गगरेट में खुले में जलाया जा रहा कचरा

गगरेट —राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण पर्यावरण संरक्षण के लिए शहरी निकायों को प्रदेश में नदी-नालों में कचरा फेंकने के साथ खुले में कचरा न जलाने की बेशक सख्त हिदायत दे चुका है लेकिन यहां कौन देख रहा है, शायद इसीलिए नगर पंचायत गगरेट को यह हिदायत रास नहीं आ रही है। तरल व ठोस कचरा प्रबंधन के जंजाल में फंसी नगर पंचायत गगरेट के लिए कस्बे का कचरा ठिकाने लगाना ऐसी गले की फांस बनी है कि राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के आदेश को सलीब पर टांग कर नगर पंचायत द्वारा कचरे को खुले में जलाकर ही इसका निष्पादन किया जा रहा है। इससे बेपरवाह कि इससे स्वच्छ पर्यावरण पर तो असर पड़ ही रहा है बल्कि नगर पंचायत की यह लापरवाही गगरेट के साथ सटे जंगलों को तबाह भी कर सकती है। हालांकि जंगलों को तबाह होने की आशंका से भयभीत वन विभाग द्वारा इसके लिए नगर पंचायत प्रशासन को नोटिस भी जारी किया जा चुका है लेकिन कचरा ठिकाने लगाने की इस तकरीब हो अभी तक बदला नहीं गया है। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने प्रदेश सरकार को बाकायदा नोटिस जारी करते हुए शहरी निकायों द्वारा नदी-नालों में कचरे फेंकने के साथ कचरा खुले में जलाने पर सख्ती से प्रतिबंध लगाने की हिदायत दी है लेकिन इस हिदायत का असर कम ही देखने को मिल रहा है। हैरत की बात यह है कि प्रदूषण नियंत्रण विभाग भी नगर निकायों द्वारा बरती जा रही इस लापरवाही के प्रति नहीं जागा है। दरअसल गगरेट कस्बे से रोजाना निकलने वाले कचरे के वैज्ञानिक निष्पादन के लिए नगर पंचायत के पास कूड़ा संयंत्र ही नहीं है। ऊपर से अब नगर पंचायत पर तलर व ठोस कचरे का अलग-अलग निष्पादन करने का दबाव आ गया है। ऐसे में नगर पंचायत द्वारा अपनी नाकामी छिपाने के लिए गगरेट-होशियारपुर मार्ग पर जंगल के समीप जहां डंपिंग साइट बनाई गई है वहां रोजाना गिरने वाले कचरे को आग के हवाले कर दिया जा रहा है।  सबसे गंभीर विषय यह है कि जिस स्थान पर कचरा फेंक कर इसे आग के हवाले किया जाता है उसके साथ ही चीड़ के जंगल है। गर्मी के इस मौसम में जंगल में फैला चिलारू बारूद से कम नहीं है। अगर कहीं हवा के झोंके के साथ कोई चिंगारी जंगल में जाकर गिरी तो कई बेशकीमती चीड़ के पेड़ तो हलाक होंगे ही बल्कि कई निरीह वन्य जीव भी बेमौत मौत के मुंह में समा जाएंगे लेकिन नगर पंचायत प्रशासन इससे अंजान बना हुआ है। हालांकि नगर पंचायत प्रशासन की दलील यह है कि कोई और लोग ही कचरे में आग लगा जाते हैं जबकि नगर पंचायत प्रशासन ने इसकी शिकायत कभी पुलिस के पास करना भी गवारा नहीं समझा। उधर नगर पंचायत गगरेट के कनिष्ठ अभियंता राजीव ठाकुर का कहना है कि नगर पंचायत प्रशासन खुद परेशान है कि कचरे में आग कौन लगाता है। वहीं वन विभाग के डिप्टी रेंज अफसर सुभाष चंद का कहना है कि विभाग द्वारा नगर पंचायत को नोटिस जारी किया गया है अगर जंगल में आग लगती है तो इसकी जिम्मेवारी नगर पंचायत की होगी। प्रदूषण विभाग के वरिष्ठ पर्यावरण अधिकारी एसके धीमान से संपर्क करने पर संपर्क नहीं हो पाया।

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