ट एविडेंस पर चिकित्सकों की अस्पताल में ही वीडियो कान्फ्रेंसिंग करके आईजीएमसी ने प्रदेश सरकार के लगभग दस लाख रुपए बचाए है। यह वह राशि है, जो डाक्टरों को कोर्ट एविडेंस पर जाने के लिए प्रशासन द्वारा टीए, डीए के तौर पर डाक्टरों को देनी पड़ती है। हाई कोर्ट ने यह आदेश पिछले वर्ष दिए थे। आदेशों का पालन करके  अस्पताल ने एक मिसाल कायम की है। रिकार्ड के मुताबिक बीते वर्ष आईजीएमसी ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से लगभग 500 से ज्यादा डाक्टरों के कोर्ट एविडेंस के काम को एक सुचारू रूप से अस्पताल में ही निपटाया है। इस प्रक्रिया के माध्यम से आईजीएमसी में डाक्टर भी अवकाश पर जाने से बचे हैं। इससे मरीजों के इलाज में भी बाधा नहीं आई है। आईजीएमसी प्रशासन के मुताबिक पिछले वर्ष न्यायालय द्वारा यह निर्देश जारी किए गए थे कि कोर्ट एविडेंस में डाक्टर को वीडियो कान्फ्रेंसिंग का इस्तेमाल किया जाए, ताकि मरीजों को भी इलाज मिलने में भी उनका समय बच जाए और डाक्टर भी अकसर अवकाश पर न रहें। एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के सबसे पुराने मेडिकल कालेज का दर्जा लिए बैठे आईजीएमसी ने इसमें सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है। आईजीएमसी प्रशासन का मानना है कि अस्पताल प्रबंधन भविष्य में भी कोर्ट के निर्देशों का पालन करता रहेगा। आईजीएमसी के डिप्टी एमएस डा. राहुल गुप्ता का कहना है कि आईजीएमसी की इस पहल से अन्य अस्पतालों क ो भी एक अच्छा संदेश जा सकता है। वहीं, आईजीएमसी प्रिंसीपल डा. रवि शर्मा का कहना है कि आईजीएमसी में कोर्ट एविडेंस में वीडियो कान्फें्रसिंग का ग्राफ काफी बेहतर रहा है।

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