चुवानी पहर में बढ़ता तनाव

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री

वरिष्ठ स्तंभकार

राजीव गांधी ने कहा था कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है, तो भूमि हिलती ही है। राजीव गांधी की यह हिलती हुई भूमि दिल्ली में तीन हजार सिखों को लील गई, लेकिन जो बात राजीव गांधी छिपा गए थे, वह यह कि दिल्ली में भूमि खुद नहीं हिली थी, बल्कि उसे सोनिया कांग्रेस के लोग ही जोर लगा कर हिला रहे थे और लोगों के गले में टायर  बांधकर उन्हें जला रहे थे। सोनिया कांग्रेस के लिए उत्तर तैयार करने वालों ने देखा मामला फंसता जा रहा है, इसमें भावनाओं की थोड़ी और चाशनी डालनी चाहिए। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी दोनों ही एक साथ उबल पड़े। हिमाकत की हद है कि जिस राजीव गांधी ने देश के लिए शहादत दी, उसी राजीव गांधी पर प्रश्न उठाए जा रहे हैं।  राजीव गांधी की शहादत पर कोई अंगुली नहीं उठा रहा और न ही उठाना चाहिए, लेकिन सबसे रहस्यमयी प्रश्न यह है कि राजीव गांधी के हत्यारों को जेल से बाहर निकालने के लिए पिछले लंबे अरसे से कौन प्रयास कर रहा है और क्यों कर रहा है…

लोकसभा चुनाव का अंतिम दौर बचा है, लेकिन इससे पहले दो घटनाएं ऐसी हुईं, जिससे सोनिया कांग्रेस के चेहरे पर केवल शिकन  ही नहीं पड़ी, बल्कि भूकंप ही आ गया है। सबसे पहले बालाकोट में भारतीय वायुसेना द्वारा पाकिस्तानी आतंकवादियों को मारे जाने के बारे में। अभी तक सोनिया कांग्रेस के लोगों को यह विश्वास ही नहीं हो रहा था कि भारत की वायुसेना ने पाकिस्तान के अंदर घुसकर आतंकवादियों का सफाया कर दिया। भारतीय वायुसेना पाकिस्तान के अंदर गई, यह यदि मान भी लिया जाए, तो उन्होंने पाकिस्तानी आतंकवादियों को मार दिया, यह मानना तो सोनिया कांग्रेस के लिए बहुत ही मुश्किल था। इसलिए वे कभी कहते रहे – पेड़ों पर बम गिरा कर वापस आ गए होंगे और कभी तो यह भी कहने लगे कि कहीं कोई कौआ मार दिया होगा।

भारत सरकार और सेना उन्हें लाख समझाती और सबूत देती रही कि पाकिस्तान के सैकड़ों आतंकवादी मारे गए हैं, लेकिन सोनिया कांग्रेस ने एक बार जिद्द पकड़ी, तो पकड़ी। खरगोश की तीन टांगें, चौथी है ही नहीं, लेकिन अब इटली के मीडिया ने खबर छापी है कि बालाकोट स्ट्राइक्स में पौने दो सौ के लगभग आतंकवादी मारे गए हैं। यह भारत के लोगों के लिए सुकून की बात है,  क्योंकि सोनिया कांग्रेस के लोग अब भारत की इस सफलता पर कोई प्रश्न नहीं उठा सकते।  भारत का आम आदमी मानता है कि जिस प्रकार किसी मुसलमान के लिए कुरान शरीफ में लिखी बात अंतिम सत्य है, इसी प्रकार सोनिया कांग्रेस के लिए इटली के मीडिया द्वारा सत्यापित कोई भी तथ्य अंतिम सत्य है। अपने-अपने विश्वास की बात है। खुदा का शुक्र है कि भारतीय सेना की साख बच गई अन्यथा सोनिया कांग्रेस ने तो पलीता लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। अभी तक सोनिया गांधी के पुत्र (कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ लगभग गालियों तक की भाषा का प्रयोग कर रहे थे।   यह भाषा राहुल गांधी प्रयोग कर रहे थे, इसलिए भारत के लोग इसको गंभीरता से नहीं ले रहे थे। इस मामले में भारत के लोगों ने उन्हें बेनिफिट आफ डाउट दिया हुआ है, लेकिन राहुल गांधी की देखादेखी में सोनिया कांग्रेस के दूसरे लोगों का भी जुबान से नियंत्रण हटने लगा और वे शुद्ध गालियां ही निकालने लगे। अब सौ से ऊपर हो जाने के बाद तो भगवान कृष्ण को भी उत्तर देना पड़ा था।

