कहीं खेत में न सड़ जाए गेहूं

शिमला —मौमस की मार अब शिमला जिला के किसानों की गेहूं की फसलों को नुकसान पहुंचा रही है। शिमला जिला के जिन क्षेत्रों में गेहूं की फसलों की कटाई कर रखी है, उसकी थ्रेसिंग अभी तक फार्मर नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में किसानों ने गेहूं की फसल को काट कर उसे खेतों में ही रखा है। बार-बार मौसम में हो रहे परिवर्तन और बारिश व ओलावृष्टि की वजह से काफी नुकसान हो रहा है। जिला के मशोबरा, रामपुर, चौपाल व बसंतपुर क्षेत्र में सबसे ज्यादा किसान गेहंू की फसलों को उगाते हैं। ऐसे में अभी तक थ्र्रेसिंग न करवाने की वजह से फार्मर्स की चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि गर्मियों के मौसम में भी बरसात जैसा लग रहा है। हैरत तो यह है कि शिमला जिला के 50 फीसदी किसान गेहूं की फसलों की उगाई करते हंै। दिलचस्प यह है कि पहले अच्छी बारिश की वजह से ही किसानों की गेहूं की फसलों की पैदावार काफी अच्छी हुई है। वहीं, अब इसी मौसम की वजह से लगभग दस फीसदी किसान थ्रेसिंग का कार्य नहीं करवा पा रहे हंै। किसानों की मानें तो इस मौसम में गेहूं को भिगोने से बचाने के लिए अंदर बाहर करने से भी खासा नुकसान उन्हंें हो रहा है। बता दें कि मैदानी क्षेत्रों में अधिकतर किसानों ने थ्रेसिंग का कार्य पूरा कर दिया है। हालांकि सोलन, सिरमौर के कुछ एक ऐसे किसान होंगे, जो किन्हीं कारणों से थ्रेसिंग नहीं करवा पा रहे हैं। ऐसे में इन दोनों जिलों के किसान भी काफी परेशान हैं। फिलहाल यह तो साफ है कि अब गेहूं की थे्रसिंग किसान तभी करवा पाएंगे जब मौसम साफ रहेगा। बता दें कि मौमस विभाग ने अभी तीन चार दिन और मौसम के ऐसे ही रहने की आशंका जताई है। वहीं, यह भी साफ कर दें कि जब तक मौसम साफ नहीं हो जाता है, तब तक किसान थ्रेसिंग के कार्यों को भी नहीं कर सकते हैं। जानकारी के अनुसार जिला के कई क्षेत्रों में किसानों की फसलें खेतों में ही रखकर खराब होने की कगार पर भी आ गई हैं। फिलहाल मौसम विभाग के पूर्वानुमान तक किसानों को अभी कुछ दिन और राहत के लिए इंतजार करना होगा। भारी ओलावृष्टि की वजह से बागबानों के सेब के पौधों को भी खासा नुकसान पहुंच रहा है।

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