चूड़धार में फिर बिछी सफेद चादर

May 14th, 2019 12:10 am

नौहराधार—जिला सिरमौर की सबसे ऊंची चोटी चूड़धार में फिर सोमवार को ओलावृष्टि के साथ हल्की बर्फबारी हुई है। इसके साथ ऊंचाई वाले स्थानों में बारिश के साथ तेज ओलावृष्टि हुई, जिसके कारण फलदार पौधों की फ्लावरिंग को काफी नुकसान हुआ है। नौहराधार के चौरास, फागगनी, टारना तलांगना, जौ का बाग आदि क्षेत्रों में ओलावृष्टि ने कहर बरपाया है। मौसम के कड़े मिजाज देखकर बागबान चिंता में पड़ गए हैं। ओलावृष्टि से कई स्थानों पर मटर की फसल खेतों में पूरी तरह से बिछ गई है। इसके आलावा फ्रांसबीन, टमाटर की फसलों को भी भारी नुकसान हो गया है, जिस कारण से किसानों की आर्थिकी पर विपरीत असर पड़ने की आशंका बन गई है। हालांकि मटर की फसल अब अंतिम तुड़ान है। ओलावृष्टि से फली में दाग लग चुका है। कई जगह मटर खेतों में 90 फीसदी खत्म हो गए हैं। हालांकि कई बड़े बागबानों ने ओलावृष्टि से फसल को बचाने के लिए अपने बागीचों में जालियां लगाई गई हैं, मगर छोटे बागबान जिनके बागीचों में जालियां नहीं लगी है। ओलावृष्टि से उनके बागीचों में भारी नुकसान की सूचना है। ओलावृष्टि व बारिश से ऊंचाई वाले स्थानों के तापमान में फिर से गिरावट आई है। मौजूदा समय में तापमान में गिरावट भी सेब की फसल के लिए नुकसानदायक मानी जा रही है। इससे पहले मौसम अनुकूल रहने के कारण बागबानों को इस बार सेब की बंपर फसल होने की उम्मीद जाग गई थी और इन दिनों सेब की फसल की सेटिंग हो रही थी। यही नहीं कुछ स्थानों में सेटिंग पूरी भी हो चुकी थी, परंतु इस ओलावृष्टि से सेब के बीमे सहित फूल आदि झड़कर गिर गए हैं जो बागबानों के लिए निराशाजनक है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में इन दिनों सेब की फ्लावरिंग का पीक सीजन चल रहा है। ऐसे में ओलों की मार और तापमान की गिरावट सेब में होने वाली सेटिंग को प्रभावित करेगी। अगर मौसम कुछ यूं ही चलता रहा तो ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब की सेटिंग पर विपरीत असर पड़ेगा। बता दें कि जिला सिरमौर के अधिकतर क्षेत्रों में मौसम साफ बना रहा और तेज धूप खिली रही, मगर जिला के ऊंचाई एवं मध्य ऊंचाई वाले स्थानों पर दोपहर बाद सोमवार को काले बादल घिरने शुरू हो गए थे। इस दौरान ठंडी हवाओं के साथ आसमान में गर्जन का क्रम शुरू हुआ। ऊंचाई वाले स्थानों में तापमान जरूरत के हिसाब से कम चल रहा है जो किसानों व बागबानों के लिए दिक्कतें बढ़ा रहा है। मौसम विभाग की मानंे तो आने वाले दो दिन बाद फिर से मौसम करबट बदलेगा। इस दौरान फिर से तापमान में गिरावट आ सकती है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी फलदार पौधों का उत्पादन न के बराबर रहा था, जिस कारण से बागबानों को भारी नुकसान हुआ था।

मौसम मिजाज से बागबान- किसान परेशान

अप्रैल माह के दौरान मौसम के बदले तेवर देखकर किसान-बागबान चिंतित हैं। मौजूदा समय में सेब, आड़ू, प्लम, खुमानी आदि फलदार पौधों में फ्लावरिंग के साथ सेटिंग की प्रक्रिया चली हुई है। ऐसे में तापमान सामान्य बना रहने की जरूरत होती है, मगर क्षेत्रों में हो रही बारिश व ओलावृष्टि से जहां फसलों को नुकसान पहुंच रहा है, वहीं तापमान में भी उतार-चड़ाव का सिलसिला जारी है जो फसलों के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है।

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