क्विंटल गेहूं की़ 210 रुपए कटाई किसान बोले, कहां जाएं भाई

प्रदेश में थ्रेशिंग के नाम पर किसानों से लूट का खेल चल रहा है, लेकिन कोई भी उनकी फरियाद सुनने वाला नहीं है। गौर रहे कि इस बार 1840 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं बिक रही है…

देश में किसानों की आय डबल करने के लिए हमारे नेता हर रोज नए नए फार्मूले सुझाते हैं। बेचारे किसानों की इनकम तो डबल होती नहीं,उल्टे एक नई मुसीबत घेर लेती है। इस बार नई मुसीबत का नाम है गेहूं थ्रेशिंग के भारी भरकम रेट। अपनी माटी टीम ने इस बार प्रदेश में गेहूं की थ्रेशिंग के हाल जाने। पता चला कि थ्रेशर वाले उनसे एक टीन गेहूं की थ्रेशिंग के 30 रुपए वसूल रहे हैं। टीन में 14 किलो गेहूं आती है। यानी क्विंटल गेहूं के कम से कम सात टीन बनेंगे। ऐसे में एक क्विंटल गेहूं की थ्रेशिंग का कुल खर्च बनता है 210 रुपए। किसानों संतोष, राजकुमार, प्रकाश आदि का कहना है कि यह रेट बेहद ज्यादा हैं। हैरानी की बात है कि पूरे प्रदेश में थ्रेशिंग के नाम पर किसानों से लूट का खेल चल रहा है, लेकिन कोई भी उनकी फरियाद सुनने वाला नहीं है। गौर रहे कि इस बार 1840 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं बिक रही है। एफसीआई द्वारा प्रति क्विंटल 105 रुपए दाम बढ़ाए गए हैं। लेकिन यह बढ़ोतरी ऊंट के मुंह में जीरा है। गेहूं के दाम इतने कम हैं कि यह खेती घाटे का सबसे बड़ा सौदा साबित हो रही है। यही वजह है कि आज हजारों किसान खेती से मुंह मोड़ चुके हैं। बहरहाल किसानों ने कृषि विभाग और सरकार से मांग उठाई है कि शीघ्र आगामी समय में थ्रेशिंग के रेट तय किए जाएं।

-प्रतिमा चौहान , शिमला

कणक का गणित

छह माह में तैयार होने वाली गेहूं की फसल में आउटपुट बेहद कम होती है। पहले जुताई फिर खाद और स्प्रे बाद में कटान और थ्रेशिंग का इतना खर्च आ जाता है कि वह दिन दूर नहीं,जब किसान गेहूं की खेती करना ही छोड़ देंगे। अमूमन एक कनाल में क्विंटल गेहूं निकलती है। इसकी कीमत अगर 1800 रुपए भी होगी,तो खर्च भी इसके आसपास या इससे ज्यादा हो जाता है।

किसान बजट से उम्मीद

इस बार कांग्रेस पार्टी ने किसानों के लिए अलग से बजट देने की बात कही है। इस पर किसानों राहुल,सुनील,राज आदि कहते हैं कि ऐसा सच में हो जाए,तो किसानों को बड़ी मदद मिलेगी। हालांकि उनका कहना है कि अकसर चुनावी वादे कम पूरे होते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि कोई भी सरकार आए,लेकिन किसान बजट अलग हो जाए,तो क्या कहने।

कृषि विभाग गेहूं की थ्रेशिंग के रेट तय नहीं करता। ऐसी कोई योजना हमारे पास नहीं है

– डा देशराज, निदेशक, कृषि

विभाग के पास पहुंचा चरी अदरक का बीज

हमीरपुर। कृषि विभाग के पास चरी, बाजरा व मक्की का बीज पहुंचने लगा है।  विभाग ने आगामी सीजन के लिए खेप मंगवाना शुरू कर दी है। अकेले हमीरपुर जिला में ही विभाग ने सभी सेल सेंटरों पर बीज पहुंचा दिए हैं। विभाग की मानें तो चरी 2900 क्विंटल, बाजरा 1100 क्विंटल और अदरक 309 क्विंटल बीज पहुंच गया है, जिसे डिमांड के मुताबिक सभी सेल सेंटरों पर भेज दिया है।  अगर आप किसान हैं,तो फिर न करें देरी और शीघ्र करें विभाग से संपर्क।