नरेंद्र मोदी ने भी सौ से ऊपर हो जाने के बाद ही उत्तर दिया। उन्होंने दो सवाल पूछे। बोफोर्स कांड में, जिसमें सिद्ध हो चुका है कि रिश्वत ली गई थी, सवाल केवल इतना बचा था कि पैसा किसके खाते में जमा करवाया गया था। इस पूरे कांड में राजीव गांधी की क्या भूमिका थी? बोफोर्स कांड  के सक्रिय दलाल क्वात्रोची का सोनिया परिवार से क्या संबंध था? नरेंद्र मोदी के केवल इस एक सवाल से पूरे सोनिया कांग्रेस परिवार में सुनामी आ गई है। जल्दी-जल्दी उत्तर तलाशे गए। अब सवाल उठा है तो भारत के लोग उत्तर भी चाहेंगे। इसलिए भाषण और उत्तर तैयार करने वालों को बुलाया गया। वे समझ गए कि उत्तर देना कठिन है, इसलिए मामले को भावना के स्तर पर भटकाना ही उचित होगा। इसलिए सोनिया कांग्रेस की ओर से इंदिरा गांधी की शहादत की कहानी सुनाई जाने लगी, लेकिन शहादत की इस कथा से भी एक प्रश्न निकल आया। इंदिरा की शहादत को सलाम, लेकिन उस शहादत को श्रद्धांजलि देने के लिए 1984 में दिल्ली में तीन हजार सिखों की अमानुषिक तरीके से जान लेना क्या जरूरी था? इसका उत्तर राजीव गांधी ने अपने वक्त में दे दिया था। इसलिए कांग्रेस के लोगों ने कहा कि जब राजीव गांधी ने उत्तर दे दिया था, तो उसके बाद उसी मुद्दे पर सवाल पूछा ही नहीं जा सकता। राजीव गांधी के उत्तर को ही अंतिम सत्य मान लेना चाहिए।

राजशाही और सामी संप्रदायों में यह होता है। वहां जो उत्तर राजा ने दे दिया हो, उसके बाद पूछने के सभी अधिकार समाप्त हो जाते हैं। राजीव गांधी ने कहा था कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है, तो भूमि हिलती ही है। राजीव गांधी की यह हिलती हुई भूमि दिल्ली में तीन हजार सिखों को लील गई, लेकिन जो बात राजीव गांधी छिपा गए थे, वह यह कि दिल्ली में भूमि खुद नहीं हिली थी, बल्कि उसे सोनिया कांग्रेस के लोग ही जोर लगा कर हिला रहे थे और लोगों के गले में टायर  बांधकर उन्हें जला रहे थे। सोनिया कांग्रेस के लिए उत्तर तैयार करने वालों ने देखा मामला फंसता जा रहा है, इसमें भावनाओं की थोड़ी और चाशनी डालनी चाहिए। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी दोनों ही एक साथ उबल पड़े। हिमाकत की हद है कि जिस राजीव गांधी ने देश के लिए शहादत दी, उसी राजीव गांधी पर प्रश्न उठाए जा रहे हैं।  राजीव गांधी की शहादत पर कोई अंगुली नहीं उठा रहा और न ही उठाना चाहिए, लेकिन सबसे रहस्यमयी प्रश्न यह है कि राजीव गांधी के हत्यारों को जेल से बाहर निकालने के लिए पिछले लंबे अरसे से कौन प्रयास कर रहा है और क्यों कर रहा है?

इस प्रश्न का उत्तर तो राहुल और प्रियंका ही दे सकते हैं, दूसरा कोई इसका उत्तर देने का अधिकार भी नहीं रखता। सैम पित्रोदा और मणिशंकर अय्यर भी नहीं। इसका उत्तर व्यावसायिक भाषण लिखने वालों से भी नहीं लिखवाया जा सकता। इसका उत्तर तो उन्हीं को देना होगा, जो इसका सही उत्तर जानते हैं। यह पारिवारिक प्रश्न है या पार्टी का प्रश्न है, इसका निर्णय भी परिवार ही कर सकता है। नरेंद्र मोदी ने गालियों की संख्या सौ के पार हो जाने पर ये प्रश्न उठा दिए हैं, जिससे एक बार फिर धरती हिलने लगी है। फर्क इतना है कि इस बार धरती सोनिया कांग्रेस के भीतर हिल रही है और भारत के लोग उनका उत्तर सुनने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

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