इंद्रुनाग से नहीं जुड़ पाया भागसूनाग

धर्मशाला—पर्यटन राज्य कहे जाने वाले हिमाचल प्रदेश में पर्यटन उद्योग की संभावनाओं को बुनाने की बजाय उन्हें उजाड़ने का खेल चल रहा है। सरकार, प्रशासन व लोक निर्माण विभाग की बड़ी लापरवाही के कारण पर्यटक स्थल उजड़ कर समाप्त होने की कगार पर पहुंच रहे हैं। जबकि नए पर्यटन स्थलों को उभरने का मौका भी नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में सरकार व प्रशासन के पर्यटन विकास के सभी दावे जमीनी स्तर पर हवा-हवाई ही साबित हो रहे हैं। पर्यटन एवं बौद्ध नगरी मकलोडगंज के भागसूनाग को एक दशक बाद भी इंद्रुनाग-चोहला व खनियारा से नहीं जोड़ा जा सका है। फोरेस्ट क्लीयरेंस के फेर में लटकी सड़क के कारण पर्यटन कारोबार पूरी तरह से धड़ाम हो रहा है। सड़क के लिंक होने से नए पर्यटन स्थलों के साथ पर्यटक जुड़ सकते थे। इसके साथ ही ट्रैफिक जाम की समस्या से भी मकलोडगंज-भागसूनाग सहित अन्य क्षेत्रों को बड़ी राहत मिलनी थी। वहीं लोगों के सड़क सुविधा से वंचित होने से विकास की रफ्तार भी पूरी तरह से थम गई है। जिला मुख्यालय धर्मशाला की पर्यटन एवं बौद्ध नगरी मकलोडगंज व भागसूनाग में ट्रैफिक बोझ कम करने को लगभग एक दशक पहले योजना बनाई थी। जिसके तहत इंदु्रनाग-बनगोटू-गमरोटु टिल्ला माता मंदिर से त्रियूंड रोड भागसूनाग तक साढ़े छह किलोमीटर सड़क मार्ग को जोड़ने का प्लान था। लेकिन एक दशक बाद भी सड़क को जोड़ने का कार्य पूरा नहीं हो पाया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार सड़क मार्ग का चार किलोमीटर से अधिक का कार्य कर भी लिया गया है। अब मात्र दो से अढ़ाई किलोमीटर सड़क का कार्य ही अधूरा बचा हुआ है। जिसमें फोरेस्ट क्लीयरेंस का पेंच अभी भी अडंगा बना हुआ है। पर्यटन राज्य में भागसूनाग के इंद्रुनाग-चोहला से जुड़ने से बनगोटू, पैराग्लाइडिंग साइट इंद्रुनाग, जिप लाइन, खनियारा के ऐतिहासिक अंघजर महादेव मंदिर, प्राचीन इंद्रुनाग, थातरी, खड़ौता, ट्यूलियप गार्डन टंग-नरवाणा से होते हुए श्रीचांमुडा मंदिर तक के पर्यटन स्थलों को जोड़ा जा सकता है। इसके तहत ही पर्यटकों के वाहनों को धर्मशाला-कोतवाली बाजार से प्रवेश देकर इंद्रुनाग के रास्ते से अन्य पर्यटक स्थलों तक भी पहुंचाया जा सकता है।

पर्यटन सीजन में काला पानी बना मकलोडगंज

पर्यटन सीजन के दौरान मकलोडगंज देश-विदेश से पहुंचने वाले पर्यटकों के लिए काले पानी की सजा बना हुआ है। अब मकलोडगंज के बस स्टैंड के बंद होने से वाहनों के पहिए पूरी तरह से थम गए हैं। वाहनों को पार्किंग के साथ ही आवाजाही भी मुश्किल बन गई है। लेकिन बावजूद इसके वैकल्पिक मार्ग आधी-अधूरी राह में ही अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं।

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