कपड़ों के बॉर्डर पर नहीं दिखी

शिमला -कपड़ों के  बॉर्डर पर लिपियों को छापने की सरकार की अहम योजना सिरे नहीं चढ़ पाई है। प्रदेश की प्राचीनतम पांडुलिपियों को सहेजने और इनके प्रचार के लिए सरकार ने पिछले वर्ष भाषा अकादमी  के सहयोग से एक अहम योजना तैयार की थी, जिसमें कपड़ों के बॉर्डर पर पांडुलिपियों की छपाई करने का प्लान बनाया गया था, लेकिन एक वर्ष बाद भी प्रशासन इस योजना को सिरे नहीं चढ़ा पाया है। फिलहाल निफ्ट के साथ एमओयू साइन किया जाना था, जो नहीं हो पाया है। हमीरपुर निफ्ट ने लिपियों को कपड़ों पर उकेरना था। हालांकि भाषा अकादमी को भी इस बात की जानकारी नहीं है कि एमओयू हुआ है या नहीं। बता दें कि पिछले वर्ष इस प्रस्ताव पर खूब चर्चा भी हुई थी। पिछले वर्ष निफ्ट के संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक हुई थी, लेकिन योजना क ो अमलीजामा ही नहीं पहनाया जा सका है। बताया जा रहा है कि प्रदेश में प्राचीन लिपियों पर एक पुस्तक भी तैयार की गई है। इसमें प्राचीन लिपियों का पूरा ब्यौरा दिया गया है। पुस्तक तैयार के बाद इस कार्यक्रम का विस्तार किया जाना था। इसके माध्यम से ही कपड़ों के बॉर्डर पर लिपियों को उकेरा जाना था। प्रस्ताव के मुताबिक सबसे ज्यादा साड़ी के बॉर्डर पर लिपियों को उकेरे जाने का कार्यक्र म था। इसमें अशोक कालीन ब्रम्ही लिपी, खरोष्ठी लिपि, शारदा लिपि स्वर, शारदा लिपि व्यंजन, भट्टाक्षरी लिपि, पंडवाणी लिपि, भोटी वर्गमाणा, देवनागरी, बह्मी, पावुची, भोटी, टांकरी, चंदवाणी और भट्टाक्षरी की लिपियों को कपड़ों पर उकेरा जाना था। गौर हो कि इन लिपियों को पढ़ने वालों में अब बहुत कम विशेषज्ञ हैं। इसे जनता के समक्ष भी एक नए रूप में प्रदर्शित किया जाए, इसके लिए यह योजना तैयार की गई थी। इसमें भाषा अकादमी का भी विशेष सहयोग लिया जाना था। हालांकि अकादमी द्वारा लिपियों को लेकर पुस्तक तैयार की गई है, लेकिन  योजना आगे नहीं बढ़ पाई है। योजना की रूपरेखा इसलिए तैयार की गई थी क्योंकि कपडे़ के माध्यम से यह देश-विदेश तक पहुंचनी थीं।

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