गिरिपार के हाटी आज भी अपने हक से वंचित

शिलाई—प्रधानमंत्री सहित भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं से मिले आश्वासन के बाद भी छह दशकों से गिरिपार की 133 पंचायतों के हाटी समुदाय के लोग आज भी अपने हक से वंचित हैं। जिला सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र के हाटी रविवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की नाहन रैली से खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। पिछले दिनों केंद्रीय हाटी समिति की पांवटा में हुई बैठक में समिति ने कांग्रेस व भाजपा से इस मुद्दे पर अपना पक्ष स्पष्ट करने की मांग की थी। समिति को उम्मीद थी कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह इस मुद्दे पर भाजपा का पक्ष स्पष्ट करेंगे, लेकिन नाहन रैली के दौरान अमित शाह ने इस मुद्दे का जिक्र तक नहीं किया, जिससे 133 पंचायतों के तीन लाख हाटियों का मनोबल टूट गया है। बताते चलें कि 1970 से देश की कांग्रेस पार्टी, जहां गिरिपार की जनता को वर्षों बरगलाती रही, वहीं सत्तारूढ़ भाजपा ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। दोनों दलों ने कई मर्तबा आश्वासन दिए, लेकिन गिरिपार के हाटियों को मात्र वोट तक सीमित रखा गया। लोकसभा चुनाव 2014 के दौरान भाजपा के तत्त्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष व वर्तमान गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने नाहन में जनसभा के दौरान कहा था कि यदि यहां के लोग भाजपा का सांसद जीताकर भेजते हैं और केंद्र में भाजपा की सरकार बनती है तो गिरिपार क्षेत्र को जनजातीय क्षेत्र प्राथमिकता के आधार पर घोषित किया जाएगा। इतना ही नहीं केंद्र के जनजातीय मंत्री जुओल ओराम ने क्षेत्र की सिद्धपीठ मां भंगायणी मंदिर में कसम खाई थी कि विधानसभा चुनाव के बाद गिरिपार को जनजाति का दर्जा दिया जाएगा, लेकिन बड़ी-बड़ी कसमंे व वादे करने वाली भाजपा ने लोकसभा चुनाव 2019 आते-आते इस मुद्दे को ही भुला दिया, जिसकी भाजपा को बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। केंद्रीय हाटी समिति के पूर्व अध्यक्ष प्रताप सिंह तोमर ने बताया कि वह इस बारे में टिप्पणी नहीं करेंगे, लेकिन समिति को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए कि हाटी समुदाय लोकसभा चुनाव 2019 में किसको अपना समर्थन दंे।

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