एमएलए तीन, फिर भी भाजपा मजबूत

शिमला—शिमला जिला में कांग्रेस के पास पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और पार्टी अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर हैं बावजूद इसके शिमला जिला में भाजपा का जलवा देखते ही बनता है। पूरे जिला में भाजपा के तीन विधायक हैं और तीनों विधायकों की परफॉर्मेंस भी यहां पर सामने आई है, जिनके दम पर भाजपा ने पूरे शिमला जिला पर अपना दबदबा कायम कर दिया है। विधानसभा चुनाव में यह स्थिति क्या होगी यह दूर की बात है परंतु लोकसभा चुनाव में जिस तरह की सुनामी चली है उसमें शिमला जिला भी बह निकला है। जिला मंे भाजपा के विधायक केवल शिमला शहर, जुब्बल कोटखाई और चौपाल में हैं जबकि इन क्षेत्रों से उसके प्रत्याशी को बढ़त मिलने के अलावा दूसरे क्षेत्रों में भी बढ़त मिली जहां पर कांग्रेस के विधायक हैं। शिमला जिला में कांग्रेस ने भाजपा के खिलाफ बागबानों के साथ ठगी का मुद्दा उठाया और सेब के आयात शुल्क को बढ़ाने के मामले में धोखा करने का आरोप जड़ा। इस मुद्दे को कांग्रेस भुना नहीं सकी और बागबानों ने भी भाजपा का पूरा साथ दिया। भाजपा के आंकड़ों की बात करें तो शिमला जिला में चौपाल में एसोसिएट विधायक हैं जहां से भाजपा प्रत्याशी को कुल 38013 वोट पड़े। यहां पर कांग्रेस के महासचिव भी हैं परंतु उनका कोई असर चौपाल विधानसभा में देखने को नहीं मिला। यह भी बता दें कि यहां से कांग्रेस के जो प्रत्याशी विधानसभा चुनाव में लड़ते हैं वह भी प्रचार में नहीं उतर पाए। इसी तरह से ठियोग विधानसभा में कांग्रेस के पास पार्टी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर और विद्या स्टोक्स हैं लेकिन मोदी की सुनामी में यह लोग भी छिटक गए जहां से भाजपा को 35281 वोट हासिल हुए। कुसुम्पटी में कांग्रेस का विधायक है जहां से भाजपा को 29072 वोट पड़े। शिमला शहर से शिक्षा मंत्री हैं जहां पर भाजपा ने शहरी मतदाताओं से 20724 वोट हासिल किए। शिमला ग्रामीण में वीरभद्र सिंह के पुत्र विक्रमादित्य सिंह विधायक है जहां से भी भाजपा को 32605 वोट हासिल हुए हैं। वहीं रोहडू जहां से कांग्रेस हमेशा लीड में रहती थी वहां भाजपा को लीड के साथ कुल 29141 वोट मिले और मुख्य सचेतक नरेन्द्र बरागटा के यहां से भाजपा को 29246 वोट हासिल हुए। इन सभी क्षेत्रों में भाजपा की लीड के कई मायने लगाए जा सकते हैं जो साफ संकेत कर रही है कि जिला शिमला में भाजपा मजबूत होकर उभरी है। उसका यह दमखम विधानसभा चुनाव के दौरान कितना कायम रहेगा इसपर भी चर्चा शुरू हो चुकी है। बहरहाल भाजपा के लिए यह सुखद संकेत हैं कि जिला शिमला में कांग्रेस का गढ़ उसने भेद दिया है और अब विधानसभा में भी ऐसे ही नतीजों के लिए पार्टी लड़ेगी।

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