हमीरपुर से मंगलेश कुमार की रिपोर्ट

बागबानों की शिकायत पर एफआईआर दर्ज

जुब्बल थाने में बागबानों द्धारा आढ़तियों के विरुद्ध दी गई शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। गत 26 अप्रैल को 5 बागबानों  द्वारा जुब्बल थाना में शिकायत दी गई थी। जिस पर जुब्बल पुलिस ने प्रारंभिक अन्वेषण कर बीतंे गुरूवार को दोषी आढ़ती के विरुद्ध मुकदमा दायर कर दिया है।शिकायत दी गई थी कि  कमीशन एजेंट के द्वारा गांव बढाल में वर्ष 2018 में सेब का कारोबार किया। बागवानों ने करीब 24,48,541 रुपए की कीमत का सेब इस आढ़ती को दिया गया, मगर एक वर्ष बीतने के पश्चात भी आढ़ती बागबानों का देय बकाया भुगतान नहीं कर रहा है। किसान सघर्ष समिति का आरोप है कि पैसा माँगने पर आढ़ती बागबानों को डराता धमकाता  है।

– टेकचंद वर्मा, शिमला

पांवटा पी गया 30 लाख का गन्‍ना

पांवटा साहिब पिछले अढ़ाई माह में करीब 30 लाख रुपए से अधिक का गन्ना पी गया है। यह अच्छी बात है कि पांवटा के लोग देसी पेय को तरजीह दे रहे हैं। जानकारी के मुताबिक पांवटा साहिब नगर परिषद क्षेत्र और आसपास के इलाके में करीब 30 रेहडि़यों पर गन्ने का जूस बिकता है। इसमें से मुख्य चौक और बाजार पर कुछ रेहडि़यां ऐसी हंै, जिसमंे प्रतिदिन 200 से 300 गिलास गन्ने का जूस बेचा जाता है। इनमंे से कुछ ऐसे हैं, जहां पर 80 और 100 और 150 गिलास प्रतिदिन बिकते हैं। ऐसे में औसतन पांवटा में प्रतिदिन 150 गिलास प्रति रेहड़ी गन्ने का जूस बिकता है। इस आंकड़े पर गोर करें तो एक दिन में पांवटा के लोग करीब 42 से 45 हजार रुपए का गन्ने का जूस प्रतिदिन पीकर स्वयं को ठंडक पहुंचाते हैं। ऐसे मंे अभी तक करीब अढ़ाई महीने में 30 लाख रुपए से अधिक का गन्ने का जूस पांवटा के लोग पी चुके हैं।

– दिनेश पुंडीर, पांवटा साहिब

गिरिपार का लहसुन : दाम बढ़े, पर पैदावार घटी

लहसुन उत्पादन के लिए मशहूर जिला सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र में आजकल लहसुन की खुदाई शुरू हो गई है। जिला सिरमौर के ऊपरी क्षेत्र में लहसुन की फसल बड़े पैमाने पर उगाई जाती है। उपरले क्षेत्र में करीब 1600 हेक्टेयर भूमि पर करीब चार हजार मीट्रिक टन लहसुन का उत्पादन होता है, लेकिन इस क्षेत्र में विपणन व्यवस्था की भारी कमी है।

इस वर्ष लहसुन के अच्छे दाम मिल रहे हैं। मार्किट में 40 से 65 रुपए प्रतिकिलो के हिसाब से लहसुन बिक रहा है, मगर इस वर्ष 60 से 70 फीसदी उपादन में कमी आई है। गिरिपार क्षेत्र के किसानों की लहसुन की फसल वाइड रोड की बीमारी की चपेट में आ गई थी। बीमारी लगने के कारण किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है। कई किसानों ने लहसुन की बीमारी के चलते अपने खेतों में हल चला दिया था व अन्य फसल की बुआई की थी। बता दें कि 60 फीसदी से अधिक लहसुन की फसल रोग की चपेट में आ गई। कई क्षेत्रों में 70 से 80 फीसदी फसल इस बीमारी के कारण पूरी तरह से नष्ट हो गई है। बची फसलों में भारी कमी दर्ज हुई है। कम उत्पान का कारण इस वर्ष ज्यादा ठंड पड़ने की वजह है। इस वर्ष बहुत ज्यादा ठंड होने के कारण लहसुन का उत्पादन घटा है। आढ़ती आरके सोलन तथा पदम सिंह ने बताया कि इस वर्ष लहसुन का भाव 40 से 65 रुपए प्रतिकिलो के हिसाब से खरीदा जा रहा है, मगर इस वर्ष लहसुन का उत्पादन कम है। मार्किट में कम ही लहसुन आ रहा है। जिससे ग्राहकों को भी इसकी कमी होगी।

