चंबा फंसा, नेरचौक-हमीरपुर-नाहन ओके

मेडिकल कालेजों में 2019-20 के बैच को एमसीआई की अप्रूवल, हमीरपुर ने भी अंडरटेकिंग देकर छुड़ाई जान

मंडी – हिमाचल के नए नवेले मेडिकल कालेजों में नेरचौक, नाहन, हमीरपुर को 2019-20 के बैच के लिए परमिशन मिल गई है, जबकि चंबा मेडिकल कालेज को अभी तक भी एमसीआई के बोर्ड ऑफ गवर्नर्ज की ओर से परमिशन जारी नहीं की गई है। हाल में ही मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कालेज नेरचौक, गवर्नमेंट मेडिकल कालेज नाहन और डा. राधाकृष्णनन मेडिकल कालेज हमीरपुर को वर्ष 2019-20 के बैच के लिए परमिशन जारी कर दी गई है, लेकिन पंडित जवाहर लाल मेडिकल कालेज चंबा को अभी तक भी परमिशन जारी नहीं हुई है। दरअसल कुछ माह पहले एमसीआई की टीम ने नाहन, चंबा, हमीरपुर और नाहन मेडिकल कालेज की इंस्पेक्शन की थी। इसमें हमीरपुर और चंबा में फैकल्टी डेफिशिएंसी काफी ज्यादा थी। इसलिए 17 मई को बाकायदा हमीरपुर और चंबा मेडिकल कालेज के प्राचार्य को दिल्ली तलब किया गया। इसमें खुद हिमाचल सरकार के स्वास्थ्य सचिव भी मौजूद थे। दिल्ली में दी गई प्रेजेंटेशन के बाद एमसीआई अंडरटेकिंग देकर हमीरपुर मेडिकल कालेज को परमिशन देने के लिए राजी तो हो गया और उन्हें परमिशन भी मिल गई, लेकिन चंबा मेडिकल कालेज को अभी तक परमिशन जारी नहीं हुई। दरअसल मेडकिल काउंसिल ने परमिशन देने से पहले 30 मई तक एक बार फिर से इंस्पेकशन के लिए कहा था। इसी परमिशन के बाद मेडिकल कालेज चंबा को अगले बैच के लिए परमिशन मिलनी थी, लेकिन अभी तक भी चंबा मेडिकल कालेज में इस्पेकशन ही नहीं हुई है। ऐसे में मेडिकल कालेज प्रबंधन के भी हाथ पावं फूले हुए हैं, क्योंकि आसपास के मेडिकल कालेजों से डाक्टर पहले ही चंबा मेडिकल कालेज भेजे जा चुके हैं, लेकिन अभी तक भी टीम इंस्पेकशन के लिए नहीं पहुंच रही।

जुगाड़ के सहारे चल रहे महाविद्यालय

नए मेडिकल कालेज जुगाड़ के सहारे चल रहे हैं, क्योंकि ऐसा कोई भी नया मेडिकल कालेज नहीं है, जहां सभी उपकरण हों। नेरचौक मेडिकल कालेज में सीटी स्कैन के लिए मरीज को 14 किलोमीटर दूर भेजा जाता है, तो बाकी मेडिकल कालेजों में, तो उपकरण छोड़ स्टाफ की ही भारी कमी है।

धरातल पर दिक्कत

हिम केयर योजना चलाकर हिमाचल सरकार ने एक वर्ग को बहुत बड़ी राहत, तो पहुंचाई है, लेकिन हकीकत यह भी है कि इस योजना का जमीनी स्तर पर मरीजों को जितना लाभ मिलना चाहिए, वह असल में मिल ही नहीं रहा।

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