चंबा-हमीरपुर मेडिकल कालेज की मान्यता संकट में

स्टाफ-उपकरणों की कमी पर दोनों संस्थानों के प्राचार्यों को बुलाया दिल्ली

मंडी – हिमाचल के नए नवेले मेडिकल कालेज हिचकोले खाते हुए आगे बढ़ रहे हैं। नेरचौक मेडिकल कालेज को जहां दूसरे और नाहन मेडिकल कालेज नाहन को तीसरे बैच की मान्यता प्राप्त करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ा था, तो वहीं हमीरपुर और चंबा मेडिकल कालेज की मान्यता भी खतरे में पड़ गई है। चंबा और हमीरपुर मेडिकल कालेज प्रबंधन से पूछा गया गया है कि क्यों न उनकी मान्यता रद्द कर दी जाए। दोनों ही आयुर्विज्ञान संस्थानों के प्राचार्य को 17 मई को दिल्ली तलब किया गया है। जानकारी के अनुसार इन दोनों मेडिकल कालेजों में फैकल्टी डेफिशिएंसी बहुत ज्यादा है। इसके अलावा इन्फ्रास्ट्रक्चर सहित अन्य कई मापदंडों को दोनों ही मेडिकल कालेज पूरा नहीं कर पा रहे हैं। जानकारी के अनुसार कुछ माह पहले एमसीआई की इंस्पेक्शन में पंडित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कालेज चंबा की फैकल्टी डेफिशिएंसी 50 फीसदी से ज्यादा थी, जबकि डा. राधाकृष्णन मेडिकल कालेज हमीरपुर की डेफिशिएंसी 53 फीसदी से अधिक थी। अब मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया का बोर्ड ऑफ गवर्नर मेडिकल कालेजों को दूसरे बैच की मान्यता देने से मना करता है, तो मेडिकल कालेज के साथ छात्रों का भविष्य भी खतरे में पड़ सकता है। बता दें कि हिमाचल के नए नवेले मेडिकल कालेज चंबा, नाहन, हमीरपुर व नेरचौक में फैकल्टी सहित टेक्नोलॉजी की अभी भी कमी है। हालांकि नेरचौक और नाहन मेडिकल कालेज फिर भी पटरी पर आ चुके हैं, लेकिन हमीरपुर और चंबा अभी दूसरे बैच के लिए ही जद्दोजहद कर रहे हैं। 

हमीरपुर के हालात

हमीरपुर मेडिकल कालेज में फैक्लटी की डेफिशिएंसी करीब 37 फीसदी है, जबकि रेजिडेंट डाक्टरों की कमी भी करीब 35 फीसदी है। ऐसे में मेडिकल कालेज हमीरपुर के लिए भी इस स्थिति से पार पाना काफी मुश्किल रहेगा। वहीं, हमीरपुर मेंडिकल कालेज के प्रिंसीपल से बात नहीं हो पाई।

चंबा की स्थिति

चंबा मेडिकल कालेज की डेफिसिएंशी अंतिम इंस्पेक्शन में 50 फीसदी से ज्यादा बताई जा रही थी। हालांकि मौजूदा समय में मेडिकल कालेज के प्राचाय डा. पीके पुरी के मुताबिक 37 फीसदी तक अभी डेफिशिएंसी है। इसमें भी डाक्टरों की 53 पोस्ट के लिए 20 तारीख से इंटरव्यू शुरू होने जा रहे हैं।

 

You might also like