आस्था…सूनी गोद भरती है मां सुन्यारी

खैरा—देवभूमि हिमाचल में अनेक शक्ति पीठ एवं प्राचीन मंदिर विद्यमान है, जिन पर लोगों की अटूट आस्था है। ऐसी ही आस्था के प्रतीक खैरा के सुप्रसिद्ध सती मां सुन्यारी मंदिर में संतान प्राप्ति का आशीर्वाद लेने के लिए असंख्य लोग साल भर मां के दरबार पहुंचते हैं और मां की कृपा से संतान प्राप्ति का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं । ऐसी मान्यता है कि ज्येष्ठ माह में यहां माथा टेकने से निःसंतान दंपत्तियों को संतान सुख का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उनकी हर मनोकामना पूर्ण होती है। जनश्रुति के अनुसार माता सुन्यारी सन् 1772 में इस स्थान पर अपने पति सुनयार के साथ चिता में जलकर सती हुई थी। सन् 1772 में जब उनके पति का देहांत हुआ था और उनके पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए इस स्थान पर लाया गया था, तब उस समय की प्रथा के अनुसार जब वह अपने पति को गोद में लेकर सती होने के लिए चिता पर बैठी, तो चिता को अग्नि देने वाला कोई नहीं था। माता   सुन्यारी ने पास से गुजर रहे मियां जयमल सिंह कटोच, जो स्वयं भी निःसंतान थे, उनसे आग्रह करने पर उन्होंने मुखाग्नि देना स्वीकार कर लिया और चिता को आग दी,  तब माता सुनयारी ने उन्हें दो पुत्र और एक पुत्री पैदा होने का वरदान दिया और आग्रह किया कि वह इसी दिन ज्येष्ठ माह के नौ प्रविष्टे को अगले वर्ष से इस स्थान पर छिंज, कुश्ती मेले का आयोजन करवा दिया करें,  तब से लेकर यह सिलसिला आज भी जारी है और मियां जयमल सिंह को वरदान के अनुसार दो पुत्र और एक पुत्री भी पैदा हुए।  मेले में खूब चलता है प्रतियोगिताओं का दौर।   हर वर्ष ज्येष्ठ माह के नौ से 13 प्रविष्टे तक मां सुन्यारी मेले का आयोजन बड़ी श्रद्धा एवं हर्षोल्लास के साथ किया जाता है। इस वर्ष भी परंपरा के अनुसार 22 से 27 मई तक मेले का आयोजन किया जा रहा है । मेले में लोग मां सुन्यारी का आशीर्वाद प्राप्त करने के साथ साथ दंगल एवं वालीबाल प्रतियोगिताओं का आनंद उठाते हैं और जमकर खरीदारी भी करते हैं।             

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