खुले में कूड़ा फेंकने पर भड़के ग्रामीण

स्वारघाट -स्वारघाट कस्बे में सफाई व्यवस्था चाक चौबंद रखने का दावा करने वाला स्थानीय प्रशासन किस तरह स्वारघाट के कूड़े को कूड़े से पाटने में लगा है। इसका जीता जागता उदाहरण मतनोह-मंझेड़ सड़क है। जहां पर सफाई कर्मचारी स्वारघाट कस्बे का सारा कूड़ा ट्रैक्टर में भरकर उपरोक्त सड़क के किनारे खुले में फेंक रहे है, जबकि प्रशासन द्वारा ठोस, तरल एवं अन्य तरह के कूड़े के लिए अलग-अलग गड्डे बनाए हुए हैं। सफाई कर्मी  कूड़े  को उक्त गड्ढों में डालने की बजाय सड़क के किनारे खुले में ही फेंक रहे हैं। गले-सड़े कूड़े-कचरे से निकलने वाली तेज दुर्गंध से स्कूली बच्चों व ग्रामीणों का पैदल चलना दूभर हो गया है। वहीं, गंदगी से होने वाले रिसाव से ग्रामीणों के पेयजल स्रोत भी दूषित हो रहे हैं। इसके साथ ही खुले में फेंके गए कूड़े को आवारा पशु व बंदर इधर-उधर बिखेर रहे हैं और तेज हवा से कूड़ा-कचरा उड़कर हरे-भरे जंगल की सुंदरता को भी ग्रहण लगा रहा है। शुक्रवार को कुटैहला पंचायत के गांव मतनोह के ग्रामीणों बुद्धि राम, दीनानाथ, जयपाल, किशोरी लाल, बालकृष्ण, छोटा राम, देवेंद्र कुमार व रविंद्र कुमार आदि ने डंपिंग साइट पर जाकर स्वारघाट का सारा कूड़ा मतनोह-मंझेड़ सड़क किनारे खुले में फेंकने पर इसका कड़ा विरोध किया। ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासन के सफाई कर्मचारियों द्वारा पिछले करीब चार-पांच महीने से कूड़ा खुले में ही फेंका जा रहा है। हालांकि प्रशासन द्वारा यहां पर ठोस-तरल आदि कचरे के लिए अलग-अलग गड्ढे बनाए गए हैं, लेकिन फिर भी सफाई कर्मचारियों द्वारा कूडे़ को उक्त गड्ढों में न डालकर खुले में ही फेंका रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि जहां पर कूड़ा फेंका जा रहा, उससे 100 से 200 मीटर नीचे कई प्राकूतिक पेयजल जल स्रोत हैं। हालांकि बारिश होने पर भी कूड़े की गंदगी का रिसाव होगा, जो कि इन स्रोतों के पानी को दूषित कर देगा, जिससे गांव में कोई जानलेवा महामारी फेल सकती है। वहीं, कचरे से निकलने वाली दुर्गंध से स्कूली बच्चों और राहगीरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि खुले में फेंके जा रहे कूड़े-कचरे पर आवारा पशु, जंगली जानवर व बंदर आदि मुंह मार रहे हैं और कचरे को सड़क पर और जंगल में बिखेर रहे हैं। वहीं, तूफान व हवा आदि से कूड़ा-कचरा उड़कर हरे-भरे जंगल में बिखर रहा है। यही नहीं ग्रामीणों ने प्रशासन के डंपिंग साइट चयन करने पर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन को चेताया है कि अगर एक सप्ताह के भीतर खुले में फेंके गए कचरे को ठिकाने नहीं लगाया जाता और डंपिंग साइट को नहीं बदला जाता, तो मतनोह के ग्रामीण आंदोलन रास्ता अपनाएंगे, जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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