गढ़ाकुफर में बरसे ओले

-सब्जियों को भारी नुकसान, ओलावृष्टि ने फिर तोड़ी किसानों व बागबानों की कमर

शिमला –जिला शिमला में ओलावृष्टि ने फिर से किसानों व बागबानों की कमर तोड़ कर रख दी है। शुक्रवार को ऊपरी शिमला के मतियाना के  गढ़ाकुफर व साथ लगते पांच-छह गांव में भारी ओलावृष्टि हुई है। ओलावृष्टि से सेब सहित सब्जियों को भारी नुकसान पहुंचा है।  शुक्रवार को दोपहर बाद गढ़ाकुफर, दलोगघाटी, काथला, गढा, रडी, कन्ड़ा व मझराणा में एकाएक भारी ओलावृष्टि हुई। उक्त क्षेत्रों में करीब 20 मिनट तक ओलावृष्टि होती रही, जिससे सेब सहित मटर, बीन्स और गोभी की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। भारी ओलावृष्टि के चलते सेब के पौधों में लगे दाने झड़ कर जमीन पर गिर गए हैं। वहीं मटर, बीन्स और गोभी के पौधे भी ओलावृष्टि से पूरी तरह तहस नहस हो गए हैं। जिला शिमला में अप्रैल माह के दौरान भी भारी ओलावृष्टि हुई थी। इस दौरान जिला शिमला के कुमारसैन, कोटखाई, चोपाल, देहा और नेरवा में सेब की फसल को भारी नुकसान पहुंचा था। अब फिर से मौसम के मिजाज बदले से बागबान चिंतित हो उठे हैं। मौसम विभाग ने जिला शिमला में 16 मई तक मौसम खराब बना रहने का पुर्वानुमान लगाया है। विभाग ने जिला के कुछ स्थानों पर शनिवार, 13 व 14 मई को भारी बारिश व ओलावृष्टि होने की चेतावनी भी जारी की है।

जिला में तीन दिन चलेगा तूफान

मौसम विभाग ने जिला शिमला में तीन दिनों के दौरान तूफान चलने की भी चेतावनी जारी की है। विभाग की मानंे तो जिला शिमला में तूफान की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा या इसे अधिक हो सकती है, जो किसानों व बागबानों के लिए नुकसान का कारण बन सकता है।

शिमला में शाम के समय चली ठंडी हवाएं

शिमला में शुक्रवार को शाम के समय ठंडी हवाएं चलीं, जिससे लोगों ने प्रचंड़ गर्मी से काफी हद तक की राहत ली है। हालांकि शिमला में सुबह के समय हल्की बारिश के बाद धूप खिली रही, जिससे दिन के समय लोगों को उमस भरी गर्मी की मार झेलनी पड़ी। मगर शाम के समय ठंडी हवाओं के चलने से मौसम खुशनुमा बना रहा।

 

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