इंडस्ट्रियल पालिसी वित्त विभाग से मंजूर

शिमला -हिमाचल की नई बनी इंडस्ट्रियल पालिसी को वित्त विभाग की हरी झंडी मिल गई है। पालिसी के लिए यह सबसे बड़ी बाधा दूर हो गई है, जिसके बाद अधिकारियों ने भी सांस में सांस ली है। अब सिर्फ कैबिनेट की बैठक का इंतजार है, जिसके मुहर लगाने के साथ ही नई पालिसी लागू कर दी जाएगी। वित्त विभाग ने पालिसी को लेकर कुछ सुझाव दिए हैं। मामूली सुझावों को इसमें शामिल कर कैबिनेट के लिए प्रस्ताव बनाया जा रहा है। वित्त विभाग ने पालिसी प्रारूप पर यह सोचते हुए मंजूरी दी है कि हिमाचल में अधिक से अधिक निवेश आए। जब निवेश आएगा तभी सरकार इन्सेंटिव भी दे सकेगी, बिना निवेश के इन्सेंटिव नहीं दी जाएगी। सूत्रों के अनुसार 28 से 29 मई को कैबिनेट की बैठक हो सकती है और उस बैठक में नई इंडस्ट्रियल पालिसी पर चर्चा होगी। क्योंकि सरकार ने अगले महीने विदेशों में रोड शो के लिए जाना है, इसलिए इससे पहले यहां पर नई पॉलिसी लागू करना बेहद जरूरी है। बहरहाल, नई पालिसी से हिमाचल में निवेश आएगा या नहीं इसपर बाद में ही बात होगी।

नई नीति की विशेषताएं

हिमाचल सरकार ने औद्योगिक क्षेत्रों को यहां तीन श्रेणियों में बांटा है। जिस-जिस क्षेत्र में उद्योग धंधे लगाने को प्रस्ताव होंगे वहां पर अलग-अलग रियायतें होंगी। दूरवर्ती क्षेत्रों के लिए विशेष राहतें प्रदान की जाएंगी। एमएसएमई, लार्ज व एंकर यूनिट जैसी तीन यूनिट्स बनाई गई हैं।  सरकार यहां लगने वाले उद्योगों को जमीन की खरीद पर स्टांप ड्यूटी पर छूट देगी  सरकारी जमीन की खरीद पर उद्योगपतियों को यहां लैंड रिबेट मिलेगा  जमीन लेने के लिए वह सरकार को आसान किस्तों में पैसे दे सकते हैं  उद्योगपति द्वारा बैंकों से लिए जाने वाले लोन पर लगने वाले ब्याज में कुछ फीसदी पैसा सरकार देगी  उद्योगपतियों को केंद्र द्वारा बंद कर दी गई ट्रांसपोर्ट सबसिडी प्रदेश सरकार अपने खाते से देगी  जीएसटी में उद्योगपतियों को रिंबर्समेंट का लाभ प्रदेश सरकार देगी

17 हजार करोड़ रुपए के एमओयू हो चुकें हैं साइन

17 हजार करोड़ रुपए के एमओयू यहां पर हस्ताक्षरित हो चुके हैं, जिनको धरातल पर लाने की तैयारी है। इसके अलावा सरकार नीदरलैंड्स, जर्मनी, यूएई जैसे देशों में अगले महीने जाने वाली है, जहां से निवेश लाया जाएगा।

धर्मशाला में 26 को आयोजन

धर्मशाला में 26, 27 सितंबर को इन्वेस्टर मीट का आयोजन होगा, जहां पर सरकार की पूरी मेहनत का पता चलेगा। यहां पर आने वाले निवेशक कितना निवेश लाते हैं, इसकी तस्वीर साफ हो जाएगी। इसके बाद सरकार आगे की रणनीति बनाएगी।

You might also like