ओलों ने झाड़ दी फसल

नेरवा—मई महीने का दूसरा शनिवार बागबानों के लिए आफत लेकर आया। शनिवार शाम बारिश के साथ आये  तूफान ने बागबानों के सपनो पर पानी फेर कर रख दिया है । करीब साढ़े तीन चार बजे चले तूफान ने बागवानों के सेब के पौधे धराशाई कर डाले व फसल झड़कर जमीन पर बिखर गई। ग्राम पंचायत केदी के शीतक गांव के बागबान कंवर सिंह ने बताया कि शनिवार को तूफान चलने से उनके फसल से लदे सेब के पौधे जड़ से उखड़ कर धराशाई हो गए व बागीचे में पौधों पर लगे सेब भी झड़कर जमीन पर बिखर गए। कंवर सिंह ने कहा कि तूफान से उनका करीब पच्चास साठ हजार रुपए का नुकसान हुआ है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि बागीचे में तूफान से हुए नुकसान का आंकलन कर उन्हें इसका मुआवजा प्रदान किया जाए। वहीं मौसम विभाग के पूर्वानुमान ने भी किसानों-बागबानों की चिंता में इजाफा कर दिया है। विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार किसानों, बागबानों को 15 मई तक आगामी चार दिनों तक कुदरत के इस मिजाज का सामना करना पड़ सकता है। बता दें कि क्षेत्र में फ्लॉवरिंग की प्रक्रिया पूरी तरह संपन्न हो चुकी है व सेब सहित अन्य फलों की सेटिंग हो चुकी है। अब इन फलों पर सर्दी या गर्मी का कोई विशेष प्रभाव नहीं पडे़गा, परंतु आंधी तूफान व ओले इन पर कहर बन कर टूट सकते हैं। स्थानीय बागबान सूरत शर्मा, किरपा राम, भीम सिंह, सुरेश शर्मा, मस्त राम, जोगी राम, सूरत चौहान, रोशन आदि ने बताया कि अभी तक तो थोड़ी बहुत प्राकृतिक बाधाओं के बावजूद सेब, टमाटर सहित स्टोन फू्रट की अच्छी फसल की उम्मीद की जा रही है परंतु शनिवार से मौसम के बदले तेवरों ने उन्हें डराकर रख दिया है। मई व जून माह में इस तरह मौसम के मिजाज बदलने से किसानों बागबानों को नुकसान भी उठाना पड़ सकता है क्योंकि इन दो महीनों में ओलावृष्टि, आंधी व तूफान का ही सबसे बड़ा खतरा रहता है। बहरहाल, मई महीने के पहले पखवाड़े में मौसम के बदले मिजाज ने किसानों बागबानों की पेशानी पर चिंता की रेखाएं खींच दी है।

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