चुनावी बेला में गायब हुए सिरमौर के अहम मुद्दे

नाहन—लोकसभा चुनाव अंतिम चरण पर है। भाजपा का जहां राष्ट्रीय नेतृत्व शिमला लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत प्रचार की कमान देश के प्रधानमंत्री व भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष संभाल चुके हैं, वहीं कांग्रेस की तरफ से फिलहाल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ही जिला सिरमौर की पांच विधानसभा सीटों में प्रचार की मशाल लेकर भाजपा को टक्कर दे रहे हैं। चुनाव की इस बेला पर जिला सिरमौर के स्थानीय मुद्दे गोण हैं। भारतीय जनता पार्टी के वर्तमान सांसद वीरेंद्र कश्यप ने लगातार पांच वर्ष तक जिला सिरमौर की सबसे पुरानी मांग गिरिपार के करीब तीन लाख लोगों से जुड़ा हाटी क्षेत्र का मुद्दा भी इस चुनाव में फिलहाल लुप्त हो गया है। रविवार को भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की रैली में किसी भी नेता ने जिला सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र की 133 पंचायतों से जुड़े हाटी के मुद्दे को प्राथमिकता नहीं दी। केवल मात्र भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने अपने संबोधन में नाहन मेडिकल कालेज व आईआईएम की उपलब्धि के अलावा सिरमौर जिला में नौ नए मार्ग का जिक्र अवश्य किया, परंतु वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव की इसी चौगान मैदान में आयोजित चुनावी जनसभा में जोरदार तरीके से भाजपा के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह ने वर्तमान सांसद वीरेंद्र कश्यप की मांग पर जिला सिरमौर के हाटी समुदाय को जनजातीय क्षेत्र में शामिल किए जाने का आश्वासन दिया था। इस बीच हाटी समुदाय के प्रतिनिधिमंडल दर्जनों बार वर्तमान भाजपा सरकार के केंद्रीय नेतृत्व से भी मिला। केंद्रीय हाटी समिति के प्रतिनिधिमंडल ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के अलावा केंद्रीय जनजातीय मंत्री जुओल आरोम के अलावा आरजीआई गवर्नर से भी मुलाकात कर इस मांग को सिरे चढ़ाने को लेकर काफी प्रयास किए। वर्तमान में हालत यह है कि अब लोकसभा चुनाव के लिए मात्र छह दिन का समय शेष बचा है, परंतु केंद्र व प्रदेश की भाजपा सरकार हाटी मुद्दे को लेकर जिला सिरमौर के अढ़ाई लाख लोगों से कोई वादा नहीं कर रही है। कांग्रेस भी इस मुद्दे को भुनाना चाहती है तथा स्पष्ट तौर पर कांग्रेस लोगों के बीच जाकर कह रही है कि भाजपा सरकार ने केवल हाटी समुदाय को पांच वर्ष तक जनजातीय क्षेत्र के नाम पर ठगा। यही नहीं जिला सिरमौर में देश के दो नामी औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब व पांवटा साहिब ऐसे हैं जहां पर करीब अढ़ाई हजार से अधिक छोटे, मध्यम व बड़े उद्योग स्थापित हैं। देश के नामी औद्योगिक घराने यहां पर अपने उद्योग संचालित कर रहे हैं। इन उद्योगों का कच्चा माल व यहां पर तैयार किए गए उत्पाद देश-विदेश में आयात निर्यात होते हैं। स्वतंत्रता के बाद जिला सिरमौर को रेल लाइन से जोड़ने का मुद्दा भी ठंडे बस्ते में है। भारतीय जनता पार्टी क्योंकि प्रदेश व केंद्र में सत्ता में है ऐसे में लोकसभा की चुनावी बेला में सिरमौर जिला को चंडीगढ़, अंबाला, यमुनानगर, देहरादून रेल लाइन से जोड़ने का मुद्दा भी टांय-टांय फिश हो गया है। इसके अलावा नाहन व पांवटा साहिब के करीब आधा दर्जन से अधिक अहम स्थानीय मुद्दे भी लोकसभा चुनाव में नहीं उठाए जा रहे हैं। ऐसे में सिरमौर के लोगों को इस बात का रंज है कि भले ही चुनावी आश्वासन सही, परंतु कांग्रेस व भाजपा जिला सिरमौर केे अहम मुद्दों से भटक गई है। जिला के नाहन में पासपोर्ट कार्यालय खोले जाने का मुद्दा भी फाइलों में दफन हो गया है। वर्तमान सांसद वीरेंद्र कश्यप ने नाहन में पासपोर्ट कार्यालय खोले जाने का आश्वासन दिया था, परंतुइस चुनाव में यह भी गोण हो गया है।

नहीं उठी सिरमौर की समस्याएं

लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान सिरमौर जिला के कुछ अहम मुद्दे गायब हो गए हैं। सिरमौर को रेललाइन से जोड़ना, गिरिपार को जनजातीय क्षेत्र घोषित करना, पांवटा साहिब में शुगर मिल स्थापित करना, नेशनल हाई-वे की बदहाली में सुधार, नाहन बाइपास की समस्या के अलावा नाहन के सेना क्षेत्र से जुड़ा विवाद भी फिलहाल फाइलों में बंद है।

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