गरीब बच्चें का सहारा बने धीरज वशिष्ठ

गगरेट —बिहार के आनंद कुमार की तरह कोचिंग क्लास चलाकर गरीब व मध्यम वर्गीय परिवारों के मेधावी विद्यार्थियों के सपने साकार करने में मदद करने वाले गगरेट के धीरज वशिष्ठ की कोचिंग क्लास की तुलना आनंद कुमार से इसलिए की जाती है। क्योंकि वह भी अब तक करीब तीस विद्यार्थियों को नीट व जेईईई में सफलता दिलाकर उनके सपने साकार करने में मददगार साबित हो चुके हैं। धीरज वशिष्ठ मौजूदा समय में राजकीय महाविद्यालय दौलतपुर चौक में भौतिकी के प्रवक्ता हैं और गरीब विद्यार्थियों को उनके सपने साकार करने में मदद करना उनका एकमात्र लक्ष्य है। बकौल धीरज वशिष्ठ जब वह पांच साल के थे तो उनके पिता की मृत्यु हो गई। मां ने बड़ी मुश्किल से उन्हें व उनके भाई-बहनों को पढ़ाया। उस समय जब उन्हें लगता था कि किसी विषय में उन्हें ट्यूशन चाहिए तो वह नहीं मिल पाती थी। हालांकि पिता जी चाहते थे कि उनका बेटा शिक्षक बने और इस सपने को साकार करने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की और फिर उनका सपना यह बन गया कि गरीब मेधावी विद्यार्थियों की वह मदद करें। उनके पांच-सात ऐसे विद्यार्थी भी हैं, जिनसे गुरु दक्षिणा के नाम पर उन्होंने कुछ नहीं लिया और ये बच्चे आज डाक्टर व इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैैं। धीरज वशिष्ठ इस समय परफेक्ट इंस्टीच्यूट भी चलाते हैं और उनके पास पढ़ने के लिए बच्चों में होड़ लगी रहती है। खास बात यह है कि जरूरतमंद बच्चों से फीस के नाम पर वह कुछ नहीं लेते बल्कि ऐसे बच्चे अपना लक्ष्य पा सकें इसी में उन्हें संतुष्टि मिल जाती है। आज जहां जेईईई व नीट की परीक्षा के लिए विद्यार्थी कोचिंग हासिल करने के लिए कोटा व चंडीगढ़ में कोचिंग लेने के बाद भी परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाते, वहीं धीरज वशिष्ठ के विद्यार्थी उनके पास ही कोचिंग हासिल कर इन परीक्षाओं को पास कर मिसाल कायम कर रहे हैं। धीरज वशिष्ठ का कहना है कि अगर कोई गरीब विद्यार्थी उनसे कोचिंग लेना चाहता है तो उसका स्वागत है शर्त यही है कि वह उनके बताए अनुसार ही तैयारी करें।

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