आपदा से निपटने के लिए बनेगा विशेष दल

राज्य कार्यकारी समिति की बैठक के दौरान मुख्य सचिव अग्रवाल ने किया खुलासा

शिमला – राज्य कार्यकारी समिति (एसईसी) की 9वीं बैठक बुधवार को मुख्य सचिव बीके अग्रवाल की अध्यक्षता में   आयोजित हुई। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार आपदाओं के समय त्वरित और कुशल प्रतिक्रिया के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल की तर्ज पर राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल की स्थापना करेगी। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक आपदा की दृष्टि से देश के सबसे अधिक संवेदनशील राज्यों में से एक है। मौसम संबंधी प्राकृतिक आपदाओं में  संबंधित खतरों, ओलावृष्टि, सूखा और बादल फटने के अलावा राज्य में विभिन्न खतरों जैसे भू-गर्भीय खतरे, भूकंप, भूस्खलन और हिमस्खलन के खतरों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि आपदा और आपात स्थिति से निपटने के लिए पुलिस की कंपनियों से युक्त राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) का गठन करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मंडी, अर्की और मुबारकपुर में एसडीआरएफ की स्थापना की जाएगी और आपदा के समय प्रभावी प्रतिक्रिया के लिए प्रत्येक में 100 जवानों की तीन कंपनियां होंगी।  आपदाओं में कमी लाने के लिए राज्य आपदा न्यूनीकरण कोष के गठन को भी स्वीकृति प्रदान की। उन्होंने कहा कि एसडीआरएफ प्रदेश सरकार राजस्व विभाग व आपदा प्रबंधन के पर्यवेक्षण के तहत गठित होगा। उन्होंने स्थानीय स्तर पर स्वयं सेवकों को आपदा की स्थिति में सहायता करने के लिए तैयार करने पर बल दिया। विभिन्न प्रकार की आपदाओं के बारे में जागरूकता के लिए जिला स्तर पर प्रशिक्षण और मॉकड्रिल का आयोजन किया जाएगा ताकि राज्य के प्रत्येक नागरिक को आपदा के समय किसी भी घटना से निपटने के लिए बेहतर रूप से तैयार किया जा सके। उन्होंने कहा कि आपदा की स्थिति में स्थानीय लोग ही प्रथम सहायक होते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की कार्यकारी समिति के पास राष्ट्रीय योजना और राज्य योजना को लागू करने की जिम्मेदारी होगी और राज्य में आपदा प्रबंधन के लिए समन्वय और निगरानी निकाय के रूप में कार्य करेगी। साथ ही वह किसी भी विभाग को किसी भी प्रकार की आपदा की स्थिति के दौरान कार्रवाई हेतु निर्देश देने के लिए जिम्मेदार होंगे।  अतिरिक्त मुख्य सचिव लोक निर्माण विभाग मनीषा नंदा ने कहा कि विद्यालय स्तर पर जागरूकता पैदा करने के लिए ’स्कूल सुरक्षा कार्यक्रम’ शुरू किया गया है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में कांगड़ा और कुल्लू जिलों में 200 स्कूलों में यह परियोजना लागू की गई है।  निदेशक एवं विशेष सचिव (आपदा प्रबंधन सैल) डीसी राणा ने कहा कि विभिन्न तकनीकी संस्थानों/विश्वविद्यालयों में आपदा प्रबंधन से संबंधित योग्यता प्राप्त करने वाले छात्रों को आपदा प्रबंधन सैल द्वारा 5000 रुपए की छात्रवृत्ति दी जाएगी।

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