ऊना में खुली सड़कों पर मौत का सफर

ऊना—ऊना जिला लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों से दहल उठा है। जहां हिमाचल प्रदेश में पहाड़ी व सर्पीली सड़के मौत का कारण बन रही है। वहीं, ऊना में इसके विपरीत प्लेन सड़के तेज गति के कारण अनमोल जिंदगियां लील रही है। इस वर्ष पांच महीनों में हुए दर्दनाक सड़क हादसों ने 54 लोगों की अनमोल जानें छीन ली हैं। जबकि 115 सड़क हादसों में 193 लोग जख्मी हुए हैं। 2019 वर्ष के पहला महीने में ही 23 सड़क हादसे हुए जिनमें 11 लोगों की मौत हो गई थी और 27 लोग घायल हुए थे। फरवरी माह में 14 सड़क दुर्घटनाएं हुई, जिनमें आठ लोगों की मौत हुई थी और 14 लोग घायल हुए थे। हादसों के लगातार बढ़ते ग्राफ के चलते 26 सड़क हादसे हुए जिनमें 11 लोगों की मौत हो गई और 59 लोग घायल हुए थे। इसी तरह अप्रैल माह में सड़क हादसों में हुई मौतों का आंकड़ा दिल दहला देने वाला रहा। अकेले अप्रैल महीने में ही 33 सड़क दुर्घटनाएं हुई, जिनमें 16 लोगों की मौत हुई और 67 लोग घायल हुए। 30 मई तक 19 सड़क हादसों में आठ लोगों की मौत हुई है और 26 लोग घायल हुए हैं। जबकि वर्ष 2018 में ऊना जिला में करीब 300 सड़क हादसे हुए थे, जिनमें 134 लोगों की मौत हुई थी। हालांकि पुलिस सड़क हादसों को रोकने के प्रयास तो कर रही है, लेकिन ये सभी प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। पुलिस प्रशासन पर वाहन चालकों की मनमानी भारी पड़ रही है। पुलिस विभाग चालान काटकर वाहन चालकों को सबक तो सिखाने का प्रयास कर रही है, लेकिन वाहन चालक इसकी परवाह किए बगैर यातायात नियमों की उल्लघंना करते हैं। विभाग ने हर थाना क्षेत्र में रोड सेफ्टी क्लब तो बनाए हुए हैं, लेकिन इन क्लबों की कार्रवाई केवल बैठकों व फोटो शूट तक ही सीमित रही है। किसी स्कूल, कालेज या अन्य शिक्षण संस्थानों में सड़क हादसों के प्रति जागरूकता शिविर बहुत ही कम देखने को मिलते हैं। जिला में स्पीड लिमिट साईन बोर्डों की संख्या भी इक्का-दुक्का ही है। अगर अकेले ऊना शहर की ही बात करें तो कहीं भी स्पीड लिमिट का साइन बोर्ड दिखाई नही पड़ते है। हालांकि पुलिस ने हाल ही में दो नई स्पीड गन ली हैं, लेकिन स्पीड लिमिट के साइनबोर्ड अभी तक नहीं लग पाए हैं। अब बात अगर वाहन चालकों की करें तो वे भी यातायात नियमों की उल्लघंना करने में कोई कसर नही छोड़ते हैं। ओवरस्पीड व रैश ड्राइविंग तो मानो युवकों की होबी ही बन गया हो। वहीं, पंजाब के चालक मालवाहक वाहनों में लोगों को डबल डैकर लगाकर प्रदेश की टेढ़ी-मेढ़ी सड़कों पर तेज रफ्तारी से वाहन दौड़ाते हैं, जिन पर लगाम नही लग पाई है। ऐसे लापरवाह चालक अपने साथ-साथ दूसरों की जान को भी खतरे में डालते हैं।

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