खतरनाक कैंकर पर लस्सी पड़ी भारी

जिला शिमला के दर्जनों किसानों ने सेब के पौधों को लस्सी से बचाकर की मिसाल पेश

शिमला -अगर आपके पौधों पर कोई कीड़ा लगा हो, या फिर जंगली जानवर उस पेड़ के छीलकों को निकाल कर चले गए हों, तो ऐसे में दो से तीन दिन बासी लस्सी उस पेड़ पर डालंे, इससे आपके पेड़ की ग्रॉथ फिर से ठीक हो जाएगी। वहीं खास बात यह है कि पौधे में लगी सभी चोटें भी साफ हो जाएंगी। कृषि विभाग के इस फॉर्मूला से जिला के किसान व बागबानों के दर्जनों पौधों को दूसरी बार जान मिली है। कृषि विभाग का दावा है कि इस फॉर्मूले के अपनाने के बाद जंगली जानवरों द्वारा पौधों को नुकसान पहंुचाने के बाद सूखा पढ़ने की शिकायतें भी सामने नहीं आ रही हैं। अहम यह है कि इस फॉर्मूले का सबसे ज्यादा इस्तेमाल शिमला जिला के किसान व बागबानों ने ही किया है। दरअसल अपर शिमला में बागबानों के सबसे ज्यादा सेब के पौधों को बासी लस्सी से बचाने में लोगों को सफलता मिली है। बता दें कि इससे पहले किसान ऐसी स्थिति में स्प्रे का इस्तेमाल करते थे। इससे सेब के पौधों को बचाना तो जरूर बल्कि बागबानों का सेब का सीजन भी सही ढंग से नहीं हो पाता था। सेब के पौधों में हर साल पैदावार कम ही होती जा रही थी। यही वजह है कि प्राकृतिक खेती के अंर्तगत आने वाले इस फार्मूले को अब ज्यादा से ज्यादा किसान जरूरत मे लाने लगे हंै। जानकारी के अनुसार जिला कृषि विभाग ने लगभग 500 से ज्यादा ऐसे बागबानों के नाम दर्ज किए हैं, जो इस इस फॉर्मूले को अपना चुके हैं। विभाग का दावा है कि अब यही बागबान दूसरों को भी इस बारे में बता सकते हैं। जिला प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण से मिली जानकारी किसान व बागबानों के लिए आयोजित किए जाने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को इस बारे में जागरूक किया जाएंगा। उल्लेखनीय है कि बासी लस्सी का यह फॉर्मूला न केवल बड़े पौधों को सूखने से बचाएगा, बल्कि इससे अन्य छोटे – छोटे पौधों में लगे कीड़ांे को भी नष्ट करने में सहायता करेगा। प्राकृतिक खेती के अंर्तगत  कृषि विभाग ने पौधों को नष्ट होने से बचाने के लिए इसे शामिल किया है। पौधों में कीड़े लगने के बाद होने वाली इस बीमारी को कृषि विभाग ने फंगीसाइड का नाम दिया है। विभाग का दावा है कि कई वषांर्े पहले भी लोग पेड़,  व पौधों को बचाने के लिए इस फार्मूले का इस्तेमाल करते थे।

फफूंदनाशक के घटक

विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इस फॉर्मूले का इस्तेमाल पौधों में लगने वाली फफंूद को नियंत्रण करने के लिए किया जाता है। जानकारी के अनुसार एक एकड़ जमीन के लिए 200 लीटर खट्टी लस्सी पांच लीटर तीन दिन पुरानी होनी चाहिए। इसका इस्तेमाल पानी व खट्टी लस्सी को अच्छी प्रकार से मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार  यह विषाणुनाशक भी है।

 

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