एमसीआई जांच में हिमाचल के नए मेडिकल कालेज फेल

स्टाफ के साथ अन्य कई कमियां गिनाईं, नए दाखिलों पर मंडराया संकट

शिमला  – हिमाचल प्रदेश के नए मेडिकल कालेज, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के सर्वेक्षण में फेल हो गए हैं। लिहाजा प्रदेश के नए मेडिकल कालेजों में आगामी सत्र के लिए एडमिशन पर बड़ा खतरा मंडरा गया है। जानकारी के मुताबिक, हाल ही में किए गए नए मेडिकल कालेजों क ी सर्वेक्षण में सभी कालेजों क ी स्टाफ एंड अदर डेफिशिएंसी दस फीसदी से ज्यादा निकली है। लिहाजा एमसीआई ने प्रदेश सरकार को पत्र लिख कर साफ किया है कि संबंधित मेडिकल कालेजों में स्टाफ एंड अदर्स डेफिशिएंसी को देखते हुए ‘क्यों न अगले सत्र के लिए आपके मेडिकल कॉलेज में एडमिशन बंद कर दी जाए’। फिलहाल इस मसले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के एक आला अफसर एमसीआई से मिलने दिल्ली रवाना भी हो गए हैं। अब यह देखना है कि प्रदेश के नए मेडिकल कालेजों में स्टाफ की कमी को वह किस तरह से एमसीआई के समक्ष डिफेंड कर पाते हैं। अब भी प्रदेश के नए मेडिकल कालेजों में कमियां पूरी नहीं हो पाई हैं, जिनमें अभी चंबा मेडिकल कालेज का नंबर पहला है। दूसरे नंबर पर हमीरपुर मेडिकल कालेज, तीसरे नंबर पर नाहन मेडिकल कालेज और कमियों को लेकर चौथे नंबर पर मंडी मेडिकल कालेज है, जिसमें 20 से 40 प्रतिशत स्टाफ एंड अदर की कमी दर्ज की गई है। बहरहाल यदि एमआई को प्रदेश सरकार कालेजों की कमियों को लेकर संतुष्ट कर पाई तभी नाहन में अगले सत्र से तीसरा एमबीबीएस बैच और अन्य मेडिकल कालेजों में दूसरा बैच बैठ पाएगा। गौर हो कि पहले से ही प्रदेश में डाक्टरों की कमी चल रही है। इसके लिए बेहद जरूरी है कि प्रदेश के नए मेडिकल कालेज बेहतर तरीके से चल सकें। प्रदेश में यह भी देखा जा रहा है कि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के नियम के तहत डाक्टरों के फे रबदल की मौजूदा प्रक्रिया भी सही नहीं हैं, जिससे संबंधित डाक्टर बड़ी परेशानी में घिर सकते हैं। इससे नए मेडिकल कालेजों में मेडिकोज का भविष्य भी खतरे में हैं। इसके लिए अब प्रदेश सरकार को भी गंभीरता जाहिर करनी होगी, जिसमें नए मेडिकल कालेज में सबसे पहले डाक्टरों की कमी को एक पक्की तरह से दूर करना होगा।

You might also like