कश्यप का फौजी से एमपी बनने का सफर रोचक

नाहन—शिमला संसदीय क्षेत्र से नवनियुक्त सांसद सुरेश कश्यप का सेना के नॉन कमीशंड अधिकारी से एक सांसद तक का सफर बेहद ही रोचक रहा। ऐसा नहीं है कि सुरेश कश्यप ने इसके लिए मेहनत न की हो। आज सिरमौर जिला के पच्छाद विधानसभा क्षेत्र के छोटे से गांव गागल शिकोर केे किसान माता-पिता शांति देवी व चमेल सिंह के बेटे देश की सबसे बड़ी पंचायत लोकसभा के सदस्य चुने जा चुके हैं। सुरेश कश्यप की इस उपलब्धि से न केवल उनके परिजन, रिश्तेदार व पच्छाद के लोग खुश हैं, अपितु पूरा शिमला संसदीय क्षेत्र की नवनिर्वाचित सांसद को चुनकर अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रहा है। सुरेश कश्यप का जन्म 23 मार्च, 1971 को बजगा पंचायत के पपलाह गांव में चमेल सिंह व शांति देवी के घर हुआ। सुरेश कश्यप ने अपनी प्राथमिक व मिडल शिक्षा स्थानीय गागल शिकोर स्कूल से उत्तीर्ण की तथा उसके पश्चात जमा दो की पढ़ाई सराहां स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला से पूरी की। उसके पश्चात सुरेश कश्यप भारतीय वायु सेना में वर्ष 1988 में भर्ती हो गए। जहां पर करीब 16 वर्ष की सेवाओं के बाद सुरेश कश्यप वर्ष 2004 में भारतीय वायु सेना से एसएन सीओ के पद से सेवानिवृत्त हुए। सुरेश कश्यप एक उच्च शिक्षा प्राप्त नेता हैं। उन्होंने एयर फोर्स में सेवा के दौरान दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नात्तक व स्नातकोत्तर की परीक्षा उत्तीर्ण की। एयर फोर्स में सेवा के दौरान सुरेश कश्यप ने उच्च शिक्षा में अपनी रुचि जारी रखी। इस दौरान सुरेश कश्यप ने लोक प्रशासन, अंग्रेजी व टुरिज्म में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। यही नहीं सुरेश कश्यप ने बीएड व पीजीडीसीए की पढ़ाई भी की है। भारतीय वायु सेना से सेवानिवृत्ति के बाद सुरेश कश्यप ने पढ़ाई से नाता जारी रखा तथा एमफिल की पढ़ाई पूरी की। सुरेश कश्यप ने राजनीति में रुचि के चलते वर्ष 2005 में अपना राजनीतिक जीवन स्थानीय नेताओं के प्रोत्साहन से बतौर बीडीसी सदस्य पच्छाद के बजगा वार्ड से शुरू किया। सुरेश कश्यप वर्ष 2006 में भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जाति मोर्चा केे जिला अध्यक्ष बने। 2009 तक वह भाजपा एससी मोर्चा के जिला अध्यक्ष तथा वर्ष 2009 से 2012 तक भाजपा एससी मोर्चा के प्रदेश महासचिव मनोनीत किए गए थे। सुरेश कश्यप ने वर्ष 2007 में पहली बार कांग्रेस के दिग्गज नेता गंगूराम मुसाफिर के खिलाफ विधानसभा चुनाव में उतरने का निर्णय लिया, परंतु पहली बार के चुनाव में वह हार गए। सुरेश कश्यप ने हार नहीं मानी तथा लगातार पार्टी में सक्रियता से कार्य करते रहे। फिलहाल अब संसद में जनता की आवाज बनेंगे।

2012 में विधायक के रूप में शुरू की पारी

2012 में भारतीय जनता पार्टी ने सुरेश कश्यप पर विश्वास कायम रखा तथा विधानसभा का टिकट देकर सुरेश कश्यप ने कांग्रेस के दिग्गज नेता गंगूराम मुसाफिर को करारी शिकस्त देकर विधायक के रूप में अपना सफर शुरू किया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गंगूराम मुसाफिर जैसे दिग्गज नेता को हराकर सुरेश कश्यप का नाम प्रदेश भर में चर्चा में आ गया। सुरेश कश्यप ने वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में फिर से पच्छाद से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा तथा पुनः कांग्रेस नेता गंगूराम मुसाफिर को पछाड़ते हुए हिमाचल प्रदेश विधानसभा में दूसरी बार दस्तक दी।

डेढ़ साल की मेहनत लाई रंग

डेढ़ वर्ष से लगातार विधानसभा में सक्रिय रूप से कार्य करते रहे तथा इसी का परिणाम रहा कि केंद्रीय भारतीय जनता पार्टी संसदीय बोर्ड व हिमाचल प्रदेश भारतीय जनता पार्टी ने शिमला लोकसभा क्षेत्र से दो बार के सांसद रहे प्रो. वीरेंद्र कश्यप का टिकट बदलकर दो बार विधायक रहे सुरेश कश्यप पर दांव खेला।

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