उल्टा पड़ गया पंडित का अंतिम चाणक्य गणित

पोते को सांसद बनाने की अंतिम इच्छा बड़ी हार में बदली, मंत्री पद भी गया

मंडी —राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले पंडित सुखराम ने कभी नहीं सोचा होगा कि उनका अंतिम गणित इस कद्र उल्टा पडे़गा। अपने पोते आश्रय शर्मा को सांसद बनाने की अंतिम इच्छा पालने वाले पंडित सुखराम की यह इच्छा न सिर्फ अधूरी रह गई, बल्कि जनता ने करारी हार का स्वाद भी चखा दिया। पंडित सुखराम ने इस सीट से जीत का रिकार्ड बनाया था और उनके पोते ने 23 साल बाद अब चार लाख से ज्यादा मतों से हार का रिकार्ड बनाया है। आश्रय शर्मा की बड़ी हार के बाद पंडित सुखराम परिवार के आगे राजनीतिक सफर व समीकरणों पर संकट के बादल उमड़ आए हैं। पहले ही चुनाव में आश्रय शर्मा की अब तक की सबसे बड़ी हार ने कांग्रेस के अंदर भी भूचाल ला दिया है। कांग्रेस में शामिल होकर अपने पोते आश्रय शर्मा को संसदीय चुनाव लड़ाने का पंडित सुखराम का दांव पूरी तरह से उल्टा पड़ा है। मंडी संसदीय क्षेत्र में आज तक हुए सभी चुनावोंं जहां अब तक की सबसे बड़ी जीत हुई है, वहीं सबसे बड़ी हार का रिकार्ड भी बना है। भाजपा के रामस्वरूप शर्मा ने इस सीट से लगभग चार लाख से अधिक मतों से जीत दर्ज की है।

न वीरभद्र की झप्पी काम आई, न आंसू

मंडी— अपनी जिंदगी का पहला व सबसे बड़ा चुनाव लड़ रहे कांग्रेस प्रत्याशी आश्रय शर्मा के लिए न तो दादा सुखराम व पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की झप्पी काम आई और न ही आंसू जनता का दिल पिघला पाए। कांग्रेस में शामिल होने के बाद पंडित सुखराम ने वीरभद्र सिंह से दिल्ली में मिल कर झप्पी डाली थी और सारे गिले-शिकवे भूल कर वीरभद्र सिंह भी आश्रय के लिए चुनाव प्रचार में उतरे। उन्होंने मंडी संसदीय क्षेत्र में कई बड़ी जनसभाएं आश्रय शर्मा के लिए की थीं। पोते को मंडी सीट से टिकट दिलाने के बाद चुनाव प्रचार के दौरान कई बार पंडित सुखराम की आंखों से आंसू भी निकले। नामाकंन रैली के दिन तो पंडित सुखराम सेरी मंच पर ही रो पडे़ थे और उन्होंने जनता से माफी भी मांगी, पर कोई फायदा नहीं हुआ।

 

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