कांग्रेस पदाधिकारियों पर गिरेगी गाज

काम न करने वालों का बन रहा हिसाब, अनुभवहीनता भी संगठन पर भारी पड़ी

शिमला —कांग्रेस संगठन में उन पदाधिकारियों पर गाज गिरनी तय है, जिन्होंने लोकसभा चुनाव में संगठन के लिए सक्रियता से काम नहीं किया। ऐसे पदाधिकारियों का चिट्ठा तैयार करने की कवायद शुरू हो गई है।  सूत्रों के अनुसार कांग्रेस संगठन ने जिलों व ब्लॉक पदाधिकारियों से इस संबंध में जहां निचले स्तर पर की रिपोर्ट मांगी है, वहीं कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप राठौर ने अपने खास लोगों से भी इसका वृतांत बताने को कहा है। सूत्र बताते हैं कि हार के पोस्टमार्टम के तहत अब ऐसे लोगों की ओहदेदारी छीनी जाएगी और इसका सिलसिला पार्टी की प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल से चर्चा के साथ ही शुरू हो जाएगा। संगठन में निचले स्तर तक बदलाव की कवायद जल्द शुरू हो जाएगी। बता दें कि कांग्रेस के नेता इस हार को अपने ऊपर न लेकर यही कह रहे हैं कि यह मोदी की सुनामी थी। हिमाचल प्रदेश में क्योंकि एक भी विधानसभा क्षेत्र ऐसा नहीं है जहां से कांग्रेस आगे रही हो, इसलिए सभी नेताओं को यह बहाना मिल गया है कि राष्ट्रीय लहर में हिमाचल भी डूब गया। यह कहकर कांग्रेस के नेता अब अपना पिंड छुड़ाने लगे हैं। खुद राठौर ने यह कहा है कि जनता ने वोट मोदी को दिए न कि भाजपा को। इतना ही नहीं, उनका यह भी कहना है कि उन्होंने अभी तीन महीने पहले ही संगठन की बागडोर संभाली है और आते ही चुनाव में चले गए। ऐसे में उन्हें अपने हिसाब से संगठन खड़ा करने का मौका नहीं मिला। उनका यह कहना उन सुक्खू समर्थकों के लिए खतरे की घंटी है, जो कि सालों से ओहदे लेकर बैठे हैं और चुनाव में उनकी सक्रियता न के बराबर दिखी। राठौर ने उन पदाधिकारियों को ओहदों से नहीं हटाया, जो पहले से काम कर रहे थे। उनके दम पर ही वह चुनाव मैदान में गए, लेकिन एक बड़़ी हार का सामना इन्हें करना पड़ा। इसलिए अब वक्त आ गया है कि संगठन की ओवर हॉलिंग की जाए। देखना यह है कि कुलदीप राठौर अपनी नई टीम कब तक तैयार करते हैं।

अब उपचुनाव में करनी होगी मेहनत

कांग्रेस अपनी हार के पोस्टमार्टम के बाद क्या सबक सीखती है यह देखना होगा। इसके बाद दो विधानसभाओं का उपचुनाव भी उनके सामने है, जिसके लिए अभी से फील्ड में मेहनत नहीं की तो कुछ हाथ नहीं लगेगा और फिर से बहाने ढूंढने होंगे।

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