– संजीव ठाकुर, नौहराधार

400 रुपए क्विंटल तक मिल रहा गन्ना

अमूमन गन्ने का दाम प्रति क्विंटल 310 से 315 रुपए है, लेकिन मांग के अनुरूप इसके दामों में वृद्धि हुई है। अभी गन्ना जूस बेचने वालों को 400 रुपए प्रति क्विंटल तक गन्ना मिल रहा है…

समय के साथ अब खेती के तरीके के भी बदलने लगे हैं। कल तक जहां गेहूं को किसान दराटी से काटते नजर आते थे, तो अब हिमाचली किसान भी पंजाब और हरियाणा के रंग में रंगने लगे हैं। इस बार गेहूं की कटाई में ऊना, पांवटा और कांगड़ा जिला के इंदौरा में कंबाइन का खूब इस्तेमाल हो रहा है। इंदौरा के मंड, ठाकुरद्वारा, बरोटा, मीलवां आदि इलाकों में कंबाइन के अलावा  कटर, रिपर आदि का जमकर इस्तेमाल हो रहा है, जो काम तीन दिन में होता था, अब वह तीन घंटे हो रहा है। हिमाचल सरकार अगर ऐसी मशीनें किसानों को सस्ते दामों पर मुहैया करवाए, तो वह दिन दूर नहीं, जब मैदानी प्रदेश हिमाचल के आगे पानी भरते नजर आएंगे।

– गगन ललगोत्रा, ठाकुरद्वारा।

माटी के लाल

बागीचे की कटिंग करना डोगरा जी से सीखिए

बागीचे में कटिंग तो सभी करते हैैं,लेकिन धर्मशाला के अग्रणी किसान उत्तम डोगरा का अंदाज ही निराला है। तस्वीर में नजर आ रही शानदार कटिंग डोगरा ने खुद की है। उन्हें नए नए स्टाइल से बागीचे की कटिंग के शौक है। डोगरा ऑफ सीजन सब्जियां उगाते हैं,तो नए नए फूल तैयार करने का भी शौक रखते हैं। कांगड़ा जिला मुख्यालय धर्मशाला से सटे खटेहड़ गांव निवासी उत्तम डोगरा ने बताया कि उन्होंने कई तरह के देसी बीज सहेज रखे हैं। फिलहाल आमजन से लेकर वीआईपी तक डोगरा के बागीचे का दौरा कर रहे हैं। दूसरी ओर डोगरा कहते हैं कि हर किसी को दो हजार देने से किसान का भला नहीं होगा। किसान का भला उसे खेती के लिए प्रेरित करने से होगा। उन्होंने सवालिया लहजे में पूछा कि आखिर बैल और गाय को पालने वाले किसान यानी असली गोरक्षकों को सरकार मदद क्यों नहीं देती। वह मानते हैं कि कर्ज माफी भी समस्या का स्थायी हल नहीं है। किसान टाइम मैनेजमेंट के साथ हाइटेक खेती करें। नई तकनीक से जुड़कर किसान का भला हो सकता है। 

फोन नं. 94182-92531

 -पूजा चोपड़ा

शिमला, सोलन, सिरमौर व बिलासपुर जिलों के  मौसम का पूर्वानुमान

आने वाले पांच दिनों के मौसम का पूर्वानुमानः

अगले पांच दिनों में मौसम साफ  व शुष्क रहने व 12 मई  को कहीं-कहीं हल्की वर्षा होने की संभावना है। दिन व रात के तापमान में 1-2 डिग्री सैल्सीयस की बढ़ोतरी होने की संभावना है। हवा की गति दक्षिण-पूर्व दिशा से 10 से 12 किलोमीटर प्रतिघंटा चलने तथा औसतन सापेक्षित आर्द्रता 18-58 प्रतिशत तक रहने की संभावना है।

