आयुष का बजट मिलता रहेगा

शिमला —अब आयुष का बजट हिमाचल से नहीं फिसलेगा। यंू भी कहा जा सकता है कि अब आयुष के  तहत प्रदेश को जारी बजट मंे दिक्कत नहीं झेलनी पड़ेगी। 14 वर्षो के पुराने खातांे की सेटलमंेट आयुर्वेद विभाग इस वर्ष पूरी करने वाला है। जिसमंे विभाग द्वारा भारत सरकार को फाइनल युटिलाइज़ेशन सर्टिफिकेट सौंप दिया जाएगा और उसके बाद एक सही तरीके से हिमाचल आयुर्वेद विभाग को बजट मिलता रहेगा। गौर हो कि वर्ष 2004 से लेकर अभी तक आयुर्वेद विभाग के एकाउंटस मंे ये सामने आया है कि जो राशि सरकार के द्वारा बजट के तौर पर जारी की गई है वह जिलांे मंे अलग-अलग हैडस मंे खर्च कर दी गई। यानि की जिस राशि का जिस वस्तु के लिए खर्च करने के लिए जारी किया गया था उसे दूसरे काम पर ही खर्च कर दिया गया। जिसका नतीज़ा ये हुआ कि भारत सरकार को हिमाचल ने वर्ष 2004 से युटिलाईजे़शन सर्टिफिकेट ही नहीं दिया। लिहाजा़ भारत सरकार ने यूसी नहीं मिलने के  कारण इस वर्ष ग्रांट को रोक दिया गया था। गौर हो कि दिव्य हिमाचल द्वारा ये मामला प्रकाश मंे लाया गया है। देखा जाए तो लगभग 14 वर्षो से आयुर्वेद विभाग मंे सही तरह से खातांे को सेटल किया ही नहीं किया गया। जिसके कारण भारत सरकार द्वारा ग्रांट को रोक दिया गया था। अब जाकर नए निदेशक की आगामी कार्रवाई के बाद एकाउंट सेटल की एक प्रारंभिक रिपोर्ट भारत सरकार को दी गई थी जिसके बाद आगामी कार्रवाई करते हुए भारत सरकार ने भी गंभीरता जाहिर की थी, जिसमंे आयुर्वेद विभाग के लिए आयुष मंत्रालय द्वारा 19.58 करोड़ बजट के लिए मंजूरी प्रदान कर दी गई थी। जानकारी के मुताबिक प्रदेश सरकार ने वर्ष 2018-19 के लिए 7.58 करोड़ रुपये की वार्षिक कार्य योजना का प्रस्ताव आयुष मंत्रालय को भेजा था। आयुष मंत्रालय ने राज्य द्वारा प्रस्तुत उपयोगिता प्रमाण पत्र तथा व्यय विवरण के आधार पर राज्य के लिये यह राशि प्रदान की थी। अब खातांे के सेटलमंेट पर आयुर्वेद विभाग की नज़र टिकी है।

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