क्रांतिकारी मैडम भीखा जी कामा

मैडम भीखा जी कामा भारतीय वीरांगनाओं में वह नाम है, जिसे हम अकबर से लोहा लेने वाली गौंडवानें  की  रानी दुर्गावती और ब्रिटश सरकार को नाकों चने चबवा देने वाली झांसी की रानी महारानी लक्ष्मीबाई  की श्रेणी में रखते हुए गौरवान्वित होते हैं। ब्रिटिश राज्य के विरुद्ध  भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में इन्होंने जो वीरतापूर्ण भूमिका निभाई, उसके लिए जब तक भारत का इतिहास पढ़ा जाएगा तब तक उन्हें भी पढ़ा जाएगा। उनकी एक विशिष्ट पहचान भारत के लिए विश्व स्तर पर संघर्ष और स्वतंत्रता के प्रतीक रूप में तिरंगा झंडा विश्वस्तर पर सर्वप्रथम लहराना भी है। जिसके लिए वह प्रतिवर्ष स्वतंत्रता  दिवस, झंडा  दिवस और गणतंत्र दिवस पर याद की जाती रहेंगी । उनका सम्मान एक अन्य कारण से भी है कि उन्होंने देवनागरी लिपि में वंदेमातरम् लिखा हुआ झंडा फहराकर हिंदी और वंदेमातरम गीत को भी सम्मान दिया था। सच यह है कि वह वंदेमातरम् महा राष्ट्रगान के चौथे पैराग्राफ  के सामान हैं। उन्हें कोटि कोटि नमन 

त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी

कमला कमलदल विहारिणी

वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम

नमामि कमलां अमलां अतुला

सुजलां सुफलां मातरम् ॥   

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