एमएमसी नहीं, अब एमए जर्नलिज्म

शिमला—हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने यूजीसी के निर्देशों के बाद अब जर्नलिज्म की डिग्री का नाम बदलने का फैसला लिया है। बताया जा रहा है कि इस सत्र से एमए इन जर्नलिज्म और मास काम्युनिकेशन के नाम से छात्रों को डिग्री दी जाएगी। इससे पहले सीधे जर्नलिज्म इन मास काम्युनिकेशन के नाम से छात्रों को डिग्री दी जाती रही है। विभागीय जानकारी के अनुसार आचार संहिता के बाद होेने वाली ईसी की बैठक मंे इस फैसले को अमलीजामा पहनाया जाएगा। बता दें कि  पिछले सत्र के दौरान विवि द्वारा यूजीसी के आदेशों का पालन न करने की वजह से सैकड़ांे जर्नलिज्म छात्रों को इक्डोल में दाखिला नहीं मिल पाया था। एचपीयू को यूजीसी ने पिछले वर्ष पत्र लिखकर बाकायदा ये निर्देश दिए थे कि एमएमसी का नाम बदलकर एमए जर्नलिज्म या फिर कुछ और किया जाए। बावजूद इसके एचपीयू ने इस कार्य को पूरा करने के लिए एक साल से भी ज्यादा समय लगा दिया है। यूजीसी ने साफ किया था कि अगर एचपीयू इस साल भी सत्र शुरू होने से पहले एमएमसी का नाम नहीं बदलते हैं, तो ऐसे में रेगुलर एमएमसी करने वाले छात्रों को भी इस सत्र से दाखिला नहीं दिया जाना था। यूजीसी ने एचपीयू सहित प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों को इस कोर्स का नाम एमएमसी से बदल कर शब्दावली के अनुसार कुछ और रखने को कहा था। फिलहाल एचपीयू में रेगुलर और इक्डोल के माध्यम से यह कोर्स चल रहा है और अब इसका नाम बदलने की प्रक्रिया एचपीयू ने शुरू कर दी है। इक्डोल के निदेशक प्रो. कुलवंत सिंह पठानिया ने बताया कि यूजीसी ने शब्दावली के तहत एचपीयू में एमएमसी के नाम से चल रहे कोर्स का नाम बदलने के निर्देश दिए थे, अब जब तक एचपीयू कोर्स का नाम नहीं बदलता है, इक्डोल में भी इस कोर्स में प्रवेश की प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकती है। यही वजह है कि अब आचार संहिता के बाद इस फैसले को अंतिम मुहर लगने का इंतजार प्रदेश के हजारों छात्रों को है। उल्लेखनीय है कि पहले केवल जर्नलिज्म इन मास काम्युनिकेशन के नाम से छात्रों को डिग्री मिलती थी। अब छात्रों को इस डिग्री के साथ एमए इन जर्नलिज्म की डिग्री मिलेंगी। विभागीय सूत्रों के अनुसार फिलहाल एचपीयू अभी इस मामले पर अंतिम मंजूरी ईसी में न मिलने तक  दाखिले व प्रवेश परीक्षा का दौर जारी रखेंगे। लिहाजा इस सत्र से पत्रकारिता में जाने वाले छात्रों के दाखिले पर कोई सकंट नहीं होगा। हर साल की तरह इस साल भी जर्नलिज्म कोर्स के नाम पर छात्रों को नई डिग्री और नए नाम के साथ पढ़ने का मौका मिलेगा।

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