कंडक्टर भर्ती घोटाले की जांच शुरू

मामले के मुख्य आरोपी सीजीएम गुप्ता की शक्तियां छिनी, एचआरटीसी में वर्ष 2003 में हुई थी गड़बड़

शिमला – वर्ष 2003 के एचआरटीसी भर्ती घोटाले में कोर्ट के आदेश पर मामले की जांच दोबारा शुरू हो गई है। इसके चलते तत्कालीन भर्ती में मुख्य किरदार निभाने वाले एचआरटीसी के चीफ जनरल मैनेजर एचके गुप्ता की मुश्किलें बढ़ गई हैं। राज्य सरकार ने एचके गुप्ता की सारी शक्तियां छीन ली हैं। उनके स्थान पर अब एचआरटीसी के महाप्रबंधक को रिपोर्टिंग करने के लिए कहा गया है। उल्लेखनीय है कि वीरभद्र सरकार में वर्ष 2003 के दौरान हुई कंडक्टर भर्ती को लेकर जमकर धांधली के आरोप थे। इसके चलते स्टेट विजिलेंस एंड एंटी क्रप्शन ब्यूरो ने मामले की जांच की थी। सरकार के प्रभाव के चलते इस मामले की जांच को बंद कर दिया था। यकायक इस मामले की कोर्ट में प्राइवेट कम्पलेंट की गई। इस आधार पर नम्होल पुलिस थाना में मामला दर्ज किया गया। इसके चलते 16 वर्ष पूर्व हुई कंडक्टर भर्ती की जांच दोबारा शुरू हो गई है। इस कारण एचआरटीसी के मुख्य महाप्रबंधक एचके गुप्ता की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कंडक्टर भर्ती मामले में कोर्ट के आदेश पर 2017 में शिमला के सदर थाने में बिलासपुर के नम्होल निवासी जय कुमार ने एफआईआर दर्ज करवाई थी। जांच में कथित अनियमितताएं बेनकाब होने पर एचआरटीसी के मुख्य महाप्रबंधक एचके गुप्ता को शिमला के सैशन कोर्ट से 20 मई को अंतरिम जमानत मिली थी। इस पर बुधवार को सेशन कोर्ट में सुनवाई हुई। शिकायत कर्ता के वकील सुरेश ठाकुर केस की पैरवी के लिए इस मामले में कोर्ट में पेश हुए। कोर्ट ने शिकायतकर्ता के वकील सुरेश ठाकुर को इस मामले में सरकार और पुलिस को सहयोग करने के निर्देश दिए। अंतरिम जमानत पर अब अगली सुनवाई पहली जून को होगी। चाहे कुछ भी हो, लेकिन एचआरटीसी के अधिकारियों की इस मामले में नींद हराम हो गई है।

पथ परिवहन निगम की कार्यप्रणाली बेपटरी

एचआरटीसी में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। मामले में परिवहन विभाग तथा एचआरटीसी के उच्चाधिकारियों ने राज्य सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। अफसरशाही का कहना है कि एचआरटीसी की कार्यप्रणाली पटरी से उतर गई है। एमडी को भेजी जाने वाली फाइलें बाइपास कर निचले अधिकारी को भेजी जा रही हैं। इस अधिकारी को गलत ढंग से पदोन्नत किया गया है।

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