उड़द के गारे से बनाया जा रहा है विजिट देवता मंदिर

संगड़ाह—उपमंडल संगड़ाह के अंतर्गत आने वाले गांव लगनू में निर्माणाधीन विजिट देवता के मंदिर में सदियों पुरानी उड़द के गारे की इस्तेमाल किया जा रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक करीब दो शताब्दी पुराने इस मंदिर को देवता की अनुमति अथवा आदेश के अनुसार उसी शैली में बनाया जा रहा है जैसा यह पहले बना था। आकार में विजट महाराज का यह मंदिर क्षेत्र के अन्य प्रमुख मंदिरों से छोटा जरूर है, मगर इसके निर्माण की पद्धति अथवा तकनीक चर्चाओं में है। बुजुर्गों के अनुसार कई दशक पहले जब सीमेंट का ईजाद हुआ था तो मंदिर, महलों व घरों को माश के गारे अथवा से ही तैयार किया जाता था। इस मंदिर में पत्थर के साथ चिनाई में सीमेंट की जगह उड़द पाउडर के गारे का इस्तेमाल किया जा रहा है। देवता के गूर सुनील शर्मा, पारंपरिक मिस्त्री जयपाल व सोम प्रकाश तथा मंदिर निर्माण समिति के सदस्य लेखराम, विनोद, तेजराम व कृपा राम आदि ने बताया कि मंदिर के लिए दस क्विंटल उड़द की व्यवस्था की गई है। अब तक इस मंदिर में करीब दो क्विंटल उड़द पाउडर का इस्तेमाल हो चुका है। मंदिर में केवल पत्थर व लकड़ी जैसी पारंपरिक सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक पत्थर व लकड़ी से ज्यादा खर्चा उड़द अथवा माह दाल पर आ रहा है।

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