सब्जी फसलों संबंधित कार्यः

फ्रांसबीन, खीरा, करेला तथा कद्दू के खेतों में बीजाई करें। टमाटर, बैंगन, शिमला मिर्च तथा कड़वी मिर्च की तैयार पौध अगर अभी तक नहीं लगाई  गई हो तो उसे लगा लें। कटुवा कीट के आक्रमण से बचाने के  लिए पौधों के तौलियों की  सिंचाई क्लोरपायरीफॉस 20 मिलीलीटर/10 लीटर पानी से करें। अदरक की बीजाई  3 गुणा 1 मीटर आकार की तथा 15-20 सैंटीमीटर ऊंची क्यारियों में 30 गुणा 20 सैंटीमीटीर की दूरी पर करें।

– मोहिनी सूद, नौणी

जीवामृत व धान्यांकुर अर्क बनाने का फार्मूला देगा महकमा

शिमला जिला के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। किसान व बागबानों को जीवामृत और सप्त धान्यांकुर बनाने की विधि पता नहीं है, उन्हें कृषि विभाग के अधिकारी ऑनलाइन व फोन पर जानकारी देंगे। आत्मा प्रोजेक्ट के तहत फामर्स को यह जानकारी देने के लिए अधिकारियों की ड्यूटी भी लगा दी गई है। वहीं बताया जा रहा है कि विभाग में रोजाना जीवामृत और धान्यांकुर अर्क बनाने की विधि जानने के लिए लगभग 10 से 15 किसानों के फोन भी आ रहे है। यही वजह है कि अब इन किसानों को अलग से यह जानकारी देने के लिए ऑनलाइन पोर्टल अलग बनाने की योजना भी बनाई जा रही है। विभाग का दावा है कि अगर गर्मिंयों में प्राकृतिक रूप से घोल बनाने का कार्य किया जाएं, तो दो व तीन दिन में यह पूरी तरह से तैयार होकर इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

प्रतिमा चौहान, शिमला

किसानों को नहीं मिल रहा आलू का बीज, परेशान

उपमंडल भरमौर की होली घाटी में किसानों को आलू का बीज नहीं मिल पा रहा है। जिसके चलते किसानों का कृषि विभाग के प्रति गहरा रोष पनपने शुरू हो गया है। किसानों का कहना है कि क्षेत्र में आलू की बिजाई का दौर शुरू होने वाला है। लेकिन विभाग अभी तक बीज ही मुहैया नहीं करवा पाया है। किसानों ने प्रशासन से भी मांग की है कि जल्द से जल्द उन्हें आलू का बीज मुहैया करवाया जाए। जाहिर है कि इन दिनों भरमौर क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में किसान आलू की बिजाई करते है। क्षेत्र में कई किसान ऐसे है, जो बडे़ पैमाने पर आलू का उत्पादन करते है। हर वर्ष कृषि विभाग की ओर से अपने बिक्री केंद्रों में यह बीज मुहैया करवाया जाता है। लेकिन इस वर्ष अभी तक विभाग बीज किसानों को उपलब्ध ही नहीं करवा पा रहा है। जिस कारण किसानों में भी विभाग के प्रति गहरा रोष है। किसानों ने विभाग और प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द उन्हें आलू का बीज मुहैया करवाया जाए।

 निजी संवाददाता-होली

किसान बागबानों के सवाल

  1. गर्मियों में पौधों को हर दिन कितने प्रतिशत पानी की जरूरत होती है?

गमिर्यों में पौधों को जितना पानी दिया जाए कम है। बस ध्यान रखें की धूप में पौधों को पानी न दें।

आप सवाल करो, मिलेगा हर जवाब

आप हमें व्हाट्सऐप पर खेती-बागबानी से जुड़ी किसी भी तरह की जानकारी भेज सकते हैं। किसान-बागबानों के अलावा अगर आप पावर टिल्लर-वीडर विक्रेता हैं या फिर बीज विक्रेता हैं,तो हमसे किसी भी तरह की समस्या शेयर कर सकते हैं।  आपके पास नर्सरी या बागीचा है,तो उससे जुड़ी हर सफलता या समस्या हमसे साझा करें। यही नहीं, कृषि विभाग और सरकार से किसी प्रश्ना का जवाब नहीं मिल रहा तो हमें नीचे दिए नंबरों पर मैसेज और फोन करके बताएं। आपकी हर बात को सरकार और लोगों तक पहुंचाया जाएगा। इससे सरकार को आपकी सफलताओं और समस्याओं को जानने का मौका मिलेगा।

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