कांगड़ा में भाजपा छह, कांग्रेस चार बार जीती

धर्मशाला   -प्रदेश की चार लोकसभा सीटों में से कांगड़ा संसदीय सीट का शुरू से ही खासा प्रभाव रहा है। इन दिनों चुनाव नतीजों और लीड को लेकर सियासी जमा जोड़अ चल रहा है। नतीजों के इंतजार में जनता इतिहास पर भी नजरें दौड़ा रही है। हिमाचल को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने के बाद और आपतकाल हटने पर 1977 में शुरू हुए लोकसभा चुनावों के दौर में पहली बार इस सीट पर भारतीय लोक दल के कंवर दुर्गा चंद ने जीत दर्ज कर संसद की दहलीज लांघी थी। उसके बाद 1980 में कांग्रेस के विक्रम चंद महाजन और 1984 में चंद्रेश कुमारी जीत दर्ज कर दिल्ली पहुंचीं। इसके बाद 1989 में भाजपा के शांता कुमार पहली बार सांसद के तौर पर संसद पहुंचे। वर्ष 1991 में भाजपा के ही डीडी खनूरिया ने जीत दर्ज की। फिर 1996 में फील्ड मार्शल कहे जाने वाले कांग्रेस के  सत महाजन ने जीत दर्ज की। वर्ष 1998 और 1999 के चुनावों में लगातार शांता कुमार जीते। इसके बाद 2004 के चुनावों में कांग्रेस के चौधरी चंद्र कुमार और 2009 में भाजपा से डा. राजन सुशांत ने इस सीट से बतौर सांसद जीत हासिल की। बीते 2014 के चुनावों में एक बार फिर भाजपा के शांता कुमार कांग्रेस के चौधरी चंद्र कुमार को हराकर चौथी बार बतौर सांसद दिल्ली पहुंचे। इस बार भाजपा ने मंत्री किशन कपूर पर दांव खेला है, जबकि कांग्रेस ने दिग्गज युवा उम्मीदवार व कांगड़ा से विधायक पवन काजल को चुनावी मैदान में उतारा है। अब देखना होगा जीत का सेहरा किसके सिर बंधता है।

शांता कुमार के नाम रिकार्ड

1977 के बाद हुए चुनावों में आठ ही चेहरे सांसद बन पाए हैं। इनमें सर्वाधिक चार बार चुनाव जीतने का रिकार्ड सांसद शांता कुमार के नाम है। शांता के अलावा एक भी चेहरा ऐसा नहीं है, जो दूसरी बार संसद की दहलीज लांघ पाया हो। उनके अलावा सात नेता सांसद रहे हैं, लेकिन उन्हें कभी कांगड़ा संसदीय क्षेत्र से दोबारा सांसद बनने का अवसर नहीं मिला।

चंद्रेश एकमात्र महिला सांसद

चंद्रेश कुमारी एकमात्र महिला सांसद होने के साथ ऐसी सांसद भी हैं जो कांगड़ा से तो दोबारा सांसद नहीं रही, लेकिन वह अपने मायके जोधपुर से चुनाव जीत कर संसद पहुंची थीं।

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