कांग्रेस को महंगा पड़ा संगठन में बदलाव

चुनावों से ठीक पहले सुक्खू को हटाने से पार्टी में बढ़ी गुटबाजी से नुकसान

शिमला —ऐन मौके पर संगठन में किया बदलाव कांग्रेस की सबसे बड़ी हार का कारण बन गया। चुनावों से ठीक पहले सुखविंद्र सिंह सुक्खू को हटाए जाने के उल्टे पड़े दाव से कांग्रेस में गुटबाजी बढ़ गई। इसके चलते प्रत्याशियों के चयन से लेकर स्टार प्रचारकों की सूची तक कांग्रेस में हर जगह आपसी तलवारें खिंची रहीं। पार्टी प्रत्याशियों के चयन को लेकर भी कांग्रेस ने पार्टी को नुमाइश का अखाड़ा बना दिया। इस कारण धरातल पर मजबूती के साथ चुनावी रण को तैयार भाजपा के सामने कांग्रेस की अब तक की सबसे बड़ी हार हुई है। हैरत है कि इस शर्मनाक हार के बावजूद कांग्रेस ने नैतिकता दिखाने के बजाय गुटबाजी की चिंगारी को सुलगाना शुरू कर दिया है। यही कारण है कि पार्टी के दिग्गज नेता वीरभद्र सिंह और पूर्व अध्यक्ष सुखविंदर सुक्खू फिर आमने-सामने आ रहे हैं। इन परिस्थितियों में प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप राठौर पूरी तरह से बैकफुट पर हैं और संगठन को अपने दमखम पर खड़ा करना उनके लिए आसान नहीं है। कमोवेश इन परिस्थितियों में कांग्रेस को विधानसभा के उपचुनावों में भी सत्तारूढ़ दल से निपटना आसान नहीं होगा।  लोकसभा में मिली प्रचंड जीत के बाद भाजपा उपचुनाव की तैयारियों में पहले दिन से ही डट गई है। पार्टी की मिली कमान के बाद राठौर सबको साथ चलाने में नाकाम हुए हैं। चुनावों की घोषणा से पहले कांगड़ा के रण से पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा दावेदारों की सूची में सबसे ऊपर थे। भाजपा को हमीरपुर के गढ़ में सेंधने के लिए नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री और पूर्व पार्टी अध्यक्ष सुक्खू के नाम सबसे ऊपर चल रहे थे। मंडी की सियासत में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और उनके बेटे विक्रमादित्य का नाम लिया जा रहा था। बावजूद इसके कांग्रेस ने पार्टी प्रत्याशियों की घोषणा को लेकर भाजपा को मनोवैज्ञानिक लाभ दे दिया।

राठौर के सामने बड़ी चुनौती

कांग्रेस को अब हार के सदमे से बाहर लाना कुलदीप राठौर के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। खासकर कांग्रेस के दिग्गज नेताओं वीरभद्र सिंह, मुकेश अग्निहोत्री, जीएस बाली, सुधीर शर्मा, आशा कुमारी, कौल सिंह और सुखविंद्र सिंह सुक्खू के गृह विधानसभा क्षेत्रों में हुई प्रलय पार्टी के लिए शुभ संकेत नहीं हैं।

You might also like