एनओसी से पहले उद्योग की इजाज़त

शिमला —हिमाचल प्रदेश में नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) से पहले ही उद्योग स्थापित करने की इजाजत मिल जाएगी। यहां निवेश के लिए यह बड़ा प्रावधान सरकार करने जा रही है। सूत्रों के अनुसार इस प्रावधान को लेकर योजना बन चुकी है, जिसे जल्दी ही प्रदेश में लागू कर दिया जाएगा। अब तक ऐसी कोई व्यवस्था यहां नहीं है। देश में तेलंगाना और राजस्थान दो ऐसे राज्य हैं, जहां उद्योगपति की सेल्फ सर्टिफिकेशन के आधार पर उसे उद्योग लगाने की इजाजत दे दी जाती है। वहां उद्योगपति पहले अपना उद्योग लगाते हैं, जिसके बाद सरकार की दूसरी औपचारिकताएं पूरी कर देते हैं। ऐसे में उन्हें शुरुआत में किसी भी तरह की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ता। ऐसी ही व्यवस्था हिमाचल प्रदेश में भी की जाएगी, ताकि यहां उद्योगपतियों को दिक्कत न हो और वह आते ही यहां उद्योगधंधा स्थापित कर सकें। इस तरह की व्यवस्था एमएसएमई सेक्टर के लिए होगी। मध्यम एवं लघु उद्योगों को इससे बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि ये छोटे उद्योग भी उन्हीं औपचारिकताओं में फंसे रहते हैं, जिनमें दूसरे बड़े उद्योग। छोटी लागत के उद्योगपतियों को यहां सरकार राहत देकर बढ़ावा देगी। तेलंगाना व राजस्थान के मॉडल को इसके लिए स्टडी किया गया है, जिसके बाद यहां अफसरशाही ने भी यह तय किया है कि इस सेक्टर के उद्योगपति सेल्फ डेक्लेरेशन दे सकते हैं। इसमें वे बताएंगे कि उद्योग लगने के इतने समय के बाद सभी औपचारिकताएं पूरी कर देंगे। इन उद्योगपतियों की यह काफी बड़ी समस्या रहती है, क्योंकि हिमाचल में निवेश से पहले कई तरह की कागजी कार्रवाई पूरी करनी पड़ती है। इसमें निवेशकों को अच्छा खासा समय लग जाता है, जिसके सालों बाद यहां उद्योगधंधा स्थापित हो पाता है।

उद्योगपतियों को फायदा

प्रदेश में बड़े निवेश के लिए चल रहे प्रयासों के तहत नई इंडस्ट्रियल पालिसी बनाई गई है, जिस पर केवल कैबिनेट से मंजूरी मिलनी शेष है। इसमें ऐसे कई तरह के प्रावधान हैं, जिससे प्रदेश में बड़ा निवेश आ सकता है। दूसरे राज्यों ने जिस तरह रियायतें दी हैं, उनसे अधिक हिमाचल सरकार देने को तैयार है। मध्यम व लघु उद्योगपतियों को सेल्फ डेक्लेरेशन की छूट यहां बेहद फायदेमंद साबित होगी, यह माना जा सकता है।

कैबिनेट में जाएगी आईटी पॉलिसी

शिमला। सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा तैयार की गई आईटी पॉलिसी को कैबिनेट में लाया जाएगा। अगले महीने की शुरुआत में संभावित आईटी पालिसी इस बैठक में लाई जाएगी। इसके तहत राज्य में आईटी क्षेत्र में आने वाली कंपनियों को कुछ रियायतें भी दी जाएंगी। आईटी पॉलिसी पर मुख्य सचिव से एक दफा फिर चर्चा की गई है। उनके द्वारा जो सुझाव दिए गए थे, उन्हें इसमें समाहित किया गया है। खुद आईटी डिपार्टमेंट ने यह पॉलिसी बनाई है, जिसमें प्रदेश में आईटी पार्क स्थापित करने की भी योजना है। ऐसा पार्क निजी क्षेत्र में भी विकसित किया जा सकता है, जैसे उद्योग विभाग ने इंडस्ट्रियल पार्क के लिए निजी कंपनियों को न्योता दिया है। उसी तर्ज पर आईटी कंपनियों को भी ऐसा पार्क बनाने के लिए कहा जाएगा। यहां आईटी पार्क बनाने के लिए वाकनाघाट को भी देखा गया है। हालांकि सालों पहले से इसकी योजना है, लेकिन जिस तरह सरकार ने आईटी के लिए अलग से पॉलिसी बनाई है, तो इसमें निवेश के लिए वाकनाघाट जैसे स्थलों पर काम भी शुरू हो जाएगा। बहरहाल कैबिनेट की बैठक में इस खाके पर विचार होगा, जिसके साथ यहां नई पॉलिसी लागू होने के अलावा दूसरी संभावनाओं पर विचार किया जाएगा।

 

 

